छत्तीसगढ़

श्वेत किरणों में सभी हम सातों रंग ढूंढते हैं  हम कवि हैं इस जगत में संभावनाएं ढूंढते हैं 

नए वर्ष के रंग गीत गजलों के संग (संबोधन सांस्कृतिक मंच मनेन्द्रगढ़ की प्रस्तुति)

Ghoomata Darpan

 

 

वीरेंद्र श्रीवास्तव की कलम से

मनेन्द्रगढ़।एमसीबी। संबोधन सांस्कृतिक मंच की प्रस्तुति मनेन्द्रगढ़ द्वारा नए वर्ष 2024 के स्वागत मैं साहित्य एवं सांस्कृतिक विकास का एक पन्ना और जुड़ गया. जब “नए वर्ष के रंग गीत गजलों के संग” कार्यक्रम के आयोजन के साथ संबोधन साहित्य एवं कला विकास संस्थान मनेन्द्रगढ़ ने नए वर्ष का स्वागत किया. संस्था द्वारा बूम फायर अलाव संस्कृति कार्यक्रम आयोजन में शास्त्रीय एवं अर्धशास्त्रीय गायन द्वारा कलाकारों ने वर्ष 2024 का खुले मन से स्वागत किया. जलते अलाव के चारों ओर बैठे हुए कलाकार एवं श्रोताओं के समूह ने संबोधन के मुख्यालय निदान क्लिनिक प्रांगण में रात्रि 8:00 बजे से आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए संचालक गौरव अग्रवाल ने मंच पर वरिष्ठ रचनाकार वीरेंद्र श्रीवास्तव एवं एस एस निगम को आसन ग्रहण करने हेतु आमंत्रित किया. कलाकारों को नए वर्ष की बधाई देते हुए वर्ष 2024 के आगमन में अपनी प्रस्तुति के लिए कलाकार वेद प्रकाश पांडे को आमंत्रित किया.
रुक जाना नहीं तू कहीं हार के, गीत प्रस्तुति के साथ उन्होंने नए वर्ष का स्वागत किया वहीं श्रोताओं ने अच्छी प्रस्तुति के लिए तालियां बजाकर बधाई दी. अंचल के शास्त्रीय गायन के चर्चित कलाकार सरदार हरमहेंद्र सिंह, रमेश गुप्ता, सुभाष दादा ने अर्धशास्त्रीय प्रस्तुतियों के साथ कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया. गायक सरदार हर महेंद्र सिंह ने छत्तीसगढ़ के शीर्ष कवि एवं लेखक गिरीश पंकज के गीत * अंधकार है बेशक क़ायम मगर सवेरा भी आएगा गलत काम का हास्य यही है इंसान है तो पछतायेगा * की संगीतमय प्रस्तुति ने कार्यक्रम को ऊंचाइयां प्रदान की. वही इसकी फेसबुक लाइव प्रस्तुति को रायपुर तक पहुंचा कर उनकी शुभकामनाएं भी प्राप्त की. अपने उद्बोधन मे गिरीश पंकज नने मनेन्द्रगढ़ के समस्त कलाकारों एवं साहित्यकारो को नये वर्ष की बधाई याँ दी. संस्था की साहित्यिक प्रस्तुति के अंतर्गत कलम के जादूगर गौरव अग्रवाल ने अपनी रचना प्रस्तुत की
*तू ना घबरा कि तेरे हक में खड़ा है कोई
हम तो इंसान हैं हमसे भी बड़ा है कोई .*
वही वरिष्ठ कवि वीरेंद्र श्रीवास्तव ने
*नए वर्ष को की खुशियां तब तक जब हाथों में रोटी हो
खुश हो देश देशवासी भी खुश सब बेटा बेटी हों*
की पंक्तियों से नए वर्ष का स्वागत किया . वरिष्ठ कवि एस एस निगम ने नए वर्ष के आगमन को अपनी कविता में कुछ इस तरह बाँधा-
बीत रहा है वर्ष पुराना नया साल अब आएगा
नए क्षितिज पर नया सूर्य फिर नया सपेरा लेगा

कवियत्री वर्षा श्रीवास्तव ने अपने शब्दों की जादूगरी में जो कविता पढ़ी *श्वेत किरणों में सभी हम सातों रंग ढूंढते हैं,
हम कवि हैं इस जगत में संभावनाएं ढूंढते हैं.*
पंक्तियों ने साहित्य को एक नई उड़ान छूने का हौसला दिया. कलाकार नरोत्तम शर्मा एवं चिंटू शर्मा के द्वारा प्रस्तुत गीतों ने जहां मंच पर समां बांधा वहीं सतीश द्विवेदी एवं श्रीमती द्विवेदी के युगल गीत ने कार्यक्रम को ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया. नए वर्ष के स्वागत में कलाकार अनवर राही, नंदिनी शर्मा, शैलेश जैन, उपकार शर्मा, श्रीमती यशोदा वैश्य, वेद प्रकाश पांडे,एवं चर्चित कलाकार सुभाष दादा के गीतों की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया.

देर शाम तक चलते इस कार्यक्रम में राजू कक्कड़, अरविंद श्रीवास्तव, कल्याण केसरी, डॉक्टर निशांत श्रीवास्तव, नरेंद्र श्रीवास्तव , सहित संस्था सदस्यों एवं श्रोताओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की.और तालियों की गड.गड़ाहट के साथ नये वर्ष का स्वागत किया.

श्वेत किरणों में सभी हम सातों रंग ढूंढते हैं  हम कवि हैं इस जगत में संभावनाएं ढूंढते हैं 


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