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17th October 2026

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: गुरु घासीदास,सतनाम और वंशवृक्ष...गुरु परम्परा .

Admin Tue, Dec 17, 2024

बाबा गुरु घासीदास का जन्म 18 दिसम्बर 1756 को गिरौदपुरी गाँव (वर्तमान में छग के बलौदा बाज़ार में गिरौदपुरी) में हुआ था।गुरु घासीदास महंगूदास, अमरुतिनी माता के पुत्र थे। गुरु घासीदास ने अपनी शिक्षा के बाद पुत्र गुरु बालकदास को आगे बढ़ाया। गुरु घासीदास छत्तीसगढ़ में अज्ञात समुदाय, समुदाय धर्म के संस्थापक हैं। दस्तावेज़ में भारत में राजनीतिक शोषण का मामला था। घासीदास ने कम उम्र में जाति व्यवस्था की बुराइयों का भी अनुभव किया,उन्हें जाति-आधारित समाज में सामाजिक अनुयायियों को समझने, सामाजिक शांति को ठीक करने में मदद मिली।तब समाधान खोजने पूरे छग में यात्रा की। गुरु घासीदास ने छग में 'सतनाम' अर्थात 'सत्य', अधर्म के आधारित समुदाय की स्थापना की। गुरु ने जैत खम्ब को सत्य का प्रतीक बनाया, सफेद रंग की लकड़ी का लट्ठा, जिसके शीर्ष पर सफेद झंडा था और संरचना श्वेत व्यक्ति को जो सत्य का पालन करता है 'सतनाम' पर सदैव कायम रहता है,सच का स्तंभ है, सफेद झंडा शांति का प्रतीक है। वंशवृक्ष... गुरू घासीदास,माता सफुरा से तीन पुत्र एवं एक पुत्री को जन्म दिया था।1.अमर दासजी बाल्यवस्था में ही जंगल से वापस नहीं लौटे। 2.बालकदास का एक पुत्र साहेबदास हुआ,बालक दास की हत्या कर दी गई।3.आगरदास को 1875 में एक पुत्र हुआ उनका नाम अग्रमनदास था। 4.सुभद्रा माता का विवाह हो गया। गरू आगरदास का विवाह कनुका माता से हुआ था। उसी समय अपने बड़े भाई बालकदास की (विधवा) पत्नि राधा माताजी को स्वीकार कर लिया। 1876 में एक पुत्र अजबदास हुआ। अजबदास का विवाह गायत्री माता से हुआ, इनसे गुरू अतिबलदास का जन्म 1894 में हुआ। राधा माता ने अपने विवाहित पति गुरू बालकदास के संयोग से उत्पन्न पुत्र गुरू साहेबदास की विवाहित पत्नी कर्रीमाता को गुरू अजबदास को स्वीकार कराई। जिनके संयोग से गुरू मुक्तावनदास का जन्म 1898,गुरूजगता रनदास का 1901 में जन्म हुआ। गुरू मुक्तावन दास, ललिता माता से प्रथम पुत्र अम्रदास,मीना के संयोग से गुरू धर्मदास, गुरू गोविंद दास। द्वितीय पुत्र बालदास, रूकमणी माता के संयोग से गुरू ढालदास (आगे और भी वंशज हैं। तृतीय पुत्र नवरत्नदास,संत माता के संयोग से भी वंश वृद्धि हुए।गुरू जगतारन दास एवं कृति माता के संयोग से 3 पुत्र हुये (1) गुरू जगमोहन दास, फिरतीन माता के संयोग से सेवनदास, उत्तम दास, नेमनदास,आगे वंशज और भी है (2) गुरू मन मोहनदास और माता संत कुमारी से देउमनदास, सत खोजन दास (3) गुरू दया वंतदास,माता के संयोग से पालकदास, द्वारिकादास, देवेन्द्रदास सुपुत्र हुए,गुरू अतिबलदास एवं भगवंतीन माता के संयोग से तीन पुत्र हुए (1) प्रकाशदास पत्नि पुराईन माता निर्वंशी रहे (2) अबारनदास पत्नी गुलाब माता से दो पुत्र संतनदास आसकरण दास (3) सुख नंदनदास पत्नी सुहागामाता की गोद से मकसूदन दास एवं अजयदास हुये । गुरू संतनदास के पुत्र गुरू मुक्ति दास,पुत्र शक्तिदास, गुरू आसकरण दास की तीन संतान हुई - गुरू आसम दास फलदास, मनहरण दास,गुरू अम्तमनदास एवं कनुका माता से गुरू अगम दास जी का जन्म हुआ।अगमदास का पूर्णिमा माता से विवाह 1915 में हुआ था।1927 में माता सुमरीत के साथ दूसरा विवाह हुआ। जिसमें मंतरा नामक एक पुत्री का जन्म हुआ था। तीसरा विवाह असम की मिनीमाता से 1932 में हुआ था,चौथा विवाह केवटा डबरी के माल गुजार रतिराम की सुपुत्री करूणामाता से हुआ था जिनसे विजय गुरू उर्फ अग्रनामदास बाबा का जन्म हुआ। विजय गुरू, कौशल माता से गुरू रूद्र कुमार का जन्म हुआ,उनका पुत्र रिपुदमन गुरु हुआ, आगे वंश जारी है....।

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