छत्तीसगढ़

ये समन्दर है,भला इसको क्या कमी होगी…. क्यों ये दिन-रात किनारों पे सर पटकता है….!

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ये समन्दर है,भला इसको क्या कमी होगी.... क्यों ये दिन-रात किनारों पे सर पटकता है....!

ये समन्दर है,भला इसको क्या कमी होगी.... क्यों ये दिन-रात किनारों पे सर पटकता है....!

चंद्रमा की सतह पर छोटे से रोबोट गाड़ी के पहिये पर इसरोऔर अशोक स्तंभ का स्टाम्प छपा है। लैंडर के चलने पर टायर के निशान की तरह ये दोनों लोगो छपते रहेंगे।चंद्रमा का अपना वायुमंडल नहीं,वहाँ हवा का कोई कॉनसेप्ट नहीं इसलिए ये निशान हज़ारों सालों तक रहेंगे।पृथ्वी से चंद्रमा का सिर्फ़ एक ही हिस्सा दिखाई देता है। पिछले हिस्से पर पहुँचना बेहद जटिल था। भारत इस उपलब्धि में पहला स्थान रखेगा। चंद्रमा के दोनों हिस्से बहुत अलग हैं उनमें रासायनिक और भौतिक अंतर है जिस से चंद्रमा और भी अधिक रहस्यमयी हो जाता है। दूसरे हिस्से के अध्ययन से ग्रहों पृथ्वी के बनने और अंतरिक्ष के अध्ययन में महत्वपूर्ण सूचनाएँ मिलेंगी।इसके साथ ही अंतरिक्ष में क़ब्ज़े की होड़ और दबदबे को भी टक्कर मिलेगी। चंद्रमा तो चंद्रमा धरती पर अंटार्कटिका महाद्वीप पर भी जो पहले पहुँच रहा है उसने उतने हिस्से पर अपना दावा किया है। यही होड़ चंद्रमा पर भी लगी है। अशोक स्तंभ और इसरो के लोगो शायद हमारा कब्जा सत्यापित करता रहेगा।यह चंद्रमा पर भारत के पहुँचने का ऐतिहासिक कारण है। इस रेस में चीन और रुस दोनों के मिशन हाल ही में फेल हुए हैं। चन्द्रयान 1 चंद्रमा पर 2008 में पहुँचा था। लैण्डिंग के स्थान को “जवाहर पॉइंट” कहते हैं।

शरद-अजीत के बाद अब
भूपेश-विजय की तकरार..

