छत्तीसगढ़

सभी कानून के दायरे में रहकर दायित्वों का निर्वहन करेें – डॉ. विश्नोई

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सभी कानून के दायरे में रहकर दायित्वों का निर्वहन करेें - डॉ. विश्नोई
मनेन्द्रगढ़। एमसीबी।भारत सरकार युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय तथा छत्तीसगढ़ शासन उच्च शिक्षा विभाग राष्ट्रीय सेवा योजना प्रकोष्ठ के निर्देशानुसार शासकीय विवेकानन्द स्नातकोत्तर महाविद्यालय मनेन्द्रगढ़ में प्राचार्य एवं कार्यक्रम अधिकारी रासेयो डॉ. सरोजबाला श्याग विश्नोई के संरक्षण एवं निर्देशन में 9वां संविधान दिवस राष्ट्रीय सेवा योजना एवं राजनीति विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में मनाया गया। विश्व के सबसे बडे़ लोकतंत्र में एकता समानता एवं समरसता के परिचायक पवित्र ग्रंथ संविधान को समर्पित दिवस संविधान दिवस पर सभी विद्यार्थियों अधिकारी कर्मचारी गण को प्राचार्य डॉ. सरोजबाला श्याग विश्नोई हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संविधान सभा द्वारा 26 नवम्बर 1949 को भारत का संविधान पारित हुआ अतः 2015 से प्रतिवर्ष 26 नवंबर को भारत में संविधान दिवस के रूप में मनाना प्रारंभ किया गया। इस अवसर पर उन्होने कहा कि संविधान राष्ट्र की आत्मा है, संविधान में उल्लेखित मौलिक कर्त्तव्यों का हमें पालन करना चाहिए संविधान ने हमें अधिकार दिए है, उनका कानून के दायरे में रहकर पालन करना चाहिए। डॉ. विश्नोई द्वारा सदन को बताया कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर संविधान निर्माता एवं प्रेम बिहारी नारायण रायजादा जिन्होने मूल प्रति में संविधान 251 पन्नों का संविधान 6 महीने में लिखा संभी के लिए वंदनीय है।

सभी कानून के दायरे में रहकर दायित्वों का निर्वहन करेें - डॉ. विश्नोई

विचार गोष्ठी में राजनीति विज्ञान की विभागाध्यक्ष प्राध्यापक अनुपा तिग्गा ने संविधान की प्रस्तावना पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संविधान हमारें लिए क्यों आवश्यक है। क्योकि संविधान ही हमें यह बताता है कि समूची व्यस्था कैसे काम करेगी। इसके अंतर्गत चुनाव प्रणाली, सरकार का गठन व उसका निलंबन, शक्तियों का बंटवारा अधिकारों की रक्षा इत्यादि जैसे गंभीर एवं जटिल मुद्दे आते है। संविधान का महत्व इसलिए भी है कि यह सरकारों को भी दिशा दिखाने का कार्य करता है। संविधान दिवस मनाने का मुख्य उदेश्य अपने अधिकारो कर्त्तव्यों के बारे में जागरूक होना है। भारतीय संविधान द्वारा देशवासियों को न्याय प्रदान करने का प्रयास किया गया है। सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय का मुख्य लक्ष्य व्यक्तिगत हित और सामाजिक हित के बीच सामंजस्य स्थापित करता है। श्रीमती नीलम द्विवेदी अतिथि व्याख्याता द्वारा मौलिक अधिकारों की जानकारी दी गई श्रीमती प्रभा राज ने भी उद्बोधन दिया। अंत में प्राचार्य डॉ. विश्नोई द्वारा संविधान के उद्देशिका का सामूहिक वाचन कराया एवं संविधान का पालन करने का सभी ने संकल्प लिया।
कार्यक्रम का संचालन आई.क्यू.ए.सी. समन्वयक डॉ. अरूणिमा दत्ता द्वारा किया गया।


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