वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे की कलम से..*(कॉलम 21 सालों से लगातार) : उसूलों पऱ जो आंच आये तो टकराना जरुरी हैं.... जो जिन्दा हो तो फिर जिन्दा नजर आना जरुरी है....
Praveen Nishee Fri, May 8, 2026
अब यह तो स्पष्ट हो चुका है भाजपा, चुनाव आयोग के गठबंधन (?)से 30 से 40% वोट से चुनाव जीतती है तो इन परिस्थितियों में जब विपक्ष एक नहीं टुकड़ोँ में बटा है तो विपक्ष को 40% से ज्यादा वोट कँहा से आएंगे। विपक्ष एक जुट हो मतभेद, आकांक्षाओं को भूल संयुक्त मोर्चा बना कर लड़ाई नहीं लड़ेगा तब तक भाजपा का शासन रहेगा कटुसत्य हैऔऱ जनता विपक्षी दलों के आपसी मतभेद का नुकसान झेलती रहेगी औऱ भाजपा के स्वयं हित के लिये निर्णयों का शिकार होती ही रहेगी। 05 राज्यों के चुनावों में पश्चिम बंगाल में आजादी के बाद पहली बार भाजपा की सरकार बनी है, करीब 30 साल कांग्रेस,34 कम्युनिस्ट पार्टी, 15 साल टीऍमसी की सर कार के बाद पहली बार कमल खिला,असम पाण्डुचेरी में भाजपा, केरलम में कांग्रेस की सरकार बनना तय है तो तमिलनाडु में मिलीजुली सरकार बन सकती है,अब भाजपा 'कॉंग्रेसमुक्त' नहीं 'क्षेत्रीय दलमुक्त भारत' बनाने की दिशा में कदम बढा चुकी है।2014 में केंद्र की सत्ता में आने के बाद नरेन्द्र मोदी के खाते में दो बड़ी सफलताएं जुड़ चुकी हैं। एक तो बिहार में अपना सीएम बनाना,दूसरा प.बंगाल में भाजपा की सरकार बनाना। इन सफलताओं में ईवीएम धांधली,एसआई आर,चुनाव आयोग के पक्ष पाती रवैये का कितना योगदान है,अलग विश्लेषण का विषय है।लेकिनअब क्षेत्रीय दलों के लिए भाजपा का ऐसा प्रदर्शन उनके अस्तित्व के लिये बड़ी चुनौती बन चुका है। महाराष्ट्र में भाजपा को शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस ने सत्ता से बाहर किया तो भाजपा ने पहले शिवसेना,फिर एनसीपी को ही तोड़ दिया। अब राज्य में ये क्षेत्रीय दल मजबूत नहीं रह गये हैं, अकेले भाजपा का मुकाबला कर सकें। हरियाणा में भाजपा ने यही खेल जेजेपी के साथ खेला। ओडिशा में बीजू जनता दल को विपक्ष में बैठने पर मजबूर किया,बिहार में राष्ट्रीय जनता दल लालू प्रसाद के कारण बचा हुआ है, लेकिन वह भी कब तक कहा नहीं जा सकता..?लोकजन शक्ति पार्टी भाजपा ने तुड़वा ही दी है। जनतादल यूनाइटेड भाजपा के साथ सत्ता में है, नीतीश को सीएम की कुर्सी से उतरवाकर भाजपा ने उसे भी ज़मीनी हक़ीक़त से परिचित करा दिया है, दिल्ली में आम आदमी पार्टी को पहले हराया और अब तोड़ दिया गया है। ले देकर इस समय केवल पंजाब में ही आप की सरकार है। शिरोमणि अकाली दल भी भाजपा ने ख़त्म ही कर दिया है। अगले साल के चुनाव बताएंगे, यहां कांग्रेस पहले की तरह जीत दर्ज़ करती है या भाजपा के खाते में पंजाब आएगा? चुनौती अगले साल उत्तरप्रदेश में अखिलेश यादव के सामने होगी, जिसमें वे भाजपा को हरा सके तो समाजवादी पार्टी का अस्तित्व मजबूत होगा। बसपा पहले भाजपा के सामने घुटने टेक चुकी है। मेघालय, सिक्किम, मिजोरम, नगालैंड जैसे राज्यों में क्षेत्रीय दलों की सरकारें हैं,भाजपा किसी न किसी तरह शामिल है।असम, त्रिपुरा, मणिपुर, अरुणाचल में अब भाजपा की अपनी सरकार है। झारखंड में झामुमो के साथ कांग्रेस की सरकार है इसके अलावा कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, केरल में भी कांग्रेस सत्ता में है। यानी पंजाब छोड़ किसी राज्य में गैर भाजपाई, गैर कांग्रेसी सरकार नहीं है। 2029 के चुनाव की तस्वीर स्पष्ट हो रही है, जिसमें भाजपा- कांग्रेस आमने- सामने रहेंगे, बाकी क्षेत्रीय दल तो हाशिये पर ही दिखेंगे... ?केजरीवाल को पंजाब में निपटा दिया जाएगा! चंद्रबाबू नायडू का भी यही हाल होगा,अखिलेश का भी यही परिणाम तय है..भाजपा अगर बंगाल जीत सकती है,आने वाले दौर में दक्षिण में ही प्रयोगशाला बनाई जाएगी! केरलम में अभी तो कांग्रेस सरकार आई है, भाजपा वालों के हाथों में झुरझुरी हो रही होगी, मतलब खुशी हो रही होगी..तमिलनाडु में थाला पति विजय पर अभी कुछ कहना जल्दबाज़ी ही होगी.., कांग्रेस मुक्त भारत का ख्वाब देखने वाली भाजपा क्षेत्रीय पार्टियों से मुक्त करने में लगी हुई है... वो दिन दूर नहीं जब दो ध्रुव ही बचेंगे... अब आप तय करें कि वो उचित होगा या नहीं.. होना यही है...?