भारतीय जनता पार्टी राजनीति में परिवारवाद का जमकर विरोध करती है, पर परिवार में अलगाववाद की उनकी नीति क्या है…. आजकल भाजपा चाचा-भतीजे के रिश्तों को खत्म करने में लगी है…? महाराष्ट्र में तो एनसीपी के संस्थापक शरद पवार और उनके भतीजे अजीत पवार पवार के बीच मनभेद और मतभेद पैदा करने में सफल रही… भतीजे को महाराष्ट्र का डिप्टी सीएम भी बना दिया वहीं अब छ्ग में चाचा भतीजे को फिर लड़ाने की तैयारी कर चुकी है। छ्ग के सीएम भूपेश बघेल के खिलाफ उनके भतीजे लोकसभा सदस्य विजय बघेल को विधानसभा प्रत्याशी घोषित कर चुकी है…?एक तीर से दो शिकार… भतीजा विजय हारा तो लोकसभा की दावेदारी खत्म…यदि भतीजा जीतता है तो भूपेश की सीएम की दावेदारी खत्म….?वैसे भाजपा विपक्षी पार्टियों पर परिवारवाद का आरोप लगाती हैं,वे परिवारवाद की बात करते हैं,पीएम मोदी अथवा भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेता ‘वंशवाद’ और ‘परिवारवाद’ की अलग-अलग परिभाषाएं देकर अपने ‘परिवारवाद’ को पेशेवर करार देते रहे हैं, लेकिन विजयराजे सिंधिया, राजनाथ सिंह,कल्याण सिंह,वेदप्रकाश गोयल, सीपीएन सिंह,जितेन्द्र प्रसाद,यशवंत सिन्हा,प्रेम कुमार धूमल,अमित शाह, मदनलाल खुराना, अखिलेश कुमार सिंह, साहिब सिंह वर्मा,डॉ रमन सिंह,लखीराम अग्रवाल आदि भाजपा और अन्य नेताओं की लंबी सूची है, जिनके पुत्र-पुत्री आज भाजपा के सांसद-विधायक हैं या ऱह चुके हैं। यह परिवारवाद नहीं है, तो क्या है?बेशक कांग्रेस और गांधी परिवार वाली स्थिति नहीं है। इन नेताओं का एकाधिकार या वर्चस्व नहीं है,लेकिन हकीकत यह है कि बच्चों को राजनीति में पांव जमाने का मौका पिता के जरिये ही मिला। यदि यह परिवारवाद नहीं होता, तो आम आदमी की तरह इन चेहरों को भी धक्के खाने पड़ते।यह ठीक है कि मुलायम सिंह यादव की पार्टी,लालू प्रसाद यादव की पार्टी,नवीन पटनायक की पार्टी,उद्धव ठाकरे की शिवसेना,शरद पवार की एनसीपी,ये सभी पार्टियाँ इसी परिवारवाद का उदाहरण हैं,हालांकि भाजपा की कई ऐसी सहयोगी पार्टियां है जो किसी एक परिवार या नेता पर ही केंद्रित हैं..चिराग पासवान,ओम प्रकाश राजभर, अनुप्रिया पटेल जैसे कई नेता इसके उदाहरण हैँ ।

महादेव एप गेमिंग और
अमेरिकी साफ्टवेयर ….

ये समन्दर है,भला इसको क्या कमी होगी.... क्यों ये दिन-रात किनारों पे सर पटकता है....!

ऑन लाइन बैटिंग गेमिंग एप महादेव को लेकर अब ईडी भी सक्रिय हो गई है, हालांकि दुर्ग और रायपुर पुलिस पहले ही कुछ लोगों को पकड़ चुकी है…. एक जूस की दुकान संचालक से अंतराष्ट्रीय बुकी बनने की दास्तां के पीछे स्थानीय पुलिस तथा राजनीतिक संरक्षण से इंकार नहीं किया जा सकता है?वैसे महादेव बुक का पूरा खाका अमरीका में तैयार हुआ। महादेव बुक एप की पूरी डिजाइन सौरभ के साथ ही भिलाई में रहने वाले रवि उप्पल के अमेरिका में बैठे रिश्तेदार ने तैयार की थी। जो कि साफ्टवेयर इंजीनियर बताया जाता है। वहीं से इस पूरे एप के सभी गेमों को एक तरह से कंट्रोल किया जाता है। सौरभ को जूस की दुकान करने के दौरान ऑन लाइन बैटिंग की लत लगी और बड़ी रकम हार गया लेकिन इसके बाद वह बड़े बुकी के सम्पर्क में आया और दुबई चला गया। वहां उसने ऑन लाइन गैमिंग के सट्टे कारोबार को समझा और दोस्त रवि उप्पल को भी दुबई बुलाया। जो कुछ आईटी एक्सपर्ट को लेकर वहां गया लेकिन पुलिस से बचने और नए नए फीचर ऑन लाइन गैमिंग में डालने के लिए रवि ने अमरीका में रहने वाले अपने रिश्तेदार का सहारा लिया और इस तरह महादेव बुक एप नाम से एक साफ्टवेयर तैयार कर मार्केट में ला दिया। शुरूआती दौर में भारत में कई बड़े गुर्गे उसके पकडे गए तो उसने पैसों के लेनदेन का आप्शन क्यूआर कोड और ई वैलेट में करना शुरू किया। जिसे ट्रैक करने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। वहीं सौरभ चंद्राकर ने भी अपना नाम बदल कर दुबई में कारोबारी का चोला ओढ़ रखा है। इसमें उसके कई पार्टनर भी शामिल है। जहां एक तरफ सट्टा का कारोबार कर कई करोड़ रुपये का वारा न्यारा किया हुआ है। महादेव एप के तीन साल पूरा होने पर उसकी सक्सेस पार्टी भी दुबई के एक बड़े आलीशान होटल में लांच की थी। जिसमें दुबई के बड़े बड़े कारोबारी व महादेव बुक एप से जुड़े संचालक व पैनेलिस्ट शामिल हुए थे। वहीं बॉलीबुड के कई कलाकार, टीवी कलाकार व पंजाबी सिंगर भी अपनी अपनी प्रस्तुति देखे दिखाई दिए थे।वहीं सूत्रों के मुताबिक छत्तीसगढ़ पुलिस की लगातार महादेव बुक एप के नेटवर्क पर छापेमारी के चलते महादेव बुक एप के संचालक सौरभ चंद्राकर के अलावा रवि उप्पल, कमल चिलानी, कपिल चिलानी, रोहित तिर्की, राज गुप्ता, नितिश दीवान अपनी काली कमाई को दुबई से लेकर अमरीका तक में अन्य फील्ड में लगाकर सफेदपोश चेहरा बननेे की कवायद में जुटे हैं…?

