छत्तीसगढ़

“ऊंची नीची पहाड़ियों के रोमांच से भरपूर पर्यटन एवं पिकनिक स्थान खर्रा”

पर्यावरण व धरोहर चिंतक, बीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव (पिकनिक एवं पर्यटन केंद्र 14  )-- आइए चलें -

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"ऊंची नीची पहाड़ियों के रोमांच से भरपूर पर्यटन एवं पिकनिक स्थान खर्रा"

यदि आप चट्टानों से टकराकर अठखेलियां करते हसदो नदी के छोटे-छोटे 5 फुट के जलप्रपात देखना चाहते हैं तब खर्रा पर्यटन स्थल आपके अनुकूल पर्यटन स्थल है. यहां हस्दो नदी की धार के बीच एक बड़ी चट्टान को देखकर हस्दो दो धाराओं में बढ़ जाती है और पत्थरों से ऊपर चढ़कर जब नीचे गिरती है तब इसका मनोरम 5 फुट का जलप्रपात ऐसा प्रतीत होता है मानो हसदेव नदी यहां अपना बचपन याद कर रही हो और इस बाल स्वरूप को दिखाने को उतावली हो रही है. डूमर पहाड़ के पीछे बहती हस्दो नदी दूसरी ओर खुरई पहाड़ के किनारे किनारे आगे बढ़ती हुई सिरौली में सिद्धपीठ दक्षिण मुखी हनुमान के चरण स्पर्श और आचमन करती हुई आगे बढ़ती है. . आगे चलते मनेन्द्रगढ़ में हसिया नदी इसका स्वागत करती है. यहां हसिया नदी से गलबहियाँ मिलती हसदो नदी मनेन्द्रगढ़ के 60000 आबादी की प्यास बुझाती है.

"ऊंची नीची पहाड़ियों के रोमांच से भरपूर पर्यटन एवं पिकनिक स्थान खर्रा"
छत्तीसगढ़ राज्य खनिज एवं वन संपदा से भरपूर राज्य है इसमें सरगुजा, बस्तर और बिलासपुर संभाग का अंचल पेड़ों और जंगलों से भरा हुआ है . सरगुजा संभाग के कोरिया एवं एमसीबी जिला सतपुड़ा के सघन साल वनो के साथ-साथ सागौन एवं मिश्रित वनो के साथ साथ नदियों से  घिरा क्षेत्र है. इस एम सी बी.जिले के उत्तर एवं दक्षिणी सीमा जो खड़गवाँ विकासखंड से शुरू होकर भरतपुर विकासखंड तक लगभग 200 किलोमीटर की लंबी दूरी का अधिकांश हिस्सा घने जंगलों से होकर गुजरता है. इस जिले का सम्पूर्ण क्षेत्रफल लगभग 5900 वर्ग कि. मी. का आधा हिस्सा 2500 वर्ग कि. मी. वनो से भरा हुआ है. सतपुड़ा वन श्रृंखला की यह संपदा अपने साथ कई पहाड़ और नदियों को समेटे कई जगह ऐसे खूबसूरत दृश्य उपस्थित करती हैं जो बरबस ही हमारा ध्यान आकर्षित करते हैं. इनमें से कुछ स्थान ऐसे हैं, जो परिवार और मित्रों के साथ प्रकृति के गोद में कुछ समय बिताने और जंगलों के रोमांच को नजदीक से देखने के साथ पिकनिक और पर्यटन के लिए उपयुक्त स्थान बन गए हैं.

"ऊंची नीची पहाड़ियों के रोमांच से भरपूर पर्यटन एवं पिकनिक स्थान खर्रा"
मनेन्द्रगढ़ से अंबिकापुर राष्ट्रीय राजमार्ग 43 से कटनी से गुमला जाने के मार्ग पर मनेन्द्रगढ़ से 13 किलोमीटर दूरी पर उदल कछार रेलवे स्टेशन से एक कि.मी. आगे चलने के बाद अपनी उपस्थिति दर्ज करता है डूमर पहाड़. सागौन के वृक्षारोपण की शुरुआत इसी डूमर पहाड़ से होती है. इसी पहाड़ के पहले एक पक्की सड़क पूर्व दिशा की ओर मुड़ती है. इसी मोड़ पर सड़क के किनारे बने अवतार होटल में आप चाय नमकीन का आनंद ले सकते हैं और आगे का रास्ता भी पूछ सकते हैं.

