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जांच से खुल सकते हैं बड़े राज" "करोड़ों की स्वास्थ्य योजनाओं पर सवाल: दवा वितरण या दवा विनाश?"

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रोशनलाल अवस्थी की कलम से.... : जांच से खुल सकते हैं बड़े राज" "करोड़ों की स्वास्थ्य योजनाओं पर सवाल: दवा वितरण या दवा विनाश?"

Praveen Nishee Thu, Jun 25, 2026

गरियाबंद।काण्डेकेला। एक ओर राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने, मुफ्त दवा वितरण और जनस्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर गरियाबंद जिले के ग्राम काण्डेकेला से सामने आई तस्वीरों ने इन दावों की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव के समीप खुले स्थान पर भारी मात्रा में शासकीय दवाओं, स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेजों एवं पहचान पत्रों को आग के हवाले किए जाने का मामला सामने आया है।

घटनास्थल से प्राप्त तस्वीरों में जली हुई दवाइयों की शीशियां, स्वास्थ्य विभाग से संबंधित सामग्री, दस्तावेज तथा विभिन्न कार्ड बिखरे हुए दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और सरकारी संसाधनों के संरक्षण को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

सरकारी दवा वितरण व्यवस्था पर बड़ा सवाल—

सरकार हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर ग्रामीण और गरीब मरीजों को मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराने की योजना संचालित करती है। लेकिन यदि वही दवाएं मरीजों तक पहुंचने के बजाय आग में झोंकी जा रही हों तो यह न केवल सरकारी धन की बर्बादी है बल्कि जरूरतमंद मरीजों के अधिकारों का भी खुला उल्लंघन है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिन दवाओं की जरूरत गांव के मरीजों को थी, उन्हें नियमानुसार नष्ट करने की प्रक्रिया अपनाने के बजाय खुले स्थान पर फेंककर जला दिया गया। इससे यह आशंका भी गहराती है कि कहीं विभागीय लापरवाही अथवा अनियमितताओं के सबूत मिटाने का प्रयास तो नहीं किया गया।

जिम्मेदार अधिकारी झाड़ रहे पल्ला—

मामले की जानकारी लेने जब संबंधित चिकित्सक एवं खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) से संपर्क किया गया तो उन्होंने मामले से अनभिज्ञता जताते हुए स्पष्ट जानकारी देने से इंकार कर दिया। जिम्मेदार अधिकारियों का यह रवैया संदेह को और गहरा करता है।

सवाल यह है कि यदि सरकारी दवाएं जलाई गई हैं तो:

दवाएं किस स्वास्थ्य केंद्र की थीं?

उन्हें किसके आदेश पर नष्ट किया गया?

क्या दवाओं को नष्ट करने की वैधानिक प्रक्रिया अपनाई गई?

क्या इसके लिए कोई पंचनामा या विभागीय रिकॉर्ड मौजूद है?

यदि नहीं, तो सरकारी संपत्ति को खुले में जलाने का जिम्मेदार कौन है?

पर्यावरण और स्वास्थ्य सुरक्षा नियमों की भी अनदेखी—

विशेषज्ञों के अनुसार दवाओं एवं चिकित्सा अपशिष्टों के निस्तारण के लिए निर्धारित जैव-चिकित्सा अपशिष्ट (Biomedical Waste) नियम हैं। इन नियमों के तहत दवाओं और चिकित्सा सामग्री को अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से वैज्ञानिक तरीके से नष्ट किया जाना चाहिए। खुले स्थान पर इन्हें जलाना पर्यावरण एवं जनस्वास्थ्य दोनों के लिए खतरनाक माना जाता है।

ग्रामीणों में आक्रोश, जांच की मांग तेज—

घटना सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तो स्वास्थ्य विभाग में चल रही कई अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।

प्रशासन के सामने बड़े सवाल—

काण्डेकेला में जली हुई सरकारी दवाओं की यह तस्वीरें केवल एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न हैं। जब ग्रामीण क्षेत्रों में मरीज आवश्यक दवाओं के अभाव में परेशान हैं, तब सरकारी दवाओं का इस तरह राख में तब्दील होना गंभीर प्रशासनिक विफलता माना जा रहा है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषियों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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