पहाड़ी मैना की मौत:वंश
वृद्धि का प्रयासअसफल….

ये समन्दर है,भला इसको क्या कमी होगी.... क्यों ये दिन-रात किनारों पे सर पटकता है....!

छत्तीसगढ़ के राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना के वंश वृद्धि के लिये करीब 20 सालों से प्रयास के बाद भी सफलता शून्य ही रही है। बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर में स्थित वन विद्यालय ब्रीडिंग सेंटर में प्रजनन और संवर्धन के लिए लाई गई पहाड़ी मैना ने दम तोड़ दिया है ।यहां यह बताना जरुरी है कि इस केंद्र में अब तक 8 पक्षियों की मौत हो चुकी है।दरअसल वन विद्यालय ब्रीडिंग सेंटर में राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना को संवर्धन के लिए रखा गया था। इसमें कुल 8 पक्षियां थीं। लेकिन पिछले दो दशक से एक-एक कर सभी पक्षियों ने दम तोड़ दिया। इससे पहले रितू नाम की मैना फिर हाल ही में सोनू नाम की मैना की मौत हो गई। मोनू (मैना) को एक छोटे पिंजरे में रखा गया था और उसका इलाज किया जा रहा था।गौरतलब है कि इसी साल यहां पल रहे सभी पक्षियों को आजाद करने का फैसला लिया गया था। इंतजार था तो बस मुख्यालय की अनुमति का। लेकिन उससे पहले ही इस सेंटर में पल रही आखरी मैना ने भी दम तोड़ दिया। इसके बाद से यह सेंटर सूना पड़ गया है।

और अब बस….

0कांग्रेस में विधानसभा सीट बदलने की छूट नहीं मिलने पर कुछ विधायक दुखी हैं…?
0क्या भाजपा के कुछ सांसद,विधानसभा चुनाव जीतने में सफल हो सकेंगे….?
0किस अफसर का वजन करीब एक क्विंटल होने की जमकर चर्चा है?


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घूमता दर्पण, कोयलांचल में 1993 से विश्वसनीयता के लिए प्रसिद्ध अखबार है, सोशल मीडिया के जमाने मे आपको तेज, सटीक व निष्पक्ष न्यूज पहुचाने के लिए इस वेबसाईट का प्रारंभ किया गया है । संस्थापक संपादक प्रवीण निशी का पत्रकारिता मे तीन दशक का अनुभव है। छत्तीसगढ़ की ग्राउन्ड रिपोर्टिंग तथा देश-दुनिया की तमाम खबरों के विश्लेषण के लिए आज ही देखे घूमता दर्पण

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