इंदौर में दूषित पानी के उपयोग से डेढ़ दर्जन लोगों की मौत, वहाँ पं.श्यामाचरण शुक्ल के नर्मदा का पानी पहुंचाने के भागीरथी प्रयास, छ्ग में छातिम के पेड़ों से पर्यावरण को नुकसान, रायपुर में पुलिस आयुक्त प्रणाली का सेटअप, छ्ग में राज्यसभा के चुनाव के गणित पऱ चर्चा जरुरी है।
इंदौर... नर्मदा का पानी,
दामाद सीएम और
जन-आंदोलन.....
इन्दौर शहर को नर्मदा का पानी पीते हुये अब 55 साल हो गये हैं, हाल ही में दूषित पानी के कारण कुछ लोगों की मौत हो गई है,तब 23 अगस्त 1970 को एक लम्बे सविनय संघर्ष के बाद योजना स्वीकार हुई थी और तब के सीएम छ्ग के निवासी,इंदौर के दामाद पं श्यामाचरण शुक्ल की याद आ रही है। 1970 के बाद जन्मे हैं या 1970 के बाद के लोग जान लें कि नर्मदा का पानी इन्दौर में एक लम्बे और पूर्ण अनुशासित,सविनय नागरिक संघर्ष के बाद आया है। एक पूरी पीढ़ी को इसके लिये ‘खपना’ पड़ा था।जन- आन्दोलनों का इतिहास जब कभी भी,जहां कहीँ भी जब लिखा जायेगा, इन्दौर का “नर्मदा आन्दोलन” अलग से दिखेगा। यह आन्दोलन था, जिसमें पहले दिन से आखिरी दिन तक पूरा शहर शामिल था, बच्चे-बच्चे की जबान पर सिर्फ पानी की मांग थी, कोई अभद्र नारा नहीँ, किसी का मुर्दाबाद नहीं, किसी का कांच नहीं फूटा, सिर फूटने का तो सवाल ही नहीं था। तब इन्दौर की जनसंख्या 06 लाख थी।उपलब्ध जलस्त्रोत 4 लाख लोगों की जरुरत ही बड़ी मुश्किल से पूरी कर सकते थे।इन्दौर से नर्मदा की दूरी 70 किलोमीटर के आसपास है।ऊपर से नर्मदा-इन्दौर के बीच विन्ध्याचल की पर्वतमाला भी है। इनके बीच एक घना वन क्षेत्र। जितनी बाधाएं गंगाजी को जमीन पर लाने में नहीं हुई होगी,उससे ज्यादा बाधाएं नर्मदाजी को इन्दौर लाने में देखी और दिखाई जा रही थी। लेकिन, शहर के कुछ युवाओं को यह “जुनून” की तरह छा गई तब के युवा बुद्धिजीवियों मुकुंद कुलकर्णी, महेन्द्र महा जन और चंद्रप्रभाष शेखर ने 14 लोगों की समिति बनाकर असंस्था “अभ्यास मंडल”, जो तब गैर-राजनीतिक थी, सभी सक्रिय युवा,छात्र नेताओं को अपने साथ लिया, इस विषय के जानकारों को अपने साथ जोड़ा। अकेले विशेषज्ञों को ही नहीं, अनुभवी प्रशासकों को भी सहमत किया।असहमत लोगों की संख्या बहुत कम थी।सारे राजनीतिक दल अपने मतभेद भूलकर इस युवा समूह के पीछे खड़े हो गये और देखते ही देखते यह एक जन-आन्दोलन बन गया।05 जुलाई,1970 को शुरु हुआ यह आन्दोलन 23 अगस्त 1970 तक चला था। अगस्त की वह 23 तारीख ही थी, तब के सीएम श्यामाचरण शुक्ल ने घोषणा की थी कि इन्दौर के लिये नर्मदा से पानी लाने की योजना राज्य सरकार को मंजूर है।श्यामाचरण शुक्ल इन्दौर के “दामाद” भी थे,इसलिये आन्दोलन के नारों में ज़िक्र जरुर होता था। इसी लिये लोग,कहते रहे श्यामा चरण ने अपनी ससुराल होने के नाते यह योजना इन्दौर को भेंट की थी।वे नहीं जानते कि उस समय के ईं.