छत्तीसगढ़

जुगनुओं ने फिर अँधेरों से लड़ाई जीत ली…. चाँद सूरज घर के रौशन-दान में रक्खे रहे..

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जुगनुओं ने फिर अँधेरों से लड़ाई जीत ली.... चाँद सूरज घर के रौशन-दान में रक्खे रहे..

कांग्रेस,भाजपा ने इस साल 3-3 राज्यों में अपनी अपनी सरकारें बनाने,छीनने में सफल रहीं फिर इतनी हायतौबा क्यों….!केवल राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार नहीं बनीं,वहाँ भाजपा की सरकार बन गई है और मोदी मैजिक की चर्चा तेज है…..? चलो पीछे चलें…इसी साल ही हिमाचल,कर्नाटक में चुनाव हुए और भाजपा शासित राज्यों में कांग्रेस की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनीं पर किसी मैजिक की बात ही नहीं उठी….?दिसम्बर 22 से 2023 तक सात राज्यों में विधान सभाओं के चुनाव हुए। दिसम्बर 22से जनवरी23 की शुरूवात में हिमाचल प्रदेश के चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनी।मई 23 में कर्नाटक में चुनाव हुए तो कांग्रेस ने बड़ी जीत हासिल की।इन दोनों राज्यों में तो भाजपा की सरकार थी और कांग्रेस ने सरकार छीन ही ली। हाल ही में तेलंगाना में कांग्रेस ने क्षेत्रीय दल बीआरएस को हराया पर ठीक ठाक चर्चा भी नहीं….?भाजपा ने हाल ही के चुनाव में मध्यप्रदेश सरकार को बरकरार रखा तो राजस्थान,छत्तीसगढ़ में कांग्रेस से सत्ता छीनने में सफलता पाई है।इसका मतलब ये है कि स्कोर बराबर है।यानी 3-3 राज्य।कांग्रेस ने दो राज्यों से भाजपा को बाहर किया (हिमाचल और कर्नाटक) तो भाजपा ने भी कांग्रेस को दो राज्यों में हराया (छत्तीसगढ़,राजस्थान) लेकिन हल्ला मोदी मैजिक का है।2023 मे पांच राज्यों मे कांग्रेस को 36.45 फीसदी और भाजपा को 31.09 फीसद वोट शेयर हासिल‌ हुआ है।यहां कांग्रेस भाजपा से कहीं आगे है । यहां चुनावी प्रबंधन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।कांग्रेस ने कुल 4,करोड़ 86लाख 94 हजार 561 मत प्राप्त किये है तो भाजपा 4,करोड़ 76,लाख 75 हजार 853 मत हासिल कर पाई और कांग्रेस को 10लाख 18हजार 708 मत अधिक मिले हैं।कांग्रेस ने सभी राज्यों में जनता के मुद्दों को उठाया,भाजपा ने हर राज्य में हिंदुत्व का मुद्दा प्रमुखता से उठाया,हिंदी पट्टी में हिंदुत्व का जादू चला.
दक्षिण ने नकार दिया….।भाजपा हिंदीपट्टी की नब्ज पहचान गई है।उसे धर्म की घुट्टी पिला कर उसका शोषण करते रहो,सत्ता तो मिलती ही रहेगी…. !वैसे छ्ग,मप्र तथा राजस्थान में कौन बनेगा सीएम…इसको लेकर अभी तक सस्पेंस बना हुआ है?

भूपेश सरकार की पराजय, भाजपा की जीत के पीछे…

जुगनुओं ने फिर अँधेरों से लड़ाई जीत ली.... चाँद सूरज घर के रौशन-दान में रक्खे रहे..

