: कोरिया वन मडल में,वनरक्षक भर्ती में फर्जीवाड़ा
Fri, Jan 10, 2025
कोरिया। बैकुंठपुर। कोरिया जिले में वनरक्षक भर्ती प्रक्रिया में भी धांधली के आरोप लग रहा हैं...कोरिया वनमंडल में 35, मनेंद्रगढ़ वनमंडल में 37 और टाइगर रिजर्व में 26 वनरक्षकों की भर्ती होनी है...मामले में वनरक्षक भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों ने नोडल अधिकारी (डीएफओ कोरिया ) को पत्र सौंपकर भर्ती निरस्त करने मांग रखी गई है... जिसमें बताया गया है कि फिजिकल टेस्ट में वन अधिकारी और स्टाफ के रिश्तेदार भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए...अभ्यर्थियों ने शिकायत की वनमंत्री, पीसीसीएफ, सीसीफ सरगुजा को भी कॉपी भेजी गई है।कोरिया, मनेंद्रगढ़ वनमंडल और गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में वनरक्षकों के रिक्त 98 पदों पर भर्ती करने हैदराबाद की कंपनी को ठेका दिया गया था।जिसने शारीरिक दक्षता परीक्षण के लिए कोरिया जिले के चरचा के महाजन स्टेडियम में अत्याधुनिक मशीनरी लगाकर हाइटेक तरीके से कराई थी। जिसमें 12 हजार अभ्यर्थियों में से करीब आधे ही शामिल हुए थे। कोरिया जिले में वनरक्षकों ने भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगा डेढ़ दर्जन अभ्यर्थियों ने डीएफओ बैकुंठपुर को हस्ताक्षरयुक्त पत्र सौंपा है। जिसमें बताया गया है कि फिजिकल टेस्ट में वन अधिकारी और स्टाफ के रिश्तेदार भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए। साथ ही शारीरिक नापजोख कराया गया। ड्यूटी में तैनात एक वनपाल ने अपने दो पुत्रों का लंबी कूद और गोला फेंक में नंबर बढ़वाया है। जबकि नियम में अधिकारी व कर्मचारी स्वयं अपने रिश्तेदार को शारीरिक दक्षता परीक्षण नहीं ले सकते हैं। वहीं वनरक्षक की लंबी कूद में ड्यूटी लगी थी।उनके भाई ने 14 दिसंबर को मनेंद्रगढ़ वनमंडल के लिए दक्षता परीक्षण दिया। जिसमें उनके नंबर 45 आए थे।वहीं 17 दिसंबर को गुरु घासीदास नेशनल पार्क की भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुआ। जिसमें उसके वनरक्षक भाई के सहयोग से 70 अंक मिला है।जबकि भर्ती के नियम एवं शर्तों में एक अभ्यर्थी केवल एक ही वनमंडल से फिजिकल टेस्ट शामिल हो सकना उल्लेख है।मामले में भर्ती प्रक्रिया निरस्त कर दोबारा शारीरिक परीक्षण कराने की मांग रखी है। अभ्यर्थियों ने शिकायत की वनमंत्री, पीसीसीएफ, सीसीफ सरगुजा को भी कॉपी भेजी है।
मामले में कोरिया डीएफओ प्रभाकर खलखो ने बताया कि जिन लोगों की शिकायत मिली है सभी लोगों का निरस्त कर दिया गया है... जिस तरह से शिकायत में अंक बढ़ाने की बात सामने है लेकिन अंक नहीं बढ़ाया गया है...क्योंकि जिन लोगों की शिकायत मिली है उन्होंने ने सभी इवेंट पर न्यूनतम अंक नहीं ला पाए हैं।डीएफओ ने बताया कि अगर कोई भी अभ्यर्थी ने दो जगह से वनरक्षक भर्ती प्रक्रिया में भाग लिया होगा उसका भी भर्ती प्रक्रिया निरस्त माना जाएगा....साथ ही उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया चल रही है उस समय कोरिया वन मंडल क्षेत्र में 61 हाथी और 4 टाइगर विचरण कर रहे थे। वहा पर स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई थी और स्टाफ की कमी भी थी.. उस समय वनरक्षक भर्ती प्रक्रिया में रिश्तेदारों की जानकारी नहीं थी।
: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 प्रशिक्षण संपन्न
Thu, Jan 9, 2025
मनेंद्रगढ़। एमसीबी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के निर्धारित लक्षण को प्राप्त करने जिला शिक्षा अधिकारी मनेद्रगढ़- चिरमिरी- भरतपुर द्वारा तीनों विकासखंड में संकुल प्राचार्य, प्राचार्य एवं संकुल समन्यको की बैठक आयोजित की गई, बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी अजय मिश्रा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शालाओं में पाठ्यचर्या को सुचारू रूप से संचालन एवं बच्चों में समझ के साथ सीखने की दक्षता प्राप्त करने के लिए राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ द्वारा प्रकाशित चर्चा पत्र जनवरी 2025 में दिए गए एजेंडा के अनुसार विभिन्न पहलुओं को कार्यान्वित करने हेतु निर्देशित किया तत्पश्चात जिला नोडल अधिकारी जसवंत कुमार द्वारा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बारे में विस्तार पूर्वक प्रशिक्षण दिया गया बैठक में विकासखंड शिक्षा अधिकारी सुरेंद्र जायसवाल, संकुल प्राचार्य संजीव सिंह, गिरीश कुरचनिया, श्रीकांत लांजेवार, बलराज पाल, सत्येंद्र सिंह, डॉ.विनोद पांडेय, टी. विजय गोपाल राव सहायक विकासखंड अधिकारी वीरेंद्र पांडे, सहित अन्य प्राचार्य एवं संकुल समन्यक उपस्थित रहे ।
: जांजगीर का अधूरा विष्णु मंदिर और शिवरीनारायण मंदिर की प्रतिस्पर्धा....
