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: सांसों की बीमारी में भ्रामरी एवं ओम का अभ्यास विशेष फायदेमंद, भ्रामरी एवं ओम पर शोध,अंतर्राष्ट्रीय मेडिकल जनरल में प्रकाशित हुआ:- योगाचार्य उपाध्याय

Admin Tue, Mar 26, 2024

मनेन्द्रगढ।एमसीबी।  इन दिनों सांस से संबंधित बिमारियां बहुत तेजी से बढ़ रही है बुजुर्ग के अलावा युवाओं में भी सांस फूलने के लक्षण दिखने लगे हैं यह बीमारी सामान्य रूप से अस्थमा और सीओपीडी ( क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पलमोनरी डिजीज)) के नाम से जाना जाता है लिए योग और प्राणायाम विशेष उपयोगी होते हैं-उक्ताशय के विचार, वरिष्ठ योगाचार्य एवं जिला पतंजलि योग समिति के जिलाध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने एक मुलाकात में व्यक्त किया। श्री उपाध्याय ने कहा कि एक बार अस्थमा(दमा)हो जाए तो बहुत जीवन बहुत मुश्किल और बोझ लगने लगता है। उन्होंने बताया कि वे पिछले 17 वर्षों में योग क्या रहें हैं विभिन्न रोगी इससे लाभान्वित हुए हैं। उन्होंने एम्स नई दिल्ली के विशेषज्ञ के शोध का हवाला देते हुए कहा कि भ्रामरी प्राणायाम और ओम उदगीत के अभ्यास से एवं प्राणायाम करके इस बीमारी से निजात पाया जा सकता है । उन्होंने बताया कि पीडियाट्रिक और फिजियोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने अस्थमा पीड़ित बच्चों पर यह शोध किया है । इसमें आठ से 15 वर्ष की उम्र के बच्चे शामिल थे । पीडियाट्रिक विभाग के अनुसार अस्थमा ग्रस्त बच्चों को भ्रामरी और ओम का जाप करनेवाले बच्चों को आशातीत लाभ हुआ। अस्थमा के लक्षणों की जानकारी देते उन्होंने कहा कि अस्थमा में श्वास नाली में सिकुड़न और सूजन आने से सांस अवरुद्ध होने लगती है एवं सांस फूलने लगती है शोध में यह पाया गया कि भ्रामरी और ओम का जाप करने वाले बच्चों में तेजी से और ज्यादा सुधार हुआ। प्रदूषण को अस्थमा जैसी बीमारियों का कारण बताते हुए श्री उपाध्याय ने बताया कि यह शोध अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जनरल (जनरल ऑफ़ अस्थमा)में प्रकाशित हुआ है। भ्रामरी एवं ओम के लाभ योग एवं प्राणायाम के चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भ्रामरी के नियमित अभ्यास से मन शांत हो जाता है। एकाग्रता बढ़ती है अवसाद में राहत मिलती है। शरीर में आक्सीजन का लेबल का स्तर भी बढ़ जाता है।ॐ के अभ्यास से मस्तिष्क के विकारों में भी लाभ होता है लोग प्रतिरोधक क्षमता में विकास होता है। इसे अनुभवी योगाचार्य के परामर्श से विधिवत करना चाहिए। श्री उपाध्याय ने बताया कि पतंजलि योग समिति द्वारा स्थानीय शिशु मंदिर के खेल प्रांगण में प्रातः 6:00 बजे से योग एवं प्राणायाम के सत्र लगाए जा रहे हैं ।

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