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धान की फसल के लिए हरी खाद सर्वोत्तम विकल्प- श्री पैकरा (डी डी ए ) : रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में हरी खाद को बढ़ावा, 176 हेक्टेयर में विस्तार का लक्ष्य

Praveen Nishee Thu, Apr 23, 2026

मनेंद्रगढ़। एमसीबी। जिले में मृदा उर्वरता बढ़ाने एवं धान उत्पादन में वृद्धि के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा खरीफ सीजन में हरी खाद एवं जैव उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान प्रारंभ किया गया है। विभाग का मानना है कि रासायनिक उर्वरकों के लगातार उपयोग से मिट्टी में जीवांश पदार्थ एवं लाभदायक सूक्ष्म जीवों की संख्या में कमी आ रही है, जिससे मृदा की उर्वरता और फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

जिले के अधिकांश कृषक रोपा पद्धति से धान की खेती करते हैं। ऐसे में रोपाई से पूर्व खेतों में हरी खाद जैसे ढैंचा, सन एवं अन्य शीघ्र वृद्धि करने वाली दलहनी फसलों की बुवाई कर उन्हें निश्चित अवस्था में मिट्टी में मिलाने से मृदा में जैविक तत्वों की वृद्धि होती है। यह प्रक्रिया वातावरण से नाइट्रोजन स्थिरीकरण के साथ-साथ मृदा की निचली परतों से फॉस्फोरस एवं पोटाश को ऊपर लाकर मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार ढैंचा एक प्रभावी हरी खाद है, जिससे प्रति हेक्टेयर लगभग 30 से 40 किलोग्राम तक नाइट्रोजन प्राप्त हो सकती है। इसकी बुवाई खेती प्रारंभ होने से 35 से 45 दिन पूर्व की जाती है। जब फसल 2 से 3 फुट की ऊंचाई प्राप्त कर ले, तब इसे खेत में पलट देने पर यह एक सप्ताह के भीतर सड़-गलकर प्राकृतिक खाद में परिवर्तित हो जाती है, जिससे फसल को आवश्यक पोषण मिलता है और उत्पादन में वृद्धि होती है। जिले में हरी खाद के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु कुल 176 हेक्टेयर क्षेत्र का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें विकासखंड मनेन्द्रगढ़ के लिए 62 हेक्टेयर, खड़गवां के लिए 52 हेक्टेयर तथा भरतपुर के लिए 62 हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया गया है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को हरी खाद के लिए बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराया जाएगा। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे इस योजना का लाभ उठाने के लिए अपने क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क करें और मृदा स्वास्थ्य सुधार के साथ बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करें।

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