छत्तीसगढ़

साल में एक दिन ही खुलनेवाली, भारत की सबसे लम्बी ‘मंदीप खोल गुफा ‘

वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे की कलम से...…{किश्त 142}

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खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में घने जंगलों के बीच है ‘मंडीप खोल गुफा’…. इसकी खासियत ये है कि साल में एक बार खुलती है।(इस साल 14 मई को गुफा खुली थी) अक्षय तृतीया के बाद के पहले सोमवार को ही हर साल गुफा का द्वार खोला जाता है।परंपरा के मुताबिक ठाकुरटोला जमींदारी के सदस्यों द्वारा पहली पूजा की जाती है। बाद में हजारों लोग शिवलिंग के दर्शन करने गुफा में पहुंचते हैं।वहाँ मौजूद शिवलिंग की विधिविधान से पूजा की जाती है साल में एक बार खुलने वाली मंडीप खोल गुफा को ठाकुरटोला जमींदारी के अंतर्गत आने के साथ ही परंपरागत परिवार के सदस्य ही खोलते हैं,बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहित पर्यटक गुफा खुलने के बाद अंदर पहुंचते हैं।गुफा में पहुंचने के लिए एक नदी को 16 बार पार करके लोग मंडीप खोल गुफा पहुंचते हैं।जमींदार परिवार के सदस्यों के अनुसार ”गुफा के अंदर कई रहस्य छिपे हुए हैं।गुफा में चमकीले पत्थर पाये जाते हैं, मीना बाजार,अजगर गुफा,चम गादड़ गुफा ,श्वेत गंगा भी है। गुफा का रहस्य आज भी बरकरार है।कई किलोमीटर घने जंगलों का सफर तय कर इस गुफा तक लोग पहुंचते हैँ।गुफा का रहस्य अभी भी नहीं सुलझा है,गुफा की गहराई का भी अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है। इस गुफा को देश की सबसे लंबी गुफा माना जाता है, एशिया में मंडीपखोल गुफा का नंबर दूसरा या तीसरा है यानी आज तक इस गुफा का छोर ही नहीं मिला है। इसलिए भी लोग एक दिन इस गुफा के दर्शन करने के लिए आते हैं, लेकिन सभी लोगों को शाम होते ही बाहर आना होता है।मंडीप खोल गुफा के कई रहस्य हैं। साथ ही यहां तक की यात्रा भी काफी रोमांच कारी होती है। तेज गर्मी में गुफा में शीतलता होती है। सकरे मुखवाली इस गुफा के अंदर कई बड़े कक्ष हैं। कुछ साल पहले पुरातत्व विभाग द्वारा इस गुफा का सर्वेक्षण किया गया था, जिसमें पाया गया कि यह गुफा देश की सबसे लंबी, एशिया की दूसरी, तीसरी सबसे लंबी गुफा है। इसके इतिहास में काफी रहस्य छिपे हुए हैं,अनुसंधान होना अभी बाकी है।

मैकल पर्वत माला का खूबसूरत हिस्सा….

भौगोलिक दृष्टिकोण से मंडीप खोल गुफा मैकल पर्वत माला के खूबसूरत हिस्से में स्थित है। यहां पहुंचना सरल नहीं है, गुफा तक पहुंचने का कोई स्थाई रास्ता नहीं है। पैलीमेटा या ठाकुरटोला तक ही सड़क मार्ग मौजूद है। इसके बाद घोर जंगल से होकर पगडंडियों की सहायता से पहाड़ों को पार करते हुए रास्ते में पड़ने वाली नदी और नालों को भी पार करना पड़ता है। गुफा के पास स्थित कुंड से निकलने वाली श्वेतगंगा को रास्ते में 16 बार पार करना पड़ता है तब बाबा के दर्शन हो पाते है।मंडीप खोल” या मंदीप खोह के नाम से इसे जाना जाता है….खोह अर्थात् गुफा। मंडीप खोल एक प्राकृतिक गुफा है, जिसके गर्भ में प्रकृति के विचित्रता ,रहस्यमयता के साथ समाविष्ट हैं। मंडीप खोल गंडई से लगभग 35 किमी दूर पश्चिम में ठाकुर टोला जमींदारी के पास स्थित है।यहाँ पहुँचने के लिए गंडई (नर्मदा) बाला घाट मुख्य मार्ग के 10 किमी से आगे पश्चिम दिशा की ओर लगभग 15 किमी वन मार्ग से जाना पड़ता है। बैशाख शुक्ल पक्ष की अक्षय तृतीया के बाद पड़ने वाले पहले सोमवार को साल में एक दिन ही खुलने वाली इस गुफा का कारण शायद इस स्थान की बिह ड़ता या निर्जनता हो सकती है? इस दिन मंडीप खोल में प्रकृति को जानने – समझने के लिए पर्यटकों की बड़ी भीड़ एकत्रित होती है।ग्राम नर्मदा अर्थात नर्मदा मैय्या के पवित्रकुंड से 1 किमी की दूरी के बाद वन क्षेत्र प्रारंभ हो जाता है। सड़क किनारे की पहाड़ियां, हरे- भरे पेड़- पौधे जैसे हवा में हाथ लहराकर प्यार से सिर झुकाकर सबका स्वागत करते हैं। गरगरा घाटी का मनोरम दृश्य, ऊंचे-ऊंचे सागैन के वृक्ष, जंगलों से आती वनफूलों की खुशबु मन को आनंद से विभोर कर देती है। गरगरा के पास ही स्थित है-डोंगेश्वर धाम चोड़रा पाट। कितनी उदार है यहां प्रकृति, जो अपने सौन्दर्य से आंखों को तृप्त करती है।


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