छत्तीसगढ़

सुना है आज समंदर को बड़ा गुमान आया है….. उधर ही ले चलो कश्ती जिधर तूफान आया है…..

Ghoomata Darpan

सुना है आज समंदर को बड़ा गुमान आया है..... उधर ही ले चलो कश्ती जिधर तूफान आया है.....

देश में आजादी के बाद सर्वाधिक अविश्वास प्रस्ताव का सामना इंदिरा गाँधी को करना पड़ा तो डॉ मनमोहन सिंह को इसका सामना ही नहीं करना पड़ा क्योंकि उनकी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया ही नहीं गया।कांग्रेस और ‘इंडिया’ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई थी ।यह 28वीं बार है जब केंद्र की सरकार अविश्वास प्रस्ताव का सामना कर रही थी और प्रधानमंत्री मोदी सरकार के लिए यह दूसरा मौका था।पिछले कार्यकाल में तेलुगु देशम पार्टी अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई थी,जिसके खिलाफ 330 वोट पड़े थे इस बार भी नंबर के लिहाज से सरकार मजबूत स्थिति में रही।
आजादी के बाद 28 बार अविश्वास लाया गया, लेकिन एक भी बार सरकार गिरी नहीं सिवाय मोरारजी देसाई सरकार के….. उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग से पहले ही इस्तीफा दे दिया था। पहली बार जवाहर लाल नेहरू की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। 23 बार कांग्रेस पार्टी की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया। 2 बार जनता पार्टी जबकि 2 बार बीजेपी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया भारत का इतिहास गवाह है कि इंदिरा गांधी के विरुद्ध 15 बार,पी वी नरसिम्हा राव- 3 बार,लाल बहादुर शास्त्री- 3 बार,मोरारजी देसाई 2 बार ,जवाहर नेहरू, राजीव गांधी तथा अटल बिहारी वाजपेयी के विरुद्ध 1-1 बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था।नरेंद्र मोदी (2018 में) 1 बार,हाल ही में दूसरी बार….।देश का पहलाअविश्वास प्रस्ताव 1963 में जवाहर लाल नेहरू के खिलाफ आया था।आजादी के बाद देश में पहला अविश्वास प्रस्ताव तीसरी लोकसभा संसद में पेश किया गया।उस समय जवाहर लाल नेहरू पीएम थे और 1962 के युद्ध में चीन से हार के बाद आचार्य जेबी कृपलानी उनकी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाये थे।हालांकि, 347 सांसदों के विरोध के बाद प्रस्ताव फेल हो गया और सिर्फ 62 सांसदों ने इसका समर्थन किया था।लाल बहादुर शास्त्री के खिलाफ तीन बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया।पहली बार 1964 में एनसी चटर्जी अविश्वास प्रस्ताव लाए और 307 सांसदों ने इसके विरोध में वोट किया।सिर्फ 50 सांसदों का ही समर्थन मिला, जिसकी वजह से प्रस्ताव खारिज हो गया?1965 में लाल बहादुर शास्त्री के खिलाफ एसएन द्विवेदी अविश्वास प्रस्ताव लाये थे, जिसे 44 सासंदों का समर्थन मिला।315 ने इसके खिलाफ वोटिंग की। इसी साल उनकी सरकार के खिलाफ एक और अविश्वास लाया गया, लेकिन 318 सांसदों ने उसके खिलाफ वोटिंग करके इसे गिरा दिया। स्वतंत्र पार्टी के एमआर मसानी यह अविश्वास प्रस्ताव लाए थे।

इंदिरा गांधी ने 15 बार
किया था सामना…..

इंदिरा गांधी के कार्यकाल में उनके खिलाफ 15 बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया।हालांकि,एक भी बार उनकी सरकार नहीं गिरी।1966 में दो बार,1967 में दो बार,1968 में दो बार,1969 में एक बार,1970 में एक बार,1973 में एक बार, 1974 में दो बार और 1975 में 1 बार,1981 और 1982 में भी 1-1 बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया।1981 में इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ जॉर्ज फर्नांडीज अविश्वास प्रस्ताव लेकर आये,लेकिन उन्हें 278 सांसदों का समर्थन मिला और प्रस्ताव खारिज हो गया। प्रस्ताव के पक्ष में सिर्फ 92 वोट डले थे.

जब गिर गई थी मोरारजी
देसाई की सरकार……

साल 1978 में मोरारजी देसाई की सरकार के खिलाफ नेता प्रतिपक्ष सीएम स्टीफन अविश्वास प्रस्ताव लाये थे,लेकिन यह भी ध्वनिमत से खारिज हो गया। एक साल बाद 1979 में फिर से अविश्वास प्रस्ताव लाया गया।इस बार प्रस्ताव लाने वाले वाई बी चव्हाण थे,लेकिन देसाई की सरकार गिर गई….उन्होंने प्रस्ताव पर वोटिंग से पहले ही इस्तीफा दे दिया और राजनीति से भी संन्यास ले लिया था।राजीव गांधी और अटल के खिलाफ 1-1 बार लाया गया अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था।साल 1992 और 1993 में नरसिम्हा राव की सरकार के खिलाफ तीन बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया।1987 में राजीव गांधी की सरकार को भी अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके खिलाफ वोट करने वालों की संख्या ज्यादा थी इसलिए यह खारिज हो गया।साल 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के खिलाफ कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी अविश्वास प्रस्ताव लाई थीं। इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 10 साल के कार्यकाल में एक भी अविश्वास प्रस्ताव नहीं आया। 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के खिलाफ पहला अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। हाल ही में दूसरा अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था ।

रिटायर अफसरों पर छ्ग
सरकार मेहरबान….!