"ऊंची नीची पहाड़ियों के रोमांच से भरपूर पर्यटन एवं पिकनिक स्थान खर्रा" प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में बनी यही पक्की सड़क आपको खर्रा पिकनिक स्थान तक ले जाने के लिए तैयार है. लगभग दो किलोमीटर पक्की सड़क से चलने के बाद इसी पक्की सड़क की समाप्ति से पहले ग्राम पंचायत की एक कांक्रीट रोड यु आकार मे घुमकर इस पक्की सड़क से मिलती है। हमें खर्रा पहुंचने के लिए इसी कांक्रीट रास्ते से आगे चलना होगा. यही रास्ता हमें गांव के कच्चे पक्के मकान खेती-बाड़ी और जुगाली करती गाय भैंसों के बीच से गुजरता हुआ आगे का रास्ता दिखाता है. ऊंचे नीचे कच्चे रास्ते से लगभग 3 किलोमीटर आगे चलने के बाद खर्रा नाला का चौड़ा पाट दिखाई पड़ने लगता है. बरसात के दिनों में पहाड़ों से बटोर कर अपने पानी से हसदो को समृद्ध करने वाला यह खर्रा नाला गर्मी के आगमन के साथ सूखने लगता है. कहीं-कहीं पर ग्रामीण आपको थोड़े-थोड़े रुके हुए पानी में मछली मारते दिखाई पड़ सकते हैं. उनके चेहरे की खुशी और भोजन ढूंढने के संघर्ष का यह संवेदनशील नजारा भी अपने आप में बड़ा रोमांचक होता है, जिसमें एक परिवार के बच्चे बूढ़े एवं महिलाएं मिलजुलकर खुशी खुशी थोड़ी सी मछलियों के लिए भारी मशक्कत करते दिखाई पड़ते हैं.लेकिन इसी नाले के पानी भर जाने के कारण इस पिकनिक स्थान पर आना आसान नहीं होगा. खर्रा नाले के इसी ढलान से लगभग एक कि.मी.आगे की यात्रा पूर्ण होने पर आपका सामना लगभग सौ फीट उँची पहाड़ी से होता है. इसी पहाड़ी की उँचाईयों तक पहुंचने के बाद हसदो नदी की जलधारा का बहाव आपको आकर्षित करने लगता है. जहां आपकी थकान समाप्त हो जाती है. यहीं से नीचे उतरकर आप पिकनिक स्थान पर पहुंच सकते हैं. यदि भोजन बनाने की व्यवस्था लेकर आप इस स्थान पर जायेंगे तब आपको हस्दो नदी का शुद्ध जल खाना बनाने और पीने के लिए उपलब्ध होगा.

"ऊंची नीची पहाड़ियों के रोमांच से भरपूर पर्यटन एवं पिकनिक स्थान खर्रा"
यदि आप चट्टानों से टकराकर अठखेलियां करते हसदो नदी के छोटे-छोटे 5 फुट के जलप्रपात देखना चाहते हैं तब खर्रा पर्यटन स्थल आपके अनुकूल पर्यटन स्थल है. यहां हस्दो नदी की धार के बीच एक बड़ी चट्टान को देखकर हस्दो दो धाराओं में बढ़ जाती है और पत्थरों से ऊपर चढ़कर जब नीचे गिरती है तब इसका मनोरम 5 फुट का जलप्रपात ऐसा प्रतीत होता है मानो हसदेव नदी यहां अपना बचपन याद कर रही हो और इस बाल स्वरूप को दिखाने को उतावली हो रही है. डूमर पहाड़ के पीछे बहती हस्दो नदी दूसरी ओर खुरई पहाड़ के किनारे किनारे आगे बढ़ती हुई सिरौली में सिद्धपीठ दक्षिण मुखी हनुमान के चरण स्पर्श और आचमन करती हुई आगे बढ़ती है. . आगे चलते मनेन्द्रगढ़ में हसिया नदी इसका स्वागत करती है. यहां हसिया नदी से गलबहियाँ मिलती हसदो नदी मनेन्द्रगढ़ के 60000 आबादी की प्यास बुझाती है.

