अटैचमेंट में, प्रदेश स्तर के कार्यालयों से सीधे आदेश : संलग्नीकरण पर रोक के बावजूद मनमानी, नियमों की अनदेखी कर चहेते कर्मचारियों को संरक्षण
Praveen Nishee Fri, Apr 17, 2026

मनेंद्रगढ़। एमसीबी/कोरिया।एक ओर शासन स्तर से कर्मचारियों के संलग्नीकरण (अटैचमेंट) पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, वहीं दूसरी ओर मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) और कोरिया जिले में यह प्रक्रिया अब भी जारी है। बताया जा रहा है कि प्रदेश स्तर के कार्यालयों से सीधे आदेश जारी कर कुछ कर्मचारियों को संलग्न किया जा रहा है, जिससे शासन के “सुशासन” के दावों पर सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, नियमों को दरकिनार करते हुए चहेते कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जा रही है। संबंधित कार्यालयों में वास्तविक आवश्यकता, कार्यभार या प्रशासनिक औचित्य की जांच किए बिना ही आदेश जारी किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, नजदीकी जिलों को नजरअंदाज कर दूरस्थ जिलों से कर्मचारियों को संलग्न किया जा रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता संदिग्ध हो गई है।
बताया जाता है कि यह पूरा मामला प्रभाव और ऊंची पहुंच से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि जिम्मेदार अधिकारी भी कार्रवाई से बचते नजर आ रहे हैं। शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद इस तरह की कार्यप्रणाली न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है।
इसी कड़ी में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में एक आदेश के तहत विक्टर टोप्पो, सहायक ग्रेड-2 को एमसीबी (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) खंड के साथ-साथ बैकुण्ठपुर खंड का कार्य भी सौंप दिया गया है। दोनों स्थानों के बीच लगभग 50 किलोमीटर की दूरी होने के बावजूद एक ही कर्मचारी को दो जगह का दायित्व देना कई सवाल खड़े करता है कि आखिर वह दोनों स्थानों पर एक साथ कैसे कार्य कर पाएंगे।
वहीं, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) के अंतर्गत भी एक आदेश जारी कर जिला बलरामपुर में पदस्थ जिला कार्यक्रम प्रबंधक (जॉब्स) सिमेन्द्र कुमार सिंह को आगामी आदेश तक मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में कार्य करने हेतु संलग्न किया गया है।
फिलहाल, पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी स्थिति को और अधिक संदिग्ध बना रही है। यदि समय रहते इस पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो संलग्नीकरण का यह सिलसिला आगे भी जारी रहने की आशंका बनी रहेगी।

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