छत्तीसगढ़

जहाँ सच हैं,वहाँ पर हम खड़े हैं….. इसी खातिर आँखों में गड़े हैं…..

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जहाँ सच हैं,वहाँ पर हम खड़े हैं..... इसी खातिर आँखों में गड़े हैं.....

भाजपा के कभी पितृ पुरुष कहलानेवाले भाजपा के पूर्वअध्यक्ष,पूर्व डिप्टीपीएम लालकृष्ण आडवाणी पीएम की कुर्सी तक नहीं पहुंच सके,राष्ट्रपति भी नहीं बन सके पर उम्र के अंतिम पड़ाव में ‘भारतरत्न’ से सम्मानित होने जा रहे हैं। उन्हे संतोष हो सकता है कि अभिन्न रहे अटलजी कोvयह सर्वोच्च सम्मान मिला और उन्हें भी….. लालकृष्ण आडवाणी नाम का एक ऐसा शख्स।जिसने अपने खून-पसीने कोतराजू पर रख,अपनी उम्र को नीलाम कर दिया,लेकिन पीएम की कुर्सी कीबेवफाई ने उन्हें उम्र भर तरसाया..!राजनेता आडवाणी ने सन 1951 से अपने सियासी जीवन की शुरुआत की। कभी पार्टी के सूत्रधार होने का गौरव मिला,तो कभी लौह पुरुष का सम्मान…।कभी देश की पहली गैर कांग्रेसी सत्ता में मंत्री भी रहे,तो वहीं भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक…कभी रथयात्रा के कर्णधार बने,तो कभी पार्टी केअध्यक्ष पद पर सुशोभित हुए,कभी कद इतना बड़ा हुआ कि गिरफ्तार भी हुए, तो वह भी सम्मान से।फिर बाहर भीआए,तो आन- बान और शान से। वह तो उस जमाने के थे,ज़ब लोग मोहब्बत का ककहरा पढ़ रहे थे।शायद किस्मत को ही,कुर्सी से मोहब्बत रास नहीं आ रही थी।कभी किस्मत ने भी,ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया कि उनके और प्रधानमंत्री की कुर्सी के बीच कुछ कदमों का ही फैसला रह गया।2004 में जब पार्टी अपने पूरे शबाब पर भी हार गई। उसके ऊपर अटलजी का राजनीति से सन्यास.. तब ऐसा लगा कि अब प्रधानमंत्री की कुर्सी उनसे बहुत दूर नहीं है? 2009 में गमों ने और 2014 में नमो (नरेंद्र मोदी)ने झटका दिया..।राजनेता आडवाणी को कुछ ऐसा तोड़ा कि फिर जुड़ पाना मुमकिन नहीं था। जो भी हो,मार्गदर्शक मंडल में जुड़ पाना उनका कद ही तो है,बेशक सबसे बड़ा। नाराजगी है,तो उस कुर्सी से। इनकी प्रारंभिक शिक्षा सेंट पैट्रिक स्कूल कराची में हुई, उनकी सामा जिक यात्रा 1947 से शुरू मानी जाती है।मात्र15 वर्ष की उम्र में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सदस्य के रूप में कार्य शुरू किया।डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने वर्ष 1951में,जब जनसंघ की स्थापना की,तब शुरुआत के 6 वर्षों तक सचिव रहे। फिर 1973 से 1977 तक जनसंघ के अध्यक्ष पद को सुशोभित किया।बाद में 1980 को भाजपा की स्थापना हुई, तब 1986 तक वे पार्टी के महासचिव रहे। इसके बाद अध्यक्ष पद का उत्तरदायित्वभी संभाला आडवाणी ने,1990 में सोमनाथ से अयोध्या तक राममंदिर आंदोलन के लिये एक रथ यात्रा भी निकाली, लेकिन उन्हें बीच में ही गिरफ्तार कर लिया गया। तब उनकी लोकप्रियता, कद और भी बड़ा हो गया,बाद में 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस में भी उनका नाम शामिल रहा।आडवाणी तीन बार अध्यक्ष पद पर भी शोभायमान रह चुके हैं।चार बार राज्य सभा,पाँच बार लोकसभा के भी सदस्य रहे।पहली बार पार्टी के सत्ता मेंआने पर,वह सूचना प्रसारण मंत्री भी रहे,अपने राजनीतिकजीवन में उप प्रधानमंत्री का पद भी संभाल चुके हैं।

