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जंगलों की मुस्कान और अनाथ बच्चों की दुआओं के बीच मना जनसेवक का जन्मोत्सव

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सत्ता नहीं, सेवा का संस्कार: गौरीशंकर कश्यप : जंगलों की मुस्कान और अनाथ बच्चों की दुआओं के बीच मना जनसेवक का जन्मोत्सव

Praveen Nishee Sun, Jun 7, 2026

जन्मदिन को बनाया मानवता का महापर्व,सुदूर अंचल में बच्चों को दिया शिक्षा का मंत्र, अनाथ आश्रम में बांटी खुशियाँ; जनप्रतिनिधित्व की नई मिसाल बनी संवेदनशील पहल

रोशन लाल अवस्थी की कलम से

गरियाबंद/मैनपुर। राजनीतिक जीवन में जन्मदिन अक्सर शक्ति प्रदर्शन, बधाइयों और आयोजनों का माध्यम बनते हैं, लेकिन गरियाबंद जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप ने अपने जन्मोत्सव को जनसेवा, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व का ऐसा स्वरूप दिया, जिसने लोगों के दिलों को छू लिया। सुदूर जंगलों में बसे ग्रामीण परिवारों से लेकर अनाथ बच्चों और असहाय बुजुर्गों तक पहुंचकर उन्होंने यह संदेश दिया कि जनप्रतिनिधि का वास्तविक सम्मान जनता के बीच रहकर उनकी खुशियों और पीड़ा को साझा करने में है।

जब जन्मदिन बना ग्रामीण अंचल के सम्मान का उत्सव—

मैनपुर विकासखंड के सघन वन क्षेत्र साहेबीनकछार में जब जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप पहुंचे, तो पूरा क्षेत्र आत्मीयता और उत्साह से भर उठा। ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने पारंपरिक अपनत्व के साथ उनका स्वागत किया।

स्थानीय लोगों का कहना था कि आजादी के बाद पहली बार किसी जनप्रतिनिधि ने जंगलों के बीच पहुंचकर ग्रामीण समाज के साथ अपना जन्मोत्सव मनाया। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन लोगों के सम्मान का प्रतीक था जो वर्षों से दूरस्थ क्षेत्रों में रहकर अपनी संस्कृति, परंपराओं और आत्मसम्मान को संजोए हुए हैं।

बच्चों को दिया सबसे बड़ा उपहार—शिक्षा का संदेश—

जन्मदिन के अवसर पर कश्यप ने क्षेत्र के बच्चों को अपने पास बुलाकर उनसे आत्मीय संवाद किया। उन्होंने बच्चों को बताया कि शिक्षा ही वह दीपक है जो जीवन के अंधकार को दूर कर सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।

उन्होंने बच्चों से कहा कि वे कठिन परिस्थितियों से घबराएं नहीं, बल्कि शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाएं। उनके प्रेरक शब्दों ने बच्चों के मन में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार किया।

अनाथ बच्चों के बीच बांटी मुस्कान, बुजुर्गों से लिया आशीर्वाद—

जन्मोत्सव का दूसरा और सबसे भावुक पड़ाव ओड़िशा के कलाहांडी जिले के धर्मगढ़ स्थित दसोदा अनाथ आश्रम में रहा। यहां कश्यप ने अनाथ बच्चों के साथ केक काटा, उन्हें फल, कॉपी और पुस्तकें भेंट कीं तथा उनके साथ समय बिताकर खुशियाँ साझा कीं।

बच्चों की मुस्कान और उनके स्नेह ने पूरे वातावरण को भावुक बना दिया। जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए बच्चों ने जिस आत्मीयता से उनका स्वागत किया, वह हर किसी के लिए भावुक कर देने वाला क्षण था।

सेवा की जीवंत प्रतिमूर्ति हैं श्याम सुंदर जाल

आश्रम संचालक श्याम सुंदर जाल द्वारा किए जा रहे मानव सेवा के कार्यों ने भी सभी को प्रभावित किया। उन्होंने अपना जीवन लगभग 120 अनाथ बच्चों, असहाय बुजुर्गों और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया है।

कश्यप ने उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया और कहा कि ऐसे लोग समाज के वास्तविक नायक हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के मानवता की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां आकर उन्हें इंसानियत का नया पाठ सीखने का अवसर मिला।

दुआओं से भरा जन्मदिन—

आश्रम के बुजुर्गों ने जिला पंचायत अध्यक्ष को स्नेह, आशीर्वाद और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। वहीं बच्चों ने उन्हें जन्मदिन की बधाई देकर उनके जीवन में निरंतर सफलता और जनसेवा की कामना की।

जनप्रतिनिधित्व का मानवीय चेहरा बना जन्मोत्सव—

सुदूर अंचल के बच्चों को शिक्षा का संदेश देना, अनाथ बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाना और बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त करना—इन सबने इस जन्मदिन को एक सामान्य उत्सव से कहीं अधिक बना दिया।

यह जन्मोत्सव इस बात का प्रमाण बन गया कि राजनीति का सबसे सुंदर स्वरूप सेवा, संवेदना और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की भावना में निहित है। जंगलों की हरियाली से लेकर अनाथ आश्रम की दुआओं तक, गौरीशंकर कश्यप का यह जन्मोत्सव मानवता, करुणा और जनसेवा का ऐसा अध्याय बन गया, जिसकी चर्चा लंबे समय तक होती रहेगी

"जहां जन्मदिन पर केक से ज्यादा बच्चों की मुस्कान और बुजुर्गों का आशीर्वाद मायने रखे, वहीं से जनसेवा का वास्तविक सफर शुरू होता है।"

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