जनगणना 2026 के बाद देश में लोकसभा,राज्यसभा, कई राज्यों की विधानसभा सीटों में बदलाव की संभावना है। अनुमान लगाया जा रहा है कि जनगणना के बाद देश में वर्तमान 543 लोकसभा क्षेत्रों की संख्या 816 हो सकती है यदि महिला आरक्षण लागू हो गया तो कुल 273 लोस क्षेत्र महिलाओँ के लिये आरक्षित हो जाएगा, राज्यसभा सीटों की संख्या कुल 245 (वर्त मान ) से बढ़कर 332 होने की संभावना दिखाई दे रही है।
छ्ग की सियासत में
बड़ा बदलाव संभावित...
जनगणना के बाद छत्तीसगढ़ में भी लोकसभा, विधानसभा सीटों का परिसीमन होना तय है। 16 अप्रेल को लोकसभा में महिला आरक्षण को लेकर विशेष सत्र में चर्चा होने वाली है , सदन में बिल पास होने के बाद भाजपा शासित राज्यों में लागू करने की योजना है।छ्ग सूबे की सियासत में आने वाले वर्ष बड़े बदलावों के गवाह बनने वाले हैं। जनगणना और उसके बाद होने वाले परि सीमन से छग का राजनीतिक भूगोल पूरी तरह बदल जाए गा।वर्तमान में 90 सीटों वाली छग विधान सभा का स्वरूप विस्तार पा कर 120 सीटों तक पहुंचने की प्रबल संभा वना है।केवल विधानसभा नहीं,बल्कि छ्ग की 11 लोकसभा सीटों की संख्या में भी वृद्धि होकर 15 से 17 सीटें होने की संभावना होगी। बद लाव से न केवल क्षेत्रों की सीमाएं बद लेंगी,कई दशकों से राजनी तिक,जातिगत समीकरण भी ध्वस्त हो जाएंगे, राष्ट्रीय जन गणना 2027 को लेकर तैया रियां तेज कर दी हैं। इस बार की जनगणना ऐतिहासिक होगी यह पूरी प्रक्रिया 'डिजि टल मॉडल' पर आधारित होगी। डेटा जुटाने कागजी दस्तावेजों के बजाय मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया जाएगा। नागरिकों को अपनी जानकारी आनलाइन भरने का विकल्प भी मिलेगा।पहले चरण में भवनों की गिनती,उप योग (आवासीय / कार्यालय ) उपलब्ध सुविधाओं की जान कारी दर्ज की जाएगी। प्रत्येक 180 से 200 भवनों पर एक प्रगणक नियुक्त होगा। दूसरे चरण में सामान्य, संस्थागत, बेघर परिवारों के सदस्यों की भी विस्तृत गणना कीजाएगी। राय पुर सहित कई निकायों ने मकानों की नंबरिंग शुरू कर दी है।
90 से 120 विधान
सभा सीटों का गणित
वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद 2003 से छत्तीसगढ़ में विधानसभा सीटों की संख्या 90 बनी है, संशोधित अनुच्छेद 82 के अनुसार,2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाना है। जानकारों का मानना है कि छ्ग में करीब 30 नई विधानसभा सीटें भी जुड़ सकती हैं। लोक सभा सीटों की संख्या में संभवत: 6 सीटों की बढ़ोत्तरी होगी। महिला आरक्षण बिल लागू होने के बाद करीब 40 विस सीटें महिलाओं के लिए भी आरक्षित हो सकती हैं। लोकसभा में भी 5 सीटें महिलाओं के लिये आरक्षित हो सकती हैं।परिसीमन का तो सबसे बड़ा प्रभाव बस्तर संभाग में देखने को मिल सकता है। वर्तमान में यहां 12 विधानसभा, दो लोकसभा (बस्तर व कांकेर) सीटें हैं।बालोद जिले के 3 विधान सभा क्षेत्र वर्तमान में कांकेर लोकसभा में आते हैं। नए परिसीमन में बालोद जिला की कांकेर लोकसभा से अलग होकर किसी अन्य क्षेत्र का हिस्सा बन सकता है। बस्तर संभाग के भीतर चार से छह नई विधानसभा सीटें बढ़ने की संभावना है।आदिवासियों के लिए भी आरक्षित,अनार क्षित सीटों के समीकरण भी बदल सकते हैं,1951 से अब तक छग का राजनीतिक सफर मध्य प्रांत और बरार (1950 तक) से शुरू हुआ। 26 जनवरी1950 को संविधान लागू होने के बाद1951 के पहले चुनाव में 61 सीटें थीं। समय के साथ परिसीमन ने कई सीटों को समाप्त किया और कई नई सीटों ने जन्म लिया।अब तक कुल 6 बार परिसीमन किया जा चुका है और यह सातवां परिसीमन होगा।1951 -61 विस, 19 57में 57, 1962 में 81, 19 67 में 83,b2003 में 90, 2008 में 90 विधानसभा....
