छत्तीसगढ़

आँखों को मूंद लेने से खतरा न जाएगा….. वो देखना पड़ेगा जो देखा न जाएगा…..

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आँखों को मूंद लेने से खतरा न जाएगा..... वो देखना पड़ेगा जो देखा न जाएगा.....

एक तरफ भाजपा के नेता विपक्षी नेताओं नेहरू- गाँधी, मुलायम और लालू यादव आदि परिवार पर राजनीतिक परिवारवाद का आरोप चुनाव के पहले लगाते रहे हैँ पर हाल ही तीसरी बार एनडीए की सरकार बनाने वाले नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में तो भाई भतीजावाद को ही प्राथमिकता दी गई है।मंत्री जे पी नड्डा (जबलपुर की पूर्व सांसद जयश्री बैनर्जी के दामाद)एचडी कुमार स्वामी(पूर्व पीएम देवेगोड़ा के बेटे)जयंत चौधरी (पूर्व पीएम चरणसिंह के पोते) रामनाथ ठाकुर (पूर्व सीएम कर्पूरी ठाकुर के बेटे) राव इंद्रजीतसिंह(हरियाणा के पूर्व सीएम राव वीरेंद्र सिंह के बेटे) रवनीतसिंह बिट्टू (पंजाब,पूर्व सीएम बेअंत सिंह के पोते) राजनाथ सिंह (बेटा पंकज सिंह एमएल ए ) ज्योतिरादित्य सिंधिया (पूर्व केंद्रीय मंत्री माधवराव के बेटे ) चिराग पासवान (पूर्व केंद्रीय मंत्री राम विलास के बेटे) राममोहन नायडू (पूर्व केंद्रीय मंत्रीयेरन नायडू के पुत्र) पीयूष गोयल (पूर्व केंद्रीय मंत्री वेदप्रकाश गोयल के बेटे) धर्मेंद्र प्रधान (पूर्व केंद्रीयमंत्री देवेंद्रप्रधान के बेटे) किरण रिजीजू (अरुणा चल के प्रोटम स्पीकर रिनचिन खारू के बेटे) जितिन प्रसाद (पूर्व सांसद जीतेन्द्र प्रसाद के बेटे) कीर्तिवर्धन सिँह (पूर्व मंत्री,आंनद सिंह के बेटे) रक्षा खड़से  ( पूर्व मंत्री एकनाथ खड़से की बहु) शांतनु ठाकुर ( पूर्व मंत्री मंजुल कृष्णा ठाकुर के बेटे )वीरेंद्र कुमार खटीक (पूर्व मंत्री गौरीशंकर शेज वार के जीजा)अन्नपूर्णा देवी (पूर्व विधायक रमेश प्रसाद यादव की पत्नी) आदि प्रमुख हैं।

थल सेनाध्यक्ष का छ्ग
से भी रहा है नाता…..

आँखों को मूंद लेने से खतरा न जाएगा..... वो देखना पड़ेगा जो देखा न जाएगा.....

भारत के नए सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल उपेन्द्र द्विवेदी का छत्तीसगढ़ से पुराना नाता रहा है।30 जून से नये थल सेनाध्यक्ष के तौर पर कार्यभार संभालने वाले ले.जनरल उपेंद्रद्विवेदी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई अंबिकापुर से की है।जान कारी के अनुसार1जुलाई 1964 को जन्मे भारत के नये सेना प्रमुख उपेन्द्र द्विवेदी के पिता श्रीकृष्ण द्विवेदी का ट्रांसफ़र 1971 में तब के मप्र के अंबिकापुर में हुआ था।वे खनिज अधि कारी थे। अंबिकापुर तबादला होने के बाद पाँचवीं की पढ़ाई जनरल द्विवेदी ने सरस्वती शिशु मंदिर से की । लगभग एक वर्ष छग में रहने के बाद उनके पिता का तबादला हुआ,जिसके बाद उन्होंने रीवा के सैनिक स्कूल में छठवीं कक्षा में प्रवेश लिया और वहीं से हायर सेकेंडरी तक की पढ़ाई पूरी की। उपेंद्र द्विवेदी ने दिसंबर 1984 में सेना की इन्फैंट्री (जम्मू-कश्मीर राइफल्स) में कमीशन मिला था।भारतीय थलसेना के नए अध्यक्ष बनने वाले उपेन्द्र द्विवेदी वर्तमान में वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के तौर पर कार्यरत हैं।

मोहन भैया की छ्ग
विधानसभा से बिदाई….

आँखों को मूंद लेने से खतरा न जाएगा..... वो देखना पड़ेगा जो देखा न जाएगा.....