सुना है आज समंदर को बड़ा गुमान आया है..... उधर ही ले चलो कश्ती जिधर तूफान आया है.....

छत्तीसगढ़ में पूर्व अफसरों पर अधिक विश्वास जताया जा रहा है,रिटायर होने के बाद आईएएस,आईपीएस औरआईएफएस अफसरों को संविदा नियुक्ति देकर काम चलाया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि फ्रेस अफसरों की कमी है पर पुराने अफसरों के अनुभवी होने का लाभ मिलना भी एक प्रमुख कारण हो सकता है वहीं सरकार का करीबी होना भी विशेष योग्यता का पैमाना है, केवल प्रमोटी आईएएस अनिल टुटेजा ही अपवाद हैं जिन्हें संविदा नियुक्ति नहीं मिली पर उसके पीछे ईडी आदि की जाँच बड़ा कारण रहा है।सूबे में संविदा नियुक्ति की बाढ़ सी आ गई है।प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा आम हो गई है कि सरकार ‘संविदा’ अफसरों के भरोसे चल रही है।’संविदा’ पाने वाले अफसरों के मातहत इससे नाखुश हैं।खुलकर कोई कुछ नहीं कहता,मगर दबी जुबां से प्रशासनिक गलियारों में इस पर जमकर चर्चा होने लगी है।आलम यह है कि संविदा अफसरों की सूची बनाकर किस्सागोई की जाने लगी है।अब पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग पर रेग्युलर अफसरों की नजरें टेढ़ी हो रही हैं।सूबे में संविदा पाने वाले अफसरों की लंबी सूची है।आईएएस बिरादरी में विवेक ढांड,अजय सिंह, एम के राउत,सुनील कुजूर,आर पी मंडल, डॉक्टर आलोक शुक्ला, डी डी सिंह,धनंजय देवांगन, निरंजन दास, टामन सोनवानी,दिलीप वासनिकर,अशोक अग्रवाल,अमृत खलको आदि के नाम शामिल हैं तो वहीं आईपीएस बिरादरी से डीएम अवस्थी को पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग मिली और अब संजय पिल्ले को सरकार पोस्टिंग देने जा रही है गृह विभाग ने जीएडी को फाइल भेज दी है।पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग पाने वालों में आईएफएस अफसर भी पीछे नहीं है।पीसीसीएफ रहे राकेश चतुर्वेदी और संजय शुक्ला दोनों अफसरों को पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग मिली। आईएफएस एस एस बजाज भी रिटायरमेंट के बाद पोस्टिंग पाने वाले अफसर रहे। ये शाश्वत सत्य है कि जब तक ओहदा, तब तक मान-सम्मान….वर्ना कई नामी ब्यूरोक्रेट हुए हैं, जिनके रिटायरमेंट के बाद उन्हें कोई पूछने वाला भी नहीं हुआ। यदा उनके किए कामों पर चर्चा ज़रूर हो जाती है। वैसे अभी छ्ग लोक सेवा आयोग, मानव अधिकार आयोग, लोक आयोग में भी कुछ रिटायर अफसरों को समायोजित किया जाना तय माना जा रहा है।

“महादेव” की कृपा अब
तो नहीं रही…….!

सुना है आज समंदर को बड़ा गुमान आया है..... उधर ही ले चलो कश्ती जिधर तूफान आया है.....

छ्ग पुलिस प्रशासनिक सेवा के 2अफसरों पर “महादेव” की कृपा बनी हुई थी। भिलाई दुर्ग के महादेव की कृपा के चलते इन पर कुछ बड़े अफसरों की भी कृपा बनी हुई थी यह बात और है कि अब कृपा करनेवाले महादेव के बड़े भक्त ज़ब से दुबई चले गये हैं, ईडी की जाँच शुरू हो गई है,एक वरिष्ठ अफसर की वापसी हो गई है तब से चर्चा तेज है कि दोनों अफसरों के जिले में अदला बदली हो सकती है…? सावन माह में महादेव की नाराजगी का क्या परिणाम निकलता है इसका इंतजार इनके साथी तथा मातहत अफसर भी कर रहे हैं….?

और अब बस….

0किस संभाग में कमिश्नर और एक कलेक्टर एक ही बैच के आईएएस हैं…!दोनों में ठन भी गई है….!
0एक अफसर अपनी करीब डेढ़ दर्जन मौसी और एक मामा से रिश्ता निभाते-निभाते परेशान से हो गये हैँ …?
0एसपी की तबादला सूची आखिर किसके कारण रुकी हुई है….!
0ईमानदारी आखिर किस आईजी को भारी पड़ गई….?


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