पीएससी के पूर्व अध्यक्ष,
अन्य के खिलाफ जुर्म कायम

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में अनियमितता,भ्रष्टाचार की जांच सीबीआई से कराई जाएगी।इस प्रकरण की जांच केन्द्रीय जांच एजेंसी सीबीआई से कराये जाने के राज्य सरकार के निर्णय के परिपालन में ही आर्थिक अपराध अन्वेषण द्वारा लोकसेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामनसिंह सोनवानी सहित अन्य अधिकारियों के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध कर लिया गया है। राज्य शासन द्वारा केन्द्रीय जांच एजेंसी सीबीआई से जांच कराये जाने का निर्णय लिया गया था, छ्ग लोक सेवाआयोग द्वाराआयोजित प्रतियोगी परीक्षा वर्ष 2021 जो 170 पदों के लिए ली गई थी,जिसके परिणाम 11 मई 2021 को जारी किए जाने के पश्चात् लोकसेवा आयोग पर अनियमितता,भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए ननकीराम कंवर व अन्य के माध्यमों से शिकायतें प्राप्त हुई थी।शिकायती पत्र के आधार पर प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि तब के अध्यक्ष टामन सिंह,सचिव जीवनकिशोर ध्रुव,परीक्षा नियंत्रक एवं शासन तथा आयोग में तत्समय पदस्थ संलिप्त लोक सेवकगण, संबंधित राजनेतागण एवं अन्य द्वाराअपने-अपने पद का दुरुपयोग करते हुए, राजनैतिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए आयोग की चयन प्रक्रिया वर्ष 2020 एवं 2021 तथा असिस्टेंट प्रोफेसर चयन परीक्षा में नियम विरूद्ध तरीके से षड़यंत्र करते हुये अपने पुत्र,पुत्री व रिश्तेदारों को पात्र योग्य अभ्यार्थियों के बदले इनका चयन पदों पर करते हुए शासन एवं उन योग्य अभ्यार्थियों के साथ भ्रष्ट आचरण करते हुये छलकारित किया गया है,जो कि धारा 120 बी, 420, भादवि एवं धारा 7, 7 (क), एवं 12 भ्र.नि.अ. 1998 यथा संशो. 2018 के तहत अपराध कारित किया जाना पाया गया है,अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।

आईपीएस राहुल भगत
बने सीएम के सचिव….

जहाँ सच हैं,वहाँ पर हम खड़े हैं..... इसी खातिर आँखों में गड़े हैं.....

आईपीएस राहुल भगत छग सीएम के सचिव बनाए गए हैं।राहुल राजनांदगांव रेंज के आईजी पद पर पदस्थ थे,2005 बैच के आईपीएस हैं,वे पहले भी विष्णुदेव साय के साथ काम कर चुके हैं।केंद्रीय इस्पात एवं खान,श्रम रोजगार राज्यमंत्री ज़ब साय थे तब राहुल को प्रतिनियुक्ति में केंद्र में ले गये थे।बाद में उन्हें भारत सरकार ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में डायरेक्टरबनाया था, इस पद पर आईएएस की नियुक्ति होती थी।बेहद साफ सुथरी छवि के राहुल भगत नारायणपुर,कांकेर, रायगढ़,कवर्धा के एसपी रह चुके हैं।भगत स्पेशल टास्क फोर्स के एसपी भी रहे हैं।

अमित के बाद अमरेश
की भी छ्ग वापसी….

केंद्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई में संयुक्त सचिव रहे आईपीएस अमित कुमार की छ्ग वापसी, ख़ुफ़िया चीफ बनाने के बाद अब छग कैडर के आईपीएस अमरेश मिश्र छ्ग लौट कर आईजी रायपुर का पदभार सम्हाल चुके हैं।अमरेश 2005 के आईपीएस हैं।अमरेश एनआईए में डीआईजी के पद पर पदस्थ रहे।अमरेश दंतेवाड़ा,कोरबा,दुर्ग तथा रायपुर के एसपी रह चुके हैँ।

चर्चित आईपीएस
पुलिस मुख्यालय में…

जहाँ सच हैं,वहाँ पर हम खड़े हैं..... इसी खातिर आँखों में गड़े हैं.....

छ्ग की विष्णुदेव सरकार ने कई आइपीएस का नाम कोयला,महादेव सट्टेबाजी एप में आने,ईडी की रडार में आने पर उन्हें पुलिस मुख्यालय भेजा है।बिलासपुर आइजी रहे अजय यादव,रायपुर एसएसपी प्रशांत अग्रवाल, डा.आनंद छाबड़ा,बद्रीनारायण मीणा,आरिफ शेख,पारुल माथुर को पीएचक्यू भेजा गया है वहीं दीपांशु काबरा की सेवा परिवहन विभाग से वापस लेकर पुलिस मुख्यालय में पदस्थ किया गया है।सभी के नाम किसी न किसी मामले में चर्चा में रहे थे।आईपीएस की तबादला सूची में बिलासपुर के आईजी संजीव शुक्ला, संतोष सिंह को रायपुर का एसपी (अभी तक लगातार 9 जिले के एसपी)बनाया गया है,वहीं विजय अग्रवाल को सरगुजा,रजनीश सिंह को बिलासपुर का एसपी बनाया गया है।कई एसपी भी बदले गये हैं।

और अब बस…..

0 पामगढ़ से कॉंग्रेस की पहली बार ऍमएलए बनी श्रीमती शेषराज हरबंस का कोरबा में राखड़ समस्या पर ध्यानाकर्षण स्वीकृत हो गया था,यह बात और है कि बहिष्कार के चलते इस पर चर्चा नहीं हो सकी…
0 एक बुद्धिजीवी द्वारा भोजनालय खोलने की तैयारी की भी जमकर चर्चा है।


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