छत्तीसगढ़

आईएएस की नौकरी छोड़ने के 15 दिन के भीतर राज्यसभा सदस्य बने थे रेल मंत्री ….

वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे की कलम से... {किश्त 152}

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आईएएस की नौकरी छोड़ने के 15 दिन के भीतर राज्यसभा सदस्य बने थे रेल मंत्री ....

छग के पहले सीएम,पूर्व आईएएस अजीत जोगी को कलेक्टरी छोड़ने के बाद राज्यसभा, लोकसभा होकर छग का सीएम बनने में कई साल लग गये थे, कलेक्टरी से इस्तीफा देकर मंत्री बनने में आईए एस ओपी चौधरी को भी 6-7 साल का इंतजार करना पड़ा?पर लगभग 5 साल पहले 22 जून 2019 को भाजपा में प्रवेश करने वाले भारत के पूर्व तथा मौजूदा रेलमंत्री किस्मत के धनी हैं।1994 बैच के आईएएस चयन में भी टॉप करने वाले अश्विनी वैष्णव क़ी पढ़ाई का तो सबको पता है कि वो आईआईटी कानपुर से ऍम टेक कर चुके हैं और अमेरिका के ही एक टॉप इन्स्टिटूट्स में से वॉर्टन से ऍमबीए भी किया है, ये भी पता ही है कि वो अटलजी के निजी सचिव की हैसियत से काम कर चुके हैं।लेकिन जो बात शायद कम लोगों को पता होगी कि 22 जून 2019 को उन्हें भाजपा प्रवेश करवाने के15 दिनों के भीतर यानि 5 जुलाई 2019 को उड़ीसा से राज्य सभा का चुनाव जिताने की स्थिति में भाजपा थी नहीं, क्यूँकि ओड़ीसा विस की 147 सदस्यों की विधान सभा में 111 सदस्य तो बीजू जनतादल के थे और बीजू जनतादल राज्यसभा प्रत्याशियों के नाम भी घोषित कर चुका था।उसके बाद ख़ुद तब के सीएम नवीन पटनायक ने बताया था कि उन के पास पीएम नरेंद्र मोदी,गृहमंत्री अमित शाह का फ़ोन आया और नवीन पटनायक से अश्विनी वैष्णव को राज्यसभा भेजने में मदद करने की गुज़ारिश की। इसीलिए बीजू जनतादल अश्विनी वैष्णव को समर्थन किया और अश्विनी वैष्णव को मोदी,ओड़िशा से चुनाव जितवाकर ले आए जहाँ से भाजपा के पास ख़ुद का प्रत्याशी जिताने लायक़ वोट ही नहीं थे।अब आप ख़ुद सोचिए,एक व्यक्ति सिर्फ़15 दिन पहले पार्टी में प्रवेश लेता है,राज्यसभा में लाने के लिए सरकार और पार्टी के दोनों सबसे बड़े लोग दूसरी पार्टी के नेता से अनुरोध कर रहे थे….। इसका मतलब साफ़ है, अश्विनी वैष्णव को बड़ी ज़िम्मेदारी दिया जाना तय था, दो साल का इंतज़ार इसीलिए कराया गया ताकि वो अपने आप को इस बड़ी ज़िम्मेदारी के लिए तैयार कर लें।अश्विनी वैष्णव का जन्म 18 जुलाई 1970 को जोधपुर,राजस्थान में हुआ। उनका मूल निवास पाली जिले का जीवणद कल्लान गाँव है,बाद में परिवार जोध पुर में बस गया। अश्विनी ने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट एंथनी कॉन्वेंट स्कूल और महेश स्कूल, जोधपुर से पूरी की। उन्होंने 1991 में जेएनवीयू जोधपुर के एम बीएम इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक और संचार इंजीनियरिंग में स्वर्ण पदक के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद, आई आई टी कानपुर से एम.टेक. किया, 1994 में आईएएस में ऑल इंडिया रैंक 27 वां प्राप्त करके शामिल हो गए। 2008 में, पेंसिल्वेनिया विश्व विद्यालय के व्हार्टन स्कूल से एमबीए की डिग्री हासिल की।अश्विनी वैष्णव ने 1994 में ओडिशा कैडर में आईएएस में शामिल होकर अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत की। उन्होंने बालासोर,कटक जिलों के कलेक्टर के रूप में सेवा दी, 2003 में, उन्हें पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यालय में उप सचिव के रूप में नियुक्त किया गया। उनके कार्य काल के दौरान, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सार्वजनिक-निजी भागी दारी ढांचे को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2004 में चुनाव हारने के बाद, वाजपेयी के निजी सचिव के रूप में भी उन्होंने कार्य किया।


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