छत्तीसगढ़

1975 का आपातकाल अलोकतांत्रिक और इतिहास का काला अध्याय – मेजर अनिल सिंह

दंभ से भरी निरंकुश कांग्रेस सरकार ने संविधान की मर्यादा को किया तार तार,अभिव्यक्ति की आजादी का घोंटा था गला - कृष्ण बिहारी जायसवाल

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बैकुंठपुर । कोरिया । भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान एवं प्रदेश भाजपा के निर्देशानुसार 25 जून को भाजपा कार्यालय बैकुंठपुर में आपातकाल के काला दिवस पर गोष्टी का आयोजन किया गया । आयोजन के प्रभारी मेजर अनिल सिंह मुख्य वक्ता के तौर पर उपस्थित रहे । गोष्टी के मंच का संचालन जिला महामंत्री पंकज गुप्ता के द्वारा करते हुए प्रभारी मेजर अनिल सिंह का स्वागत परिचय कराया गया । तत्पश्चात जिला अध्यक्ष कृष्ण बिहारी जायसवाल ने कार्यकर्ताओं के समक्ष गोष्टी पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए कहा की 25 जून 1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का वो काला अध्याय है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। आपातकाल के दौरान इस देश के आम लोगों को, लोकतंत्र के तमाम स्तंभों को बड़ी यातना से गुजरना पड़ा था । भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को भी यातना दी गई। जिला अध्यक्ष ने कांग्रेस की इंदिरा सरकार के अहंकारी दमनकारी करतूत पर रचित 1975 के आपातकाल को बताते हुए कहा की कांग्रेस की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अपने पद पर अयोग्य घोषित होने के बाद लोकतंत्र की हत्या करते हुए सारे नियम,कानून और संविधान को दर किनार करते हुए अपने पद पर बने रहने के लिए सभी राजनैतिक विपक्षी दलों,पत्रकारों,आम नागरिकों को आपातकाल लगा कर जेल में बंद करवा दिया था । प्रेस संस्थानों में आग लगा दी गई थी । इस देश के संविधान को क्षत विक्षत करते हुए कानूनों में ऐसे संशोधन किए गए थे जिससे समूचे राष्ट्र का नुकसान था । जिला अध्यक्ष कृष्ण बिहारी ने कहा की 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक 21 महीने की अवधि में भारत में आपातकाल घोषित था। तत्कालीन राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद ने तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी के कहने पर भारतीय संविधान की अनुच्छेद 352 के अधीन आपातकाल की घोषणा कर दी। जो की स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे विवादास्पद और अलोकतांत्रिक काल था। आपातकाल में चुनाव स्थगित हो गए तथा नागरिक अधिकारों को समाप्त करके मनमानी की गई। इंदिरा गांधी ने अपने राजनीतिक विरोधियों को कैद कर लिया और प्रेस पर प्रतिबंधित लगा दिया । प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर पुरुष नसबंदी अभियान चलाया गया।जो भारतीय इतिहास की सर्वाधिक काली अवधि थी । जिसे भारतीय जनता पार्टी और देश हर नागरिक समय समय पर और प्रत्येक वर्ष इस काले अध्याय आपातकाल की बरसी के रूप देश और समाज को अवगत कराते रहेगा और कांग्रेस की ऐसी कुरीतियों से आने वाली पीढ़ी को जागरूक करता जायेगा ।

मेजर अनिल सिंह ने आपातकाल काले अध्याय पर गोष्टी को किया संबोधित

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 25 जून, 1975 में भारत पर थोपे आपातकाल के आज 50 साल पूरे हो गए, आपातकाल की 50वीं बरसी पर गोष्टी के प्रभारी मेजर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आपातकाल लोकतंत्र का काला अध्याय है.लोकतंत्र का काला अध्याय है आपातकाल ,जो प्रतीक है असफलता की कुंठा से उपजे अहंकार और दमन के कुचक्र का । 1975 में आज ही के दिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने देश पर आपातकाल थोप दिया था, तब मां भारती की साहसी संतानों ने ही कड़ा प्रतिरोध किया और यातनाएं सहकर भी लोकतंत्र को पुनः स्थापित किया ऐसे लोकतंत्र लिए समर्पित सभी विभूतियों को मैं शत शत नमन करता हूं । श्री सिंह ने कहा की उन दिनों आपातकाल के दौरान मैंने भी 6 माह की यातनाएं झेला हूं । तत्पश्चात एक कांग्रेसी नेता को जमानत देने पर मुझे भी जमानत मिली मामले के दौरान मैं भी कांग्रेस की कुंठा करतूत और कुरीतियों से बचने 6 माह घर का त्याग किया था । कार्यकर्ताओं के समक्ष आपातकाल के 21 महीनों के एक एक दिन के अत्याचार और क्रूरता षण्यंत्र और साजिश पर प्रकाश डालते हुए श्री सिंह ने कहा की 25 जून 1975 को तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की थी. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी की संसद सदस्यता के चुनाव को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया गया था. इस पर इंदिरा गांधी बौखला गई और उन्होंने आनन फानन में 25 जून की रात को देश में आपातकाल लगा दिया. यह आपातकाल 21 मार्च 1977 तक लागू रहा. चुनाव रद्द होने के बाद इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा नही दी और जबरन आपातकाल लगाकर 2 साल तक सत्ता में बनी रहीं जिसके बाद देश में कांग्रेस की इंदिरा सरकार के विरोध की लहर तेज़ हो गई जिसे देख प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लोकसभा भंग कर चुनाव कराने की सिफारिश कर दी। चुनाव में आपातकाल लागू करने का फ़ैसला कांग्रेस के लिए घातक साबित हुआ। ख़ुद इंदिरा गांधी अपने गढ़ रायबरेली से चुनाव हार गईं। जनता पार्टी भारी बहुमत से सत्ता में आई और मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने। संसद में कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 350 से घट कर 153 पर सिमट गई और 30 वर्षों के बाद केंद्र में गैर कांग्रेसी सरकार का गठन हुआ। कांग्रेस को उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में एक भी सीट नहीं मिली। नई सरकार ने आपातकाल के दौरान लिए गए फ़ैसलों की जाँच के लिए जांच आयोग गठित की गई। हालाँकि नई सरकार दो साल ही टिक पाई और अंदरूनी अंतर्विरोधों के कारण 1979 में सरकार गिर गई। और इस तरह इंदिरा गाँधी द्वारा देश में लगाया गया आपातकाल भारत के राजनीतिक इतिहास की एक अमित घटना बन गई। गोष्टी में मुख्य रूप से प्रभारी मेजर अनिल सिंह,बैकुंठपुर विधायक भईया लाल राजवाड़े,जिला अध्यक्ष कृष्ण बिहारी जायसवाल,जिला उपाध्यक्ष लक्ष्मण राजवाड़े, शैलेश शिवहरे,जिला महामंत्री पंकज गुप्ता, विनोद साहू,नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती नविता शिवहरे,उपाध्यक्ष राजेश सिंह,जिला पंचायत सदस्य वंदना राजवाड़े, विमलकांत गुप्ता सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे


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