व्ही जी आप्टे ने एक महीने से ज्यादा समय तक नर्मदा किनारे रहकर उस स्थान की पहचान की थी, जहां से पानी तो पर्याप्त मिले ही,खर्च भी कम लगे। जिस जगह “जलूद” को चुना गया था, वहां पिछले 100 वर्षों से, एक समान जलस्तर रहा था व आगे भी ऐसा ही रहने के पूरे वैज्ञानिक कारण मौजूद थे। उन्हीं दिनों में सेवानिवृत्त आईएएस अपने मूल निवास इन्दौर लौटे,पी एस बाफना ने उस तकनीकी और वैज्ञानिक आधार पर “फीजि बिलीटी” प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनायी थी। बाद में बाफना की अध्यक्षता में मप्र सरकार ने कमेटी बना ई थी, जो भविष्य की “सस्टेने बीलिटि” पर विचार कर रिपोर्ट दे।नर्मदा के पानी की मांग पर हुये आन्दोलन की समिति में सब नौजवान थे। लेकिन, इनके पीछे सारी राजनीतिक और सामाजिक ताक़त लगी हुई थी। कामरेड होमी दाजी,की एक आवाज़ पर सारे कल-कारखाने और कपडा मिलें बन्द या चालू हो सकते थे,राजेन्द्र धारकर,सत्य भान सिंघल जो शहर के मध्य वर्ग में निर्विवाद, गहरा प्रभाव रखते थे,कल्याण जैन, छोटे बड़े दुकानदारों के एकछत्र नेता या प्रतिनिधि थे, सारे वैचारिक, राजनीतिक मतभेद भूलकर इस आन्दोलन के समर्थन में खड़े थे। आन्दोलन के दौरान रखा गया “शहर- बन्द” जैसा अब शायद ही कभी फिर देखने मिले।इकट्ठी युवा शक्ति ने सिद्ध कर दिया था कि अनुशासित रह कर बिना पत्थर उठाये भी “राज्य” से अपनी बात मनवाई जा सकती है। नर्मदा आ गई, इन्दौर की तब की प्यास भी बुझ गयी।लेकिन विकास विस्तार,फैलाव, पसराव ने फिर आज 1970 की स्थिति में ला खड़ा किया है। इन्दौर की ‘नर्मदा योजना’ समझने वालों की आज कमी थोडी है।नर्मदा का पानी लाकर सबकी प्यास बुझाने के लिये लगने वाली बिजली का झगड़ा आज सुलझा नहीं है?
छातिम के पेडों का
अब विरोध शुरू...
रायपुर में लगे छातिम के पेडों में पिछले कुछ सालों से सफेद फूल आने लगे हैं, शाम होते ही फूल के 'परागकण' हवा में फैलकर एक अजीब सी गंध पैदा करते हैं,जिसके चलते लोगों में एलर्जी, सरदर्द, सर्दी की समस्या हो रही है।बताया जाता कि छातिम का पेड़ जहरीला है,पत्ते न जानवर खाते न इस पर पक्षी अपना घर ही बनाते हैं, कुछ लोग छातिम को राक्षसी पेड़ भी कहते हैं, इस पेड़ के औषधीय गुण भी है लेकिन जानकारी के अभाव में इसका सेवन प्राण ले सकता है ! छातिम को सप्तपर्ण भी कहा जाता है, वैज्ञानिक एल्सटोनिया स्कोलारिस नाम है...!इसकी सुरभि में एक तरह की निर्दयता है, इसलिये यह लोगों को बहुत बेचैन,हैरान कर देती है, जिनको इसके बारे में पता न हो, उनकी हालत कस्तूरी मृग की तरह हो जाती है, आप इधर-उधर इसकी तलाश में भटकने लगते हैं।सितम्बर अक्टूबर में फूल लगते हैं,जब छातिम के फूल की तीखी गंध आने लगे तो समझ लीजिये ठंड आ गई छातिम के पेड़ो को शहर में लगाने में एक आईएएस (अब रिटायर) की बड़ी भूमिका रही है? शहर के मुख्य मार्गो के आस-पास छातिम के पेड़ों को पूरी तरह नष्ट या पेड़ोँ के बढ़ते हुए डंगालोँ को काटे जाने पऱ गंभीरता पूर्वक कदम उठाने की मांग तेजी से उठ रही है।पहले मीनल चौबे ज़ब केवल वार्ड मेंबर थीं,तब विरोध कर चुकी हैं,आजकल विधायक सुनील सोनी इसका विरोध कर रहे हैं।
23 से लागू हो सकती है
पुलिस आयुक्त प्रणाली...