मोदी मंत्रिमंडल में शामिल 2
राज्यमंत्री विस चुनाव हारे.....
देश में हाल ही के 5 राज्यों के विस चुनाव में 3 राज्यों में भाजपा की सरकार बनी वहीं देश में पॉपुलर नरेंद्र मोदी की मंत्रिमंडल में शामिल संसदीय कार्य राज्यमंत्री एल. मुरुगन औऱ मत्स्य पालन राज्यमंत्री जार्ज कुरियन विधानसभा चुनाव ही हार गये हैं।मोदी मंत्रिमंडल के 2 सदस्य तथा मप्र से राज्यसभा सदस्य एल.मुरुगन तमिलनाडु के अविनाशी विस से औऱ जार्ज कुरियन केरलम के काँजी पल्ली विधानसभा से चुनाव हार गये हैँ।
बस्तर में 5 हजार साल
पुरानी बसाहट......!
छत्तीसगढ़ के बस्तर में मौजूद मानव विज्ञान केंद्र,भारत के इतिहास में एक ऐतिहासिक कार्य करने जा रहा है,बस्तर के जंगलों में मिले करीब 5 हजार साल पुराने शैल चित्रों में महिलाओं, पुरुषों,बच्चों की मौजूदगी का पता लगा रही है वहीं पत्थरों और दीवारों पर उकेरे गये शैल चित्रों का डिजिटिलाइजेशन किया जा रहा है,बस्तर में प्रागैतिहासिक काल के कई महत्वपूर्ण साक्ष्य उभरकर सामने आ रहे हैं...! कांकेर,कोंडागांव,अबूझमाड़ में मिले शैल चित्रों के अलावा बस्तर में 31 साइटों की पहचान की गई है,उस काल के इंसानों की मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं, प्रमाण पत्थरों पर उकेरे गये शैलचित्रों में दिखाई दे रहे हैं।कई जगह रंगीन चित्र हैं कई जगहों पर लोहे से भी चित्र बनाए गए हैं।खास बात यह है,शैलचित्र 5 हजार सालों से भी अधिक पुराने हो सकते हैं,यानि उस समय भी बस्तर में मानव सभ्यता मौजूद थी, मानवविज्ञान केंद्र के अधीक्षक पीयूष रंजन साहू के अनुसार बताया कि बस्तर के कांकेर में जो शैलचित्र मिले हैं, मानव हाथ के निशान के साथ बच्चे, महिला के हाथ के निशान है, पुरुष हाथ के निशान का आकार काफी बड़ा है,जो आज भी आम इंसान से कहीं ज्यादा बड़ा लगता है।इसलिए एलियन साइट भी कहा जाता है...हालांकि मानव वैज्ञानिकों का मानना है कि हजारों साल पहले इंसान न केवल एक परिवार की तरह रह रहा था, बल्कि बस्तर की कई गुफाओं में उसने चित्रकला में भी पारंगत हासिल कर ली थी, अलग -अलग शैलचित्रक भी शिकार तो कभी आमजन जीवन का विवरण देते हैं।कई चित्रों में शिकार के दौरान हथियार के इस्तेमाल के भी चित्र दिखाई देते हैं। इससे पता चलता है कि लोहे का उपयोग बस्तर में स्थानीय लोग हजारों सालों से कर रहे होंगे यह पहली बार है जब बस्तर में इस तरह सर्वेक्षण का काम किया जा रहा है।अबूझमाड़-नारायणपुर कांकेर सहित पूरे बस्तर में 31 ऐसी जगह हैं,जहां इस तरह के शैल चित्र दिखाई दिए हैं।जल्दी ही वैज्ञानिक तकनीक से (रॉकडेटिंग) की जाएगी।
ताड़मेटला नक्सली कांड: जाँच में गंभीर खामियाँ....
ताड़मेटला नक्सली मामले में 7 मई 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण र्फैसला सुनाते हुए, 2010 के ताड़ मेटला नक्सली हमले मामले में आरोपियों को बरी करने के निचली अदालत (ट्रायलकोर्ट) के फैसले को बरकरार रखा है, हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ संदेह से परे अपराध साबित करने में विफल रहा। अदालत ने जांच में गंभीर खामियों, गवा हों के मुकरने,फॉरेंसिक रिपोर्ट की कमी और शिनाख्ती परेड न होने जैसी कमियों पर कड़ी टिप्पणी की,हाईकोर्ट ने माना है कि 76 जवानों की शहादत “गहरी त्रासदी, राष्ट्रीय चिंता का विषय है,” लेकिन कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्यों के अभाव में सजा नहीं दी जा सकती,बस्तर क्षेत्र के सुकमा में ताड़मेटला में 6 अप्रैल 2010 को हुआ नक्सली हमला भारत के इतिहास में सुरक्षा बलों पर सबसे घातक हमलों में से एक है, जिसमें सीआर पीएफ के 76 जवान शहीद हुए थे।
और अब बस......
0ममता बैनर्जी खुद ही विधानसभा चुनाव हार गई हैं।
0असम में कॉंग्रस अध्यक्ष तरुण गोगाई भी विस चुनाव हार गये हैं।
0तमिलनाडु की राजनीति में फिल्मी सितारों का प्रभाव कोई नई बात नहीं। ऍमजी रामचंद्रन और जयललिता के बाद अब थलपति विजय को लेकर चर्चा तेज़ है।
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