छत्तीसगढ़ में भूपेश की सरकार की पराजय के पीछे कई कारण हैं,एक बड़ा कारण तो पीएम नरेंद्र मोदी की लहर थी…!इस चुनाव में भाजपा को 54 सीटें कांग्रेस को 35 सीटें मिली हैं वहीं एक सीट गगोपा के खाते में गई, बसपा,जोगी कॉंग्रेस का तो खाता ही नहीं खुला?वैसे इसी चुनाव में भाजपा को 46.37% मत मिले,कांग्रेस को 42.11%बसपा 2.5% लेकर तीसरे स्थान पर रही तो जनता जोगी कॉंग्रेस ने1.23%मत हासिल कर चौथे स्थान पर रहीं तो आम आदमी पार्टी को 0.93% और सीपीआई को 0.39% मत हासिल हुए। इस बार सरकार के खिलाफ नहीं कुछ बड़े नेताओं (दोनों पार्टी)के खिलाफ नाराजगी थीं तभी तो कॉंग्रेस के बड़े नेता टी एस सिंहदेव ताम्र ध्वज साहू,रविंद्र चौबे,मो अकबर,शिव डहरिया अमरजीत भगत आदि सहित भाजपा के विजय बघेल,प्रेमप्रकाश पांडे,नारायण चंदेल,शिव रतन शर्मा आदि को हार का सामना करना पड़ा बाकी रमन सिंह,भूपेश बघेल,बृजमोहन अग्रवाल जैसे सभी बड़े नेता अपनी सीट बचाने में सफल रहे।तो पूर्व आईएएसओपी चौधरी भी पहली बार विधायक बनने में सफल रहे।भाजपा की सफलता प्रमुख रूप से इस राज्य में भी महिलाओं पर टिकी रही…महतारी वंदन योजना के तहत भाजपा ने सभी विवाहित महिलाओं को हर महीने 1000रुपये बांटने का वादा किया,कहा कि वो चुनाव जीत गए तो स्कीम लागू करेंगे,महिलाओं का भरोसा जीतने के लिए भाजपा ने एक और कदम आगे बढ़ाकर इस योजना में शामिल होने के लिए फॉर्म भी भरवाए और ये फॉर्म भरने सौ सवा सौ नहीं, औसतन हर विधान सभा में 50 हजार से अधिक फॉर्म भरवाए गए।बताया जाता हैं कि महिलाओं ने वोट से इसका जवाब दिया। इसके अलावा भाजपा ने एक और वादा किया।भूमिहीन किसानों को 10 हजार रुपये का बोनस देने का, भाजपा नेतृत्व ने प्रदेश पुराने नेताओं के सामने युवा नेताओं की नई खेप खड़ी की।ओपी चौधरी जो आईएएस की सेवा छोड़कर पार्टी में आए थे,महासचिव बनाया गया ।पवन साय ओम माथुर और मनसुख मंडाविया को दिल्ली से रायपुर भेजा जिससे स्थितियां दुरुस्त रह सकें।इसके अलावा कांग्रेस के पास भी अपनी दिक्कतें थीं।वो बस्तर संभाग में धर्म परिवर्तन जैस बड़े मुद्दे को काउंटर नहीं कर सकी जिसका लाभ केदार कश्यप जैसे भाजपा नेताओं को हुआ,जिन्होंने नारायणपुर जैसीआदिवासी बहुल्य सीट बस ये नैरेटिव बनाकर निकाल ली कि कांग्रेस आदिवासियों को ईसाई बना रही है। कवर्धा, बेमेतरा आदि में हुई घटनाओं को भी गंभीरता से नहीं लिया…? इसके अलावा कांग्रेस धान को लेकर अपनी स्थिति का भरपूर प्रचार भी नहीं कर सकी।डॉ रमन की 2013 से 18 वाली सरकार इसलिये अपदस्थ हो गई थी क्योंकि सरकार धान खरीद का दाम बढ़ाने में असफल रही। 2018 में भूपेश बघेल ने धान का दाम बढ़ाने का वादा किया और वो सरकार में आ गए। पांच सालों तक उन्होंने लगातार धान खरीद का दाम बढ़ाया,किसानों को अपनी फसल का अच्छा पैसा मिला। इधर कुछ मंत्रियों के व्यवहार को लेकर शिकायत थीं पर उनकी टिकट नहीं काटी गई….?2018में सभी बड़े नेता साथ-साथ थे पर 2023 में ऐसा लगा भी नहीं…..फिर शराब बंदी नहीं करना,महादेव ऐप मामला,कोयला परिवहन वसूली,भ्रष्टाचार,पद स्थापना में लेनदेन आदि को लेकर ईडी कार्यवाही और भाजपा के आरोप का भी जवाब सरकार की तरफ से ढंग से नहीं आया..क़ानून व्यवस्था की हालत पर भी नियंत्रण का समुचित प्रयास नहीं किया गया?वहीं रायपुर और आसपास की 7 विधान सभाओं पर कांग्रेस की पराजय को महापौर एजाज ढेबर एंड पार्टी की गति विधियों से कुछ कॉंग्रेसी भी जोड़ रहे हैं।कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि भाजपा की जीत और कांग्रेस की हार के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं?

बृजमोहन प्रोटेम स्पीकर
तो क्या मंत्री नहीं बनेंगे …?

जुगनुओं ने फिर अँधेरों से लड़ाई जीत ली.... चाँद सूरज घर के रौशन-दान में रक्खे रहे..

बृजमोहन अग्रवाल 8वीं बार लगातार विधायक बनकर सर्वाधिक 68 हजार मतों से जीतने का रिकार्ड बना लिया है।छठवीं विधानसभा में सबसे कम उम्र के प्रोटेम स्पीकर बनेंगे। वैसे यह होता आया है कि सीएम,मंत्रिमंडल पहले ही शपथ ले लेता है और बाद ही विधायक शपथ लेते हैं?यदि बृज मोहन अग्रवाल मंत्री बनते हैं तो फिर वे प्रोटेम स्पीकर नहीं बन सकेंगे!और प्रोटेम स्पीकर बनाना यदि तय है तो मंत्री बनने में संदेह है?

और अब बस….

0डॉ चरणदास महंत के नेता प्रतिपक्ष बनने की पूरी संभावना है।
0आईएएस अजीत जोगी के बाद अब ओपी चौधरी की राजनैतिक भूमिका की प्रतीक्षा हो रही है।
0नौकरशाही में नई सरकार बनने से सनसनी है,कुछ अपने हटने की प्रतिक्षा कर रहे हैं तो कुछ को अपनी नई पारी का इंतजार है?


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