"ऊंची नीची पहाड़ियों के रोमांच से भरपूर पर्यटन एवं पिकनिक स्थान खर्रा"

वे दिन अब बीते दिनों की बातें हो गई, जब 1970 में भाप- इंजन की रेल गाड़ी इसी पहाड़ी के किनारे किनारे चला करती थी और मनेन्द्रगढ़ से विश्रामपुर तक सवारी रेल गाड़ी में यदि इंजन ड्राइवर को आप निवेदन कर लेंगे तब वह 1 मिनट के लिए इस पिकनिक स्पॉट पर रेल गाड़ी रोक दिया करते थे. पिकनिक के शौकीन लोग यहीं से उतरकर इस पिकनिक स्थल तक पहुंचते थे. अब 1970 – 80 का वह समय गुम हो चुका है .भाप इंजन की जगह अब विद्युत इंजन चलने लगे हैं. अब समय की पाबंदियों के अनुसार एक सौ बीस बोगी की मालगाड़ी चलने लगी है, लेकिन आज भी आपकी यात्रा के दौरान इन्हीं पहाड़ियों के किनारे किनारे गुजरती मालगाड़ी और सवारी गाडियां आपका ध्यान खींचती है. जिसे देखकर बच्चे खुशी से उछलने लगते है. जो उनकी स्मृतियों में शामिल हो जाती हैं. अब ग्राम पंचायत उदल कछार अपने संसाधनों से पिकनिक स्थल तक जाने के लिए कच्चा रास्ता बना चुकी है, किंतु वहां तक पहुंचाने के लिए जंगलों के बीच से गुजराना एक रोमांचक यात्रा का हमें एहसास कराती है . ऊंची नीची छोटी-छोटी पहाड़ियों की मिट्टी और पत्थर भरे रास्ते हमें संभल कर चलने के लिए मजबूर करते हैं. इस पिकनिक स्थान तक जाने के लिए दो पहिया एवं चार पहिया वाहन का प्रयोग भी किया जा सकता है, लेकिन इस मार्ग पर दो पहिया वाहन की सवारी किसी खतरे से कम नहीं है फिर भी कई नवयुवकों को दो पहिया वाहन से चलते हुए इस रास्ते पर देखा जा सकता है. वन विभाग एवं ग्राम पंचायत द्वारा बनाए गए कच्चे मार्ग पर जीप जैसे बड़े चक्के के चार पहिया वाहन ही उपयुक्त है। कार से जाने पर आपको 2 किलोमीटर पहले ही अपनी कार कहीं सुरक्षित स्थान पर खड़ी करनी पड़ेगी. जीप जैसे चार पहिया वाहन इस पिकनिक स्थल तक पहुंचने हेतु उपयुक्त वाहन है.

"ऊंची नीची पहाड़ियों के रोमांच से भरपूर पर्यटन एवं पिकनिक स्थान खर्रा"

डूमर पहाड़ के जंगल में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने सागौन के इमारती पेड़ों का लंबा वृक्षारोपण किया है किंतु इस मार्ग से चलने पर इसका दुष्प्रभाव हमें दिखाई पड़ता है. सागौन के जंगलों में वन्य जीवों के लिए भोजन की उपलब्धता नहीं होने से वन्य पक्षी एवं जीव जंतु अब दिखाई नहीं पड़ते जो हमारे जैव विविधता को समाप्त कर रही है. इस पर्यटन स्थल में पहुंचने पर आप भी इसे महसूस करेंगे कि वह जंगलजंगल कैसे कहलाएगा जिसमें जंगली जानवर या पक्षियों के झुंड ना दिखाई पड़े जिसमें तोता, कोयल या कोई नई चिड़िया दिखाई ना पड़े. वन विभाग से हमारा अनुरोध है कि वृक्षारोपण में मिश्रित जंगलों की परंपरा डाली जाए जिसमें वन्यजीवों को भी रहने की आजादी हो और सभी पशु पक्षी प्राकृतिक आंचल की छाया में उड़ते और खेलते कूदते नजर आएं. यदि आप पिकनिक स्थल की रोमांचक यात्रा के शौकीन है, तब खर्रा का यह पर्यटन एवं पिकनिक स्थल आपको परिवार एवं मित्रों सहित बुला रहा है. आइए और इस पर्यटन की मधुर यादों को अपने जीवन भर के लिए समेट कर रख लें.
बस इतना ही. अगली बार फिर चलेंगे किसी और यात्रा पर …. ।


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घूमता दर्पण, कोयलांचल में 1993 से विश्वसनीयता के लिए प्रसिद्ध अखबार है, सोशल मीडिया के जमाने मे आपको तेज, सटीक व निष्पक्ष न्यूज पहुचाने के लिए इस वेबसाईट का प्रारंभ किया गया है । संस्थापक संपादक प्रवीण निशी का पत्रकारिता मे तीन दशक का अनुभव है। छत्तीसगढ़ की ग्राउन्ड रिपोर्टिंग तथा देश-दुनिया की तमाम खबरों के विश्लेषण के लिए आज ही देखे घूमता दर्पण

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