छत्तीसगढ़ में श्यामा भैया, विधा भैया के बाद यदि कोई भैया कहलाया तो वह हैं ‘मोहन भैया’..!हालांकि छ्ग में अजीत जोगी’साहब’ कहलाते थे तो डॉ रमनसिंह ‘डॉक्टर साहब’ के नाम से चर्चित थे,भूपेश बघेल ‘छोटे दाऊ या कका’ कहे जाते थे तो डॉ चरणदास महंत ‘बड़े दाऊ’ के नाम से चर्चा मेंरहे।8 बार के अपराजेय विधायक,रायपुर सांसद बनने के बाद बृजमोहन अग्रवाल ने विधायक और मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, 35 साल तक विधायक बनने का भी उनका रिकार्ड है। बकरीद यानि ‘कुर्बानी’ का दिन ही उन्होंने इस्तीफा के लिये क्यों चुना इसको भी लेकर चर्चा है..? हालांकि उनके इस्तीफे के दिन कुर्बानी शब्द का उल्लेख उनकेमित्र पूर्व विस अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पांडे ने किया, लोकसभा चुनाव में सबसे अधिक मतों से जीतने वालों में देश के टॉप टेन में जगह बनाने वाले भाई मोहन को मोदी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली? मप्र तथा छ्ग में लगातार राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य रहने वाले मोहन की असल में भाजपा के एक-दो बड़े नेताओं ने छ्ग की राजनीति से हटाकर कुर्बानी ही ली है…? छ्ग राज्य के पहले नेता प्रति पक्ष के चुनाव के घटना क्रम को लेकर उपजी नाराजगी लगता है अभी भी बनी हुई है…!जबकि वह 24 साल पुरानी बात है। विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा चुनाव24 में भी बृजमोहन अग्रवाल ने रिकॉर्ड जीत का परचम लहराया है। रायपुर लोकसभा से कांग्रेस प्रत्याशी विकास उपाध्याय को 5 लाख 75 हजार 285 वोटों से हराया है। मोहन को छग भाजपा की राजनीति में संकट मोचन भी कहा जाता है। बृजमोहन अविभाजित मप्र में पटवा सरकार में मंत्री रह चुके हैं। इसके बाद वो रमन सरकार के तीनों कार्यकाल में मंत्री रहे।सन 1984 में भाजपा की सदस्यता ली।1988 से 1990 तक वे भाजयुमो के युवा मंत्री रहे। साल 1990 मेंपहली बार मप्र विधानसभा में विधायक निर्वाचित हुए। उस दौरान वो राज्य के सबसे युवा विधायक थे। इसके बाद तो लगातार साल 1993,19 98, 2003, 2008, 2013 2018 और 2023 में विधायक बने।ज़ब नेता प्रतिपक्ष के चुनाव के बाद वे निलंबित हुए तो तब मप्र के सीएम दिग्विजय सिँह ने कहा था कि बिना बृजमोहन के छ्ग विधानसभा की तो कल्पना ही नहीं की जा सकती है,उस समय उनसे मिलने उनके घर विद्याचरण शुक्ल, तब के सीएम अजीत जोगी भी गये थे।पूर्व सीएम श्यामा चरण शुक्ल ने भी एक बार कहा था कि राजनीति करना तो बृजमोहन से सीखना चाहिये… उनके इस्तीफा के बाद विस अध्यक्ष डॉ रमनसिँह ने भी कहा कि बृजमोहन की याद जरूर आयेगी, कमी भी खलेगी ।खैर आम-खास लोगों का मोहन अब राष्ट्रीय राजनीति में अपनी सक्रि यता दिखायेगा।

नेता तो बस डॉ चरण
दास महंत ही हैँ …..!

आँखों को मूंद लेने से खतरा न जाएगा..... वो देखना पड़ेगा जो देखा न जाएगा.....

मप्र और छत्तीसगढ़ से लोकसभा चुनाव में पूर्व सीएम दिग्विजयसिंह हार गये, पूर्व सीएम कमलनाथ के पुत्र नकुल नाथ भी चुनाव हार गये, छ्ग के पूर्व सीएम भूपेश बघेल भी चुनाव हार गये पर डॉ चरणदास महंत अपनी पत्नी ज्योत्सना को दूसरी बार लोकसभा में भेजने में भी सफल रहे, ज्योत्सना ने भाजपा की राष्ट्रीय स्तर की नेत्री सरोज पांडे को हारा दिया है। मप्र और छ्ग की कुल 40 लोक सभा क्षेत्रों में केवल एक मात्र ज्योत्सना महंत ही विजयी रही है। वैसे डॉ महंत के खाते में केंद्र में मंत्री,मप्र में मंत्री,छ्ग में विधानसभा अध्यक्ष,नेता प्रतिपक्ष, छ्ग कांग्रेस के अध्यक्ष का पद दर्ज है,वे पिछली बार सीएम बनते- बनते रह गये ? अभी तक राज्यसभा सदस्य नहीं बन सके हैं।जाहिर है कि पत्नी को लोस चुनाव में जीत दिलाकर अपना कद तो बढ़ा ही लिया है।

और अब बस

  • गृहमंत्री विजय शर्मा ने छत्तीसगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली में उर्दू,फारसी के शब्दों को हटाकर सरल हिंदी शब्द जोड़ने के लिए राज्य के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखा है।
  • छग सरकार द्वारा निकाय चुनाव में इस बार महापौर और अध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने पर विचार किया जा रहा है।

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