2025 के अंतिम दिन 31 दिसंबर को कैबिनेट की बैठक में कमिश्नर प्रणाली लागू करने को लेकर निर्णय लिया गया. कैबिनेट में 23 जनवरी से लागू करने सहमति बनी क्योंकि 23 जनवरी को ही सुभाष चंद्र बोस की जयंती है,पुलिस कमिश्नर प्रणाली लेकर स्पष्ट खाखा जल्दी ही तैयार कर लिया जाएगा, बताया जा रहा है कई बिंदुओं पर सहमति बन गई है, तीन हिस्सों में रायपुर पुलिस की कमिश्नरी बंटेगी। मध्य, पूर्व और पश्चिम हिस्सा होगा,हर क्षेत्र की कमान एसपी रैंक के अधिकारी के पास होगी। एस पी के ऊपर एक एडिशनल कमिश्नर और कमिश्नर रैंक होंगे, कमिश्नर के अधीन ही एडिशनल डीसीपी होंगे और 21 एसीपी रहेंगे,यह डीएस पी रैंक के अफसर होंगे, थानों के प्रभारी अब टीआई नहीं, बल्कि डीएसपी रैंक के अफ सर होंगे?कमिश्नर मुख्यालय में 3 डीसीपी नियुक्त किए जाएंगे, क्राइम, प्रोटोकॉल, यातायात, अजाक, महिला अपराध विंग देखेंगे।रायपुर नगर निगम, बिरगांव नगर पालिका,कमिश्नरी का हिस्सा होंगे,रायपुर ग्रामीण के लिए अलग एसपी होंगे, कमिश्नर को कलेक्टर की तरह ही कुछ अधिकार दिये जाएंगे पुलिस कमिश्नर आर्म्स एक्ट, धारा 144 लगाने जैसे अधिकार का उपयोग खुद कर सकता है,पहले कलेक्टर की अनुमति लेने की आवश्यकता होती थी,गन लाइसेंस लेने के लिए कमिश्नर को आवेदन किया जा सकता है,यूएपीए एक्ट, अनैतिक देह व्यापार, मानव तस्करी,मोटर व्हीकल एक्ट, कारागार अधिनियम,पॉइजन एक्ट,कैटल ट्रेसपास एक्ट समेत कुछ अन्य अधिकार दिये जा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक रायपुर के सिविल लाइन, तेलीबांधा, देवेंद्रनगर, पंडरी,कोतवाली,गोलबाजार,गंज,मौदहापारा,पुरानी बस्ती, राजेंद्रनगर,टिकरापारा, डीडी नगर,आजाद चौक,सरस्वती नगर,आमानाका, कबीरनगर, खमतराई, गुढ़ियारी, उरला, धरसीवा, खमारडीह थाने इस प्रणाली में शामिल किए जा सकते हैं, वहीं आरंग,तिल्दा, खरोरा,अभनपुर,नया रायपुर, माना थाना रायपुर ग्रामीण एसपी के अधीन होगा।
पीएससी घोटाला: अंतिम
चार्जशीट,29 आरोपी
सीजीपीएससी घोटाला 20 21 मामले में सीबीआई ने फाइनल चार्जशीट फाइल कर दी है। फाइनल चार्जशीट में 29 को आरोपी बनाया है।आरोपियों में एक कोचिंग संचालक का नाम भी जोड़ा गया है।बताया जाता है कि कोचिंग संचालक, बारनवापारा होटल में कुछ अभ्यर्थियों को पहले से ही तैयारी कर वाया था,संचालक के पास सीजीपीएससी 2021 का पर्चा पहले ही पहुंच गया था, परिचय के आधार पर उसने अभ्यर्थियों को तैयारी करवाई थी,बता दें कि छग पीएससी 2021 के परिणाम में 2023 में जारी किये गए थे, जिसमें टॉप 20 में से 13 से ज्यादा अभ्यर्थी किसी अधिकारी, नेता या प्रभावशाली लोगों के बेटे, बहु या रिश्तेदार थे, तब पीएससी अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के दत्तक पुत्र, परिवार के तीन से ज्यादा सदस्यों का चयन इस परीक्षा में हुआ था,अलावा प्रभावशाली कारो बारी प्रकाश गोयल के बेटे- बहू भी डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित हुए थे।मामले में इन सभी को आरोपी बनाया गया है।
अप्रेल में राज्यसभा की
2 सीट खाली होगी...
छ्ग में कांग्रेस के वरिष्ठ अधिवक्ता केटीसी तुलसी और फूलोदेवी नेताम की राज्य सभा सीट रिक्त हो रही है,अभी के चुनावी गणित के अनुसार1-1 रास भाजपा, कांग्रेस के खाते में जा सकती है,देखना है कि प्रत्याशी चयन का आधार योग्यता होगा या जातिगत समीकरण होगा, बाहरी होगा या छत्तीसगढ़िया होगा?
और अब बस.......
0महादेव सट्टा एप मामले में ईडी ने सौरभ चंद्राकर समेत 5 की 91.82 करोड़ की चल अचल सम्पत्ति अटैच की है।
0छ्ग के सरकारी विभागों पऱ करीब 3 हजार करोड़ का बिजली बिल बकाया है....?
Oरायपुर में मोटर साइकिल सवार को टक्कर मारने के आरोप में पुलिस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री,मौजूदा विधायक के बेटे को हिट-एंड- रन’ का मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया है।