Thu, Jan 9, 2025
जांजगीर,जिसे जाजल्यदेव की नगरी भी कहा जाता है उन्होंने अपने नाम पर ही जाजल्यपुर नामक नगर बसाया था।वर्तमान में वह जांजगीर के नाम से प्रसिद्ध है।वैष्णव धर्म उपासक ने अनेक मंदिर का निर्माण करवाया,उसमे छग के ह्रदयस्थल में स्थित जांजगीर जिले में 12 वीँ सदी में विष्णु मंदिर का निर्माण कर वाया था,यह स्थापत्य कला का उदाहारण है|छग के जांजगीर का विष्णु मंदिर जो कभी पूरा नहीं हुआ।विष्णु जी का एक अनोखा मंदिर है जो निर्माण काल से ही अधूरा है। मंदिर के ऊपर स्थापित होने वाला हिस्सा पास ही में अलग- थलग रखा है।यही अब मंदिर की पहचान है।मंदिर के चारों ओर अत्यन्त सुंदर, अलंकरणयुक्त प्रतिमाएँ भी बनाई गई हैं,त्रिमूर्ति के रूप में ब्रह्मा,विष्णु और महेश की मूर्ति भी यहां दीवारों में स्थापित है। ठीक इसके ऊपर गरुणासीन भगवान विष्णु की मूर्ति भी है। मंदिर के पृष्ठ भाग में सूर्यदेव विराजमान हैं।मूर्ति का एक हाथ भग्न है लेकिन रथ और उसमें जुते सात घोड़े स्पष्ट हैं। यहीं नीचे की ओर कृष्ण कथा से सम्बंधित चित्रों में वासुदेव,कृष्ण को दोनों हाथों से सिर के ऊपर उठाये गतिमान दिखाये गये हैं। अनेक मूर्तियां नीचे की दीवारों में बनी हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि किसी समय बिजली गिरने से मंदिर ध्वस्त हो गया था जिससे मूर्तियां बिखर गयीं। बाद में मूर्तियों को मंदिर की मरम्मत करते समय दीवारों पर ही जड़ दिया गया।मंदिर के चारों ओर अन्य कलात्मक मूर्तियों में विष्णु के दशावतारोँ में से वामन,नर सिह, कृष्ण राम की प्रतिमाएँ स्थित हैं। छग के किसी भी मंदिर मे रामायण से सम्बंधित इतने दृश्य कहीं नहीं मिलते जितने विष्णु मंदिर में हैं। सजावट के बावजूद मंदिर के गर्भगृह में कोई मूर्ति नहीं है आज तक यह मंदिर सूना है और एक दीप के लिये तरस रहा है....?मंदिर के निर्माण से संबंधित अनेक जनुश्रुतियां प्रचलित हैं। इन्हीं में एक दंतकथा के अनुसार निश्चित समयावधि जिसे कुछ लोग इस छैमासी रात कहते हैं, शिवरीनारायण मंदिर और जांजगीर के इस मंदिर के निर्माण में प्रतियोगिता हुई थी।कहते हैं कि भगवान नारायण ने घोषणा की थी कि जो मंदिर पहले पूरा होगा,वे उसी में प्रविष्ट होंगे।शिवरीनारायण का मंदिर पहले पूरा हो गया, भगवान नारायण उसमें प्रविष्ट हुए। इस तरह जांजगीर का यह मंदिर सदा के लिए अधूरा छूट गया। अन्य दंतकथा महाबली भीम से जुड़ी भी प्रचलित है। मंदिर से लगे भीमा तालाब को भीम ने 5 बार फावड़ा चला कर खोदा था।किंवदंती के अनुसार भीम को इस मंदिर का शिल्पी बताया गया है। एक बार भीम, विश्वकर्मा में एक रात में मंदिर बनाने की प्रतियोगिता हुई। तब भीम ने इस मंदिर का निर्माण कार्य आरम्भ किया। मंदिर निर्माण के दौरान जब भीम की छेनी-हथौड़ी नीचे गिर जाती तब उसका हाथी उसे वापस लाकर देता था।यह कई बार हुआ,आखिरी बार भीम की छेनी पास के तालाब में चली गयी, जिसे हाथी वापस नहीं ला सका और सबेरा हो गया। भीम को प्रतियोगिता हारने का बहुत दुख हुआ और गुस्से में आकर हाथी के दो टुकड़े कर दिया। इस प्रकार मंदिर अधूरा रह गया। आज भी मंदिर परिसर में भीम- हाथी की एक खंडित प्रतिमा है।