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मासिक छत्तीसगढ़ी सुराज के 16वें वर्ष में प्रवेश पर विशेष परिचर्चा : बस्तर में नक्सलवाद के अंत से विकास की नई बयार

Praveen Nishee Wed, May 13, 2026

रायपुर। छत्तीसगढ़ की चर्चित मासिक पत्रिका छत्तीसगढ़ी सुराज के 16वें स्थापना वर्ष में प्रवेश अवसर पर आयोजित विशेष परिचर्चा में बस्तर में नक्सलवाद के अंत और विकास की नई संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारी, वरिष्ठ पत्रकार, चिकित्सक एवं विभिन्न क्षेत्रों के बुद्धिजीवी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।

पत्रिका के प्रधान संपादक शंकर पांडे ने कहा कि प्राकृतिक सुंदरता, घने वन, जलप्रपातों और जनजातीय संस्कृति से समृद्ध बस्तर कभी शांति और सौंदर्य का प्रतीक था, लेकिन पिछले चार दशकों में नक्सलवाद ने इस क्षेत्र को हिंसा और भय के वातावरण में बदल दिया। झीरम घाटी नरसंहार, विधायक भीमा मंडावी की हत्या, दंतेवाड़ा जेलब्रेक और सीआरपीएफ जवानों की शहादत जैसी घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर दिया था।

उन्होंने कहा कि लगभग 39 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला बस्तर प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक विरासत का केंद्र है, लेकिन नक्सली गतिविधियों के कारण यहां विकास लंबे समय तक बाधित रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतने वर्षों तक बिगड़ते हालातों के लिए जिम्मेदार कौन था और क्या केवल अधिकारियों के तबादले या निलंबन से समस्या का समाधान संभव था।

परिचर्चा में वीडियो कॉल के माध्यम से जुड़े पी. सुंदरराज ने कहा कि मार्च 2026 तक बस्तर लगभग पूर्ण रूप से नक्सल मुक्त घोषित हो चुका है। उन्होंने बताया कि “विश्वास, पुनर्वास और विकास” की रणनीति के तहत लगातार चलाए गए अभियानों से अबूझमाड़ सहित अधिकांश क्षेत्रों से माओवादी कैडर समाप्त हो चुके हैं। पिछले एक दशक में 8 हजार से अधिक माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है और अब सुरक्षा शिविरों को स्कूल एवं अस्पतालों में परिवर्तित करने की योजना बनाई जा रही है।

डोमन सिंह ने कहा कि बस्तर का परिवर्तन केवल भौगोलिक बदलाव नहीं, बल्कि मानसिक क्रांति है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील नीतियों, प्रशासनिक प्रतिबद्धता और ग्रामीण सहभागिता ने बस्तर को नई दिशा दी है। अब बस्तर बंदूक नहीं, बल्कि शिक्षा, शांति और विकास की पहचान बन रहा है।

वरिष्ठ पत्रकार प्रियंका कौशल ने कहा कि लगभग चार दशकों के नक्सली आतंक से मुक्ति मिलना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए राहत और खुशी की बात है। अब बस्तर में विकास की नई इबारत लिखी जा रही है और आम लोग भयमुक्त जीवन की ओर बढ़ रहे हैं।

वरिष्ठ पत्रकार विशाल यादव ने कहा कि अब वह समय आ गया है जब नक्सलवाद का नासूर समाप्त होता दिखाई दे रहा है। बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और रहस्यमयी पहचान अब देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करेगी।

वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जावेद अली खान ने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने से अब बस्तर में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और निजी अस्पतालों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त होगा। वहीं सीए रवि ग्वालानी ने कहा कि बस्तर की वनोपज, दुर्लभ जड़ी-बूटियों, उद्योग और पर्यटन क्षेत्र को अब नई गति मिलेगी, बशर्ते सरकार ईमानदारी से प्रयास करे। कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन विशेष संवाददाता अनिल साखरे ने किया।

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