छत्तीसगढ़

रामचरितमानस को राष्ट्रीय सन्दर्भों से जोड़कर मिश्र जी ने की अद्भुत साहित्य सेवा-डॉ राजन यादव

साहित्य मनीषी डा,बलदेव प्रसाद मिश्र की १२५ वीं  जयंती

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रामचरितमानस को राष्ट्रीय सन्दर्भों से जोड़कर मिश्र जी ने की अद्भुत साहित्य सेवा-डॉ राजन यादव

राजनांदगाँव । डॉ बलदेव प्रसाद मिश्र को मानस प्रकांड मर्मज्ञ  इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने राम चरित मानस के हर चरित्र की गूढ़ विवेचना की और उन्हें तत्कालीन स्वाधीनता आंदोलन के सन्दर्भों में जोड़ा। इस नाते उन्होंने हिंदी के साथ साथ भारतीय संस्कृति की यशस्वी सेवा की। उक्त विचार स्थानीय डॉ बलदेव प्रसाद मिश्र शा. उच्चतर माध्यमिक शाला में डॉ मिश्र की 125वीं जयंती पर आयोजित परिसंवाद में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ में  हिंदी साहित्य के प्राध्यापक व मानस के प्रख्यात विवेचक डॉ राजन यादव ने मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किये। उन्होंने आगे बताया कि मिश्र जी ने रामचरितमानस के चरित्र राम, सीता, लक्ष्मण व भरत को अद्भुत रूप से काव्यबद्ध  कर अमर कर दिया है। सीता और भरत का चित्रण कर मिश्र जी ने सहित्य व मानस रसिकों के लिए अविस्मणीय योगदान दिया। उनकी कविताओं में स्फूर्त करने वाली सकारात्मक शक्ति और उदात्त शिल्प स्पष्ट है। मानस पर उनकी व्याख्या का उस समय कोई सानी नहीं था।  तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद उन्हें राष्ट्रपति भवन मे मानस प्रवचन हेतु अक्सर आमंत्रित करते थे । उनकी रचनाओ मे तुलसी दर्शन, कौशल किशोर, साकेत संत  हिंदी सहित्य में विशिष्ट स्थान रखते है।

रामचरितमानस को राष्ट्रीय सन्दर्भों से जोड़कर मिश्र जी ने की अद्भुत साहित्य सेवा-डॉ राजन यादव

इस अवसर पर अपने विवेचन उद्बोधन में दर्शनाचार्य सुरेंद्र दुबे ने मिश्र जी के राम और कृष्ण चरित्र का तुलनात्मक विश्लेषण कर श्रोताओं को मंत्र मुक्त कर दिया। उन्होंने द्वैत अद्वैत, जीव और ब्रह्म, उपनिषद एवं वेदांत दर्शन की अद्भुत उपस्थिति मिश्र जी के साहित्य में बताई । उन्होंने कहा की मिश्र जी का नाटक शंकर दिग्विजय और वैराग्य शतक भारतीय दर्शन से अभिप्रेरित है । मिश्र जी ने भारतीय दर्शन को अपने साहित्य में प्रतिष्ठित किया.

रामचरितमानस को राष्ट्रीय सन्दर्भों से जोड़कर मिश्र जी ने की अद्भुत साहित्य सेवा-डॉ राजन यादव

परिसंवाद में संस्मरण सुनाते हुए दिग्विजय महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर आर पी दीक्षित ने मिश्र जी के व्यक्तित्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मिश्र जी समय के पाबंद होने के साथ साथ अध्ययन के प्रति बेहद गम्भीर थे। वे सारी चिट्ठियों को व्यवस्थित  बंडल बनाकर रखते, किताबों की महवत्पूर्ण बातों को रेखांकित करते। डॉ मिश्र जी नांदगाँव की साहित्य त्रयी के अनमोल साहित्यकार थे। इस अवसर पर दिग्विजय महाविद्यालय में हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ शंकर मुनि राय ने कहा कि मिश्र जी का लेखन उनके श्रम और विवेचन को दर्शाता है। वे उत्कृष्ट साहित्यकार, कुशल प्रशासक और अच्छे व्याख्याकार थे।

समारोह में शाला के प्राचार्य  कैलाश शर्मा ने कार्यकम की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से नई पीढ़ी को नगर के इतिहास पुरुषों के बारे में ज्ञान मिलत है।मिश्र जी ने हिंदी सहित्य में नांदगॉंव का नाम स्थापित किया। शाला विकास समिति के अध्यक्ष राकेश जोशी ने भी इस अवसर पर उपस्थित श्रोताओं को सम्बोधित किया।

डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र व्यक्तित्व व् कृतित्व प्रचार प्रसार समिति तथा नांदगाँव संस्कृति व साहित्य परिषद के संयुक्त तत्वावधान में डॉ. मिश्र के अवदान पर केंद्रित इस परिसंवाद के प्रारंभ में नादगांव साहित्य परिषद के अध्यक्ष अखिलेश चन्द्र तिवारी ने प्रतिवेदन व स्वागत भाषण में कहा कि मिश्र जी का साहित्यिक अवदान संस्कारधानी की पहचान है। धन्यवाद ज्ञापन देवेंद्र कुमार तिवारी (व्याख्याता) ने किया। परिसंवाद का प्रभावी संचालन डॉ चन्द्र शेखर शर्मा ने किया।

परिसंवाद के पश्च्यात समिति द्वारा आयोजित काव्य पाठ व महाविद्यालय स्तर की निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को स्मृति चिन्ह तथा पुरुस्कार व अन्य प्रतियोगियों को मैडल देकर सम्मानित किया गया। परिसंवाद में व विभिन्न शालाओं के प्राचार्य, विद्यार्थीगण, शिक्षकगण व अंचल के साहित्यकार यथा  डॉ. शंकर मुनि राय, डॉ सूर्यकांत मिश्रा, आचार्य सरोज द्विवेदी, गिरीश ठक्कर,वाय के तिवारी, प्रकाश  शुक्ला, महेंद्र बघेल, राजकुमार चौधरी,प्रो, लालचंद सिन्हा, आत्माराम कोसा,गजेंद्र बक्शी, जगदीश प्रसाद मिश्रा, अजय शुक्ला, कैलाश श्रीवास्तव , अखिलेश तिवारी,  भारती गौते, संगीता दिवेदी आदि  उपस्थित थे। परिसंवाद के पूर्व शाला में डॉ मिश्र की नवीन प्रतिमा का अनावरण इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय  के  दृश्य एवं कला संकाय के अधिष्ठाता तथा हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजन यादव के द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रो आर पी दीक्षित, मिश्र जी के पौत्र प्रदीप मिश्र, अजय शुक्ला शाला के प्राचार्य कैलाश शर्मा, अध्यक्ष राकेश जोशी, सदस्य अनीश जैन समेत पुरा शाला परिवार व नगर के सुधिजन उपस्थित रहे। डॉ. मिश्र की प्रतिमा की स्थापना व अनावरण  शाला के प्राचार्य श्री कैलाश शर्मा, शाला विकास समिति के अध्यक्ष श्री  राकेश जोशी एवं व्याख्याता श्री देवेंद्र कुमार तिवारी अलका पाण्डेय, हेमंत देशमुख, चंद्रकांत चंद्राकर, विशेष संयोजकत्व में हुआ.


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