अभी तक अस्तित्व
खोने वाली प्रमुख सीटें
सूरजपुर, पाल, पिलखा, बगीचा,तपकरा, सरिया, जरहागांव, सीपत,पामगढ़, माल खरोदा,रायपुर शहर, मंदिर हसौद,पलारी भटगांव, भानपुरी, केसलूर, मारो,धमधा, खेरथा,चौकी और वीरेन्द्र नगर।
अस्तित्व में आई थी
नई विधानसभा...
नई विधानसभा सीटों में भरतपुर सोनहत , भटगांव, प्रतापपुर, रामानुजगंज, कुन कुरी, कोरबा, बेलतरा, जै जैपुर, पाम गढ़,बिलाईगढ़, रायपुर पश्चिम,रायपुर उत्तर, रायपुर दक्षिण, दुर्ग ग्रामीण, वैशाली नगर,अहिवारा नवा गढ़,पंडरिया, मोहला - मान पुर,अंतागढ़ और बस्तर।
जातिगत समीकरणों
पर प्रभाव....
1951 में अविभाजित मध्य प्रदेश के दौरान छत्तीसगढ़ की 61 सीटों में 8 अनुसूचित जन जाति (एसटी) के लिए आर क्षित थीं।1957 से अनुसूचित जाति(एससी) के लिए आर क्षण शुरू हुआ। वर्तमान में विधानसभा में 29 सीटें एसटी, 10 सीटें एससी वर्ग के लिए आरक्षित हैं,नए परिसीमन के बाद जनसंख्या के अनुपात के अनुसार इन आरक्षित सीटों की संख्या बढ़ सकती है या आरक्षित सीटें,अनारक्षित श्रेणी में भी शामिल हो सकती हैं।
क्या है होता है
परिसीमन...
भारत निर्वाचन आयोग अनु सार,परिसीमन का शाब्दिक अर्थ है किसी देश या प्रांत में विधायी निकाय वाले निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा तय करना है । सामान्यत: जनगणना के बाद ही परिसीमन किया जाता है, जिसमें लोकसभा,विधानसभा दोनों क्षेत्रों की सीमा तय होती है। राजनीतिक प्रेक्षकों के अनुसार, 2027की जनगणना और उसके बाद परिसीमन केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होगा,बल्कि छग कीसत्ता की चाबी का नया खाका तैयार करेगा। राजनीतिक दलों ने अभी से इन संभावित बदलावों को ध्यान में रखते हुए अपनी भविष्य की रण नीति पर काम शुरू कर दिया है।जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो रही है। इसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया होगी।
शराब घोटाला :सौम्या,
केके और डडसेना....?
करीब 3,200 करोड़ के शराब घोटाला में ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) ने विशेष न्यायालय में नवम पूरक चालान पेशकिया। यह चालान 3 प्रमुख लोगों में पूर्व सीएम सचिवालय की उप सचिव सौम्या चौरसिया, केके श्रीवास्तव,कांग्रेसऑफिस के पूर्व एकाउंटेंट देवेंद्र डडसेना शामिल हैं। ईओडब्ल्यू की विवेचना में सौम्या चौरसिया की भूमिका को बेहद महत्व पूर्ण बताया गया है। साक्ष्यों के आधार पर प्रमाणित हुआ है कि तब की उसचिव रहते हुए उन्होंने अपने पद का दुरु पयोग किया। शराब घोटाला सिंडिकेट को न केवल प्रशास कीय सुविधा, समर्थन दिया, बल्कि पूरे तंत्र के बीच सम न्वय, संरक्षण की भूमिका भी निभाई। सौम्या की ही सक्रिय संलिप्तता से शासन के राज स्व को भारी क्षति पहुंची है। विवेचना में देवेंद्र डडसेना के खिलाफ भी पुख्ता सबूत मिले हैं। डडसेना, जो राजीव भवन का पुराना एकाउंटेंट रहा है, आरोप है कि वह घोटाले की अवैध राशि को प्राप्त करने और उसे सुरक्षित रखने का काम करता था। सिंडिकेट के निर्देशानुसार काली कमाई को आगे भेजने (हवाला, अन्य माध्यमों से) में सक्रिय भागी दारी निभाई।कृष्ण कुमार उर्फ केके श्रीवास्तव के संबंध में प्रमाणित हुआ है कि उसने अवैध उगाही तंत्र में सक्रिय भूमिका निभाई। श्रीवास्तव पर अवैध नगद राशि के परि वहन, व्यवस्थापन, विभिन्न क्षेत्रों में निवेश कर खपाने का आरोप है। उसने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सिंडिकेट के लिए धन अर्जित करने में सह भागिता की। ईओडब्ल्यू के जांच अधिकारियों का कहना है इस कांड में संलिप्त सर कारी अधिकारियों,राजनैतिक व्यक्तियों और निजी फर्मों के विरुद्ध जांच अभी बंद नहीं हुई है।भ्रष्टाचार निवारण अधि नियम,भादंवि की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज इस मामले में आने वाले समय में कुछ बड़े चेहरों पर शिकंजा कस सकता है।
और अब बस.....
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