छत्तीसगढ़

वसीयतें अपने नाम लिखवा लेने से कुछ नहीं होता…. ये तो उड़ान तय करेगी आसमान किसका है….

वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे

Ghoomata Darpan

वसीयतें अपने नाम लिखवा लेने से कुछ नहीं होता.... ये तो उड़ान तय करेगी आसमान किसका है....

संसद के विशेष सत्र के आयोजन में सरकार ‘एक देश एक चुनाव’ पर चर्चा संभव है। वैसे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में केंद्र सरकार ने एक कमेटी भी बना दी है।हालांकि एक देश एक चुनाव पर संविधान में संशोधन जरुरी है वैसे संशोधन के बाद भी कई राज्य सरकारों का समर्थन भी जरुरी होगा?गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही विपक्ष की तरफ से ऐसे दावे किए गये हैं कि मोदी सरकार इस बार आम चुनाव समय से पहले करा सकती है। दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि केंद्र की मोदी सरकार जनवरी फरवरी में लोकसभा चुनाव करा सकती है। वहीं,अब पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के बाद बिहार के सीएम नीतीश कुमार के हालिया बयान से इन चर्चाओं में दम नजर आ रहा है। ममता बनर्जी और नीतीश कुमार ने कहा है कि यह लोग लोकसभा चुनाव समय से पहले भी करवा सकते हैं।अभी यह बातें सत्ता और सियासत के गलियारों में आम नहीं हुई हैं,लेकिन सत्ता के उच्च स्तर पर कुछ खास लोगों ने इस तरह के संकेत देने शुरू कर दिये हैं कि सरकार और भाजपा के शीर्षस्थ स्तर पर इसे लेकर न सिर्फ मंथन चल रहा है,बल्कि यह आकलन भी हो रहा है कि लोकसभा और चार राज्यों के विधानसभा चुनावों को साथ कराने में कितना सियासी फायदा या नुकसान है।वैसे संसद के विशेष सत्र में यूसीसी और महिला आरक्षण बिल लाने की भी चर्चा तेज है…!

गैस सिलेंडर 200 रु
सस्ता और चर्चा….

केंद्र सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में कटौती की है। मोदी सरकार ने सभी उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस के दामों में 200 रुपये की कटौती की है। वहीं उज्जवला योजना के लाभार्थियों के लिए 400 रुपये की कटौती की गई है। इससे 33 करोड़ परिवारों को फायदा होगा।बता दें क‍ि कुछ ही महीने में पांच राज्‍यों में चुनाव होने वाले हैं। इनमें मध्‍यप्रदेश, छत्‍तीसगढ़़ और राजस्‍थान जैसे महत्‍वपूर्ण राज्‍य भी शाम‍िल हैं। दो राज्‍यों में मुख्‍यमंत्र‍ियों ने सस्‍ते में गैस स‍िलेंडर देने की घोषणा कर दी थी। राजस्‍थान की कांग्रेस सरकार के मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत ने 500 रुपए में स‍िलेंडर देने की योजना शुरू की है। मध्‍य प्रदेश के भाजपायी मुख्‍यमंत्री श‍िवराज‍ स‍िंंह चौहान ने भी 450 रुपए में स‍िलेंडर देने की घोषणा कर दी है। इसके बाद राज्‍य में जगह-जगह लोग गैस एजेंसी पर पहुंचने लगे, लेक‍िन उन्‍हें 450 रुपए में स‍िलेंडर नहीं म‍िला….।लोकसभा चुनाव में अभी एक साल से कम का समय बचा है और विपक्ष महंगाई को एक बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में मोदी सरकार का यह कदम आम जनता को राहत, निश्चित ही चुनाव में लाभ को लेकर जोड़ा जा रहा है।

पूर्व नौकरशाह और
राजनीति में सक्रियता….

वसीयतें अपने नाम लिखवा लेने से कुछ नहीं होता.... ये तो उड़ान तय करेगी आसमान किसका है....

वसीयतें अपने नाम लिखवा लेने से कुछ नहीं होता.... ये तो उड़ान तय करेगी आसमान किसका है....

वसीयतें अपने नाम लिखवा लेने से कुछ नहीं होता.... ये तो उड़ान तय करेगी आसमान किसका है....

सियासत में सबसे सफल पूर्व नौकरशाह में अजीत जोगी का नाम सबसे ऊपर आता है। जोगी पहले आईपीएस और फिर आईएएस रहे। उन्‍होंने भी कलेक्‍टरी छोड़कर कर राजनीति में प्रवेश किया। कांग्रेस की राजनीति में जोगी बड़ा नाम बन गए थे। जोगी छत्‍तीसगढ़ के पहले मुख्‍यमंत्री रहे। राज्‍यसभा और लोकसभा सदस्‍य भी रहे हैं।छत्‍तीसगढ़ की सेवानिवृत्‍त आईएएस जिनेविवा किंडो ने अपनी राजनीति पारी की शुरुआत कर दी है। प्रमोटी आईएएस किंडो ने रायपुर में मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल की मौजूदगी में कांग्रेस प्रवेश किया। छत्‍तीसगढ़ की राजनीति में यह कोई पहला मौका नहीं है जब कोई पूर्व नौकरशाह राजनीति में प्रवेश किया है। इससे पहले करीब दर्जनभर अफसर सियासी पिच पर अपना भाग्‍य आजमा चुके हैं या आजमा रहे हैं। हालांकि चुनावी राजनीति में इनकी सफलता का ग्राफ बेहद कमजोर है।शिशुपाल सोरी जैसे चंद नाम हैं जो चुनाव जीते हैं।आज के दौर के आईएएस अफसरों में सबसे बड़ा नाम ओपी चौधरी का है। 2005 बैच के आईएएस रहे चौधरी ने 2018 के चुनाव के पहले नौकरी छोड़कर भाजपा के साथ सियासी पारी की शुरुआत की। पार्टी ने उन्‍हें कांग्रेस के सबसे मजबूत गढ़ खरसिया सीट से मैदान में उतारा। चौधरी वह चुनाव हार गए। पर इस बार भाजपा की घोषित सूची में खरसिया से उनका नाम शामिल नहीं है?
2018 के चुनाव में पूर्व आईएएस शिशुपाल सोरी ने कांग्रेस की टिकट पर भाग्‍य आजमाया था, आज वे विधायक हैं। सोरी और चौधरी के साथ ही अभी कई और पूर्व आईएएस औरआईपीएस चुनावी रण में भाग्‍य आजमाने की तैयारी में हैं। इनमें एसीएस के पद से सेवानिवृत्‍त और अब कांग्रेस नेता सरजियस मिंज भी शामिल हैं। मिंज अभी राज्‍य वित्‍त आयोग के अध्‍यक्ष हैं।सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में आए पूर्व आईएएस आरपी त्‍यागी तो दलबदल भी कर चुके हैं। पहले वे कांग्रेस में थे अब भाजपा में पहुंच गए हैं। 2023 में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे पूर्व नौकरशाहों में गणेश शंकर मिश्रा और नीलकंठ टेकाम का नाम भी शामिल हैं। दोनों भाजपा से टिकट के दावेदार हैं।2013 में कांग्रेस की टिकट पर गुंडरदेही विधानसभा से चुने गए आरके राय ने डीएसपी पद से नौकरी छोड़कर राजनीति में प्रवेश किया था। हालांकि 2018 में वे जनता कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़े और हार गए। आहिवारा से विधायक रहे सांवलाराम डहरे वाणिज्यककर अधिकारी थे। इसी तरह पुलिस से सेवानिवृत हुए रामलाल चौहान भाजपा की टिकट पर सरायपाली से विधायक चुने गए थे। सेवानिवृत्‍त पुलिस अफसर श्यामलाल कंवर भी कांग्रेस की टिकट पर रामपुर सीट से विधायक चुने गए थे। 2018 के चुनाव में जकांछ ने सेवानिवृत आईएएस एमएस पैकरा और सेवानिवृत एसडीओ अर्जुन हिरवानी को प्रत्याशी बनाया था। इसी तरह रिटायर डीएसपी विभोर सिंह को कांग्रेस ने कोटा से टिकट दिया था।पूर्व नौकरशाहों के लिए कांग्रेस और भाजपा ही नहीं सर्व आदिवासी समाज भी एक विकल्‍प है। सेवानिवृत्‍त आईपीएस अकबर राम कोर्राम ने सर्व आदिवासी समाज की तरफ से भानुप्रातपपुर सीट पर हुए उपचुनाव में अपना भाग्‍य आजमाया था। कोर्राम तीसरे स्‍थान पर रहे।आईएएस बीपीएस नेताम भी चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेंडि़या दिवंगत आईपीएस रविंद्र भेंडि़या की पत्‍नी हैं। दिवंगत रविंद्र भी लोक सभा चुनाव लड़ने के इच्छुक थे पर उनके सेवा में रहते ही उनकी पत्‍नी ने चुनावी राजनीति में कदम रख दिया था।आईपीएस आर सी पटेल भी कांग्रेस में गये थे पर उन्हें टिकट नहीं मिली,आईपीएस भारत सिँह भी पिछली बार से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।वहीं एक डीआईजी भी भाजपा प्रवेश कर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं तो एक पूर्व आईएफएस बड़गंईया भी भाजपा प्रवेश कर चुके हैं पर उन्होंने चुनाव लड़ने की अभी तक इच्छा जाहिर नहीं की है।

जेल अस्पताल, स्कूल में
ठहरीँ हैं दोनों मैडम…..

वसीयतें अपने नाम लिखवा लेने से कुछ नहीं होता.... ये तो उड़ान तय करेगी आसमान किसका है....

रायपुर सेन्ट्रल जेल में हाल-फिलहाल व्हीआई पी की आवक बढ़ी है… पहले आईएएस,प्रमुख सचिव बाबूलाल अग्रवाल,उसके बाद आईपीएस गुरविंदर पाल सिंह जेल में रहे अब तो उनकी नौकरी भी चली गई है। उनके बाद दो आईएएस समीर विश्नोई और रानू साहू सहित छ्ग प्रशासनिक सेवा की अधिकारी सौम्या चौरसिया आदि भी जेल पहुंच गये है,ये सभी ईडी की जाँच के बाद जेल में दाखिल हुए हैं, वहीं कुछ अफसरों के भी जेल जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है? इधर जेल के महिला सेल के अस्पताल में सौम्या का डेरा है जाहिर है वहाँ किसी महिला कैदी की इंट्री प्रतिबंधित ही है तो कोरबा की पूर्व कलेक्टर रानू साहू को महिला जेल के ही स्कूल के एक भाग में पर्दा लगाकर ठहराया गया है। वहाँ के अफसरों और कैदियों को आश्चर्य होता है कि दोनों महिला अफसरों में बातचीत ही नहीं होती है…! वैसे दोनों एक ही कमरे में भी तो ऱह सकती थीं…?इन दोनों स्थानों पर कैदियों की बात तो दूर जेल का स्टाफ भी जब तक बुलावा नहीं आता नहीं जाता है क्योंकि करीब 8 जेल आरक्षक से लेकर अफसर तक दुस्साहस के कारण हटाये जा चुके हैं… इनके पास सभी सुख सुविधाएं उपलब्ध हैँ ऐसी चर्चा है….?

और अब बस…

0देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू छ्ग के प्रवास पर आई और उन्होंने ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ को भी याद किया।
0महादेव ऐप से सट्टा मामले में ईडी ने एक
एडीजी सहित कुछ आईजी, कुछ एसपी, दो एडीशनल एसपी सहित कुल 72 लोगों को नोटिस भेजा है?
0क्या कुछ जिलों में नये एसपी की पदस्थापना होगी?
0पूर्व डीजीपी अवस्थी के बाद डीजी जेल संजय पिल्ले को भी संविदा नियुक्ति दे दी है।


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