छत्तीसगढ़

छ्ग का नागलोक: रामायण,महाभारत काल से जुड़ी हैँ दँत कथाएं

वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे की कलम से....{किश्त 140)

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नागलोक छत्तीसगढ़ के जशपुर में स्थित है। इसे तपकरा के नाम से जाना जाता है।आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है। इसकी गिनती आज भी पिछड़े इलाकों में होती है। देश में सांपों की सबसे ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं। बताया जाता है कि इस जगह सांपों की करीब 70 प्रजातियां हैं,कई प्रजातियों के सर्प विषैले हैं।जंगलों से घिरा जशपुर का तपकरा इलाका जादुई तिलस्म से भरा हुआ है। यहां पर स्थित पहाड़ पर एक गुफा है। जो करीब 400 मीटर दूर तक फैली है। कोतेविरा कपाट द्वार या पाताल द्वार कहा जाता है।लोगों का मानना है कि जो भी इस गुफा में गया वापस नहीं लौटा, इसीलिये गुफा के मुख्यद्वार को एक बड़ी चट्टान से बंद करके रखा गया है। तपकरा क्षेत्र में शिवजी का प्राचीन मंदिर भी है। बताया जाता है कि पहले यह दंडकारण्य वन में पड़ता था। लंकापति रावण की बहन शूर्पनखा,शिव की पूजा करती थीं। वनवास के दौरान श्रीराम,सीता के साथ ईव नदी के किनारे बने इसी मंदिर में शिव की आराधना करते थे। मान्यताओं है कि पातालद्वार से ही नागराज आकर शिव की पहरेदारी करते थे। राम के जाने के बाद भी शिव के पास नाग पहरा देते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक आज भी एक काला नाग,मंदिर, शिवलिंग की पहरेदारी करते हुये भी दिख ही जाता है। नागलोक का महाभारत काल से भी रिश्ता है। कहा जाता है कि द्वापरयुग में जब भीम छोटे थे, दुर्योधन ने धोखे से उन्हें जहरीली खीर खिला दी थी मरणासन्न अवस्था में बहते हुये ईव नदी में आ गए थे, जहां नदी में स्नान कर रही नाग कन्याओं की नजर उन पर पड़ी। वे भीम को इलाज के लिए नागलोक ले गई, बाद में इंसानों का प्रवेश नागलोक में वर्जित कर दिया गया। बताया जाता है कि भीम के स्वस्थ हो जाने पर नागलोक के राजा से मिलें।उन्होंने भीम कोहजार हाथियों का बल दिया। इसी के चलते भीम अधिक बल शाली हो गए थे। प्राचीनग्रंथों के अनुसार नागलोक के राजा भीम के बाद किसी अन्य इंसान को उनके लोक में नहीं आने देना चाहते थे। इसीलिये दूसरों के प्रवेश पर रोक लगा दी। अगर गलती से अगर कोई उनके लोक पहुंच जाता है तो वो वापस कभी लौट ही नहीं पाता है। जशपुर जिले के कोतेबीरा धाम में नागलोक की कई कहानियाँ प्रचलित हैं। यहां के लोगों कि मान्यता है कि यहां स्थित कोतेबीरा धाम से सीधे नागलोक का रास्ता है।लोग इस गुफा को ही नागलोक का प्रवेश द्वार कहते हैं। लोगों की मानें तो प्राचीन समय में यहां देवदूत रहा करते थे, कुछ लोगों ने लालच में आकर उनसे सोने चांदी के बर्तन छीनने का प्रयास किया तो,देवता सर्प का रूप धारण कर इसी मार्ग से पाताललोक चले गये….? इस क्षेत्र में किंग कोबरा, करैत जैसे विषधर सांपों की संख्या ज्यादा है वहीं विचित्र प्रजाति के सांप ग्रीनपीट वाइपर, सरीसृप प्रजाति के जीव,ग्रीन कैमे लियन, सतपुड़ा लेपर्ड और लिजर्ड भी यहां पाए जाते हैं। ग्रीनपिट वाइपर कानाम ट्रिमरसेरसस सलजार है,जो छग के अलावा अरुणाचल प्रदेश में ही पाया जाता है, इसका विष कोबरा की अपेक्षा धीमा असर करता है,इस सांप का उल्लेख हॉलीवुड फिल्मों के हैरी पॉटर श्रृंखला की में किया गया है। जशपुर जिले में बाकि जिलों की तुलना में सबसे ज्यादा सांप पाये जाते हैं। दूसरे जिलों की अपेक्षा यहां सर्पदंश से ही सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। जशपुर के फरसाबहार तहसील से लगे इलाकों को नागलोक के नाम से जाना जाता है। यहां 70 तरह के जहरीले सांप पाये जाते हैं। यहां के कई गाँवों को लोग सापों की बस्ती के नाम से भी पुकारते हैं। यहां अलग- अलग प्रकार के जहरीले सांप पाए जाते हैं। सर्पदंश की घटना यहां आम बात है। जिले में बाकि जिलों की संख्या में स्नैक कैचरों का दावा है कि यहां इतने जहरीले सांप हैं कि अगर किसी इंसान को काटें तो चंद मिनटों में मौत हो जाए।जशपुर जिले के फरसाबहार तहसील से लगे क्षेत्रों को नागलोक के नाम से जाना जाता है। छ्ग को ओडिशा से जोड़ने वाली स्टेट हाईवे के किनारे स्थित तपकरा और आसपास के गांव में अधिक संख्या में किंग कोबरा, करैत जैसे विषैल सर्प पाये जाते हैं।


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