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19th June 2026

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कुछ देर की ख़ामोशी है,फिर शोर आएगा.... तुम्हारा सिर्फ वक़्त आया है, हमारा दौर आएगा....

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वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे की कलम से..*(कॉलम 21 सालों से लगातार) : कुछ देर की ख़ामोशी है,फिर शोर आएगा.... तुम्हारा सिर्फ वक़्त आया है, हमारा दौर आएगा....

Praveen Nishee Fri, Jun 19, 2026

छग की राजधानी रायपुर में अचानक सियासी अटकलों का दौर उस समय तेज हो गया जब सभी मंत्री,सीएम आवास पहुंचने लगे। सीएम के अचानक मिले निर्देश से कई मंत्री कार्यक्रम रद्द कर रायपुर पहुंचना पड़ा है।बैठक में मंत्रियों के अलावा संगठन प्रमुख अजय जमवाल, राम प्रताप सिंह की भी मौजूदगी आगामी दिनों में कुछ बड़े बदलाव की औऱ संकेत दे रही है। वैसे भी 4-5 मंत्रियों को ड्राप करने की चर्चा तेज है! इधर दावा किया जा रहा है कि बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई है। जिसमें सत्ता संगठन में तालमेल, मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा, छ्ग में क़ानून व्यवस्था की स्थिति सहित कुछ मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा भी हुई.....?जानकारी के अनुसार बैठक में सरकार के ढाई साल के कार्यकाल की समीक्षा की गई, आगामी ढाई साल की कार्ययोजना पर चर्चा हुई। विभिन्न विभागों से सुझाव लिए गये । साथ ही सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल को लेकर विचार- विमर्श किया गया। बैठक में मंत्री केदार कश्यप, गुरु खुश वंत साहेब, लक्ष्मी राजवाड़े, दयालदास बघेल सहित कई मंत्री शामिल हुए। अलावा उपमुख्यमंत्री अरुण साव, विजय शर्मा, मंत्री टंकराम वर्मा, लखनलाल देवांगन और श्याम बिहारी जायसवाल भी बैठक में पहुंचे थे, दरअसल पिछले कई दिनों से मंत्रिमंडल में फेरबदल की भी चर्चा चल रही थी। ऐसे में सीएम की अचानक बुलाई गई बैठक को लेकर कई तरह के सियासी कयास लगाए जा रहे हैं।मिली जानकारी के अनुसार, सीएम आवास पर दो दिन पहले भी कुछेक मंत्रियों की बैठक हो चुकी है।इस दौरान कई अहम मुद्दों को लेकर चर्चा की गई थी। इस दौरान सीएम ने कई मुद्दों पर गंभीरता से विचार कर काम करने की सलाह दी थी। सीएम द्वारा अचानक बुलाई गई बैठक को लेकर सियासी अटकलें तेज हो गई है। बैठक को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं।

दूसरा विश्वयुद्ध जीतने

की क्षमता बस्तर में...दंतेवाड़ा के बैलाडिला खदान से जापान लौह अयस्क की आपूर्ति होती है। खबर है कि 11वीं शताब्दी में ही दक्षिण के चोलवंशीय राजाओं ने बैलाडिला की पहाडिय़ों से लोह अयस्क का दोहन कर अस्त्र-शस्त्र बनाने का कार खाना खोल रखा था। मतलब बैलाडिला में लोहे की उपलब्धता की जानकारी बस्तर के आदिवाासियों को थी और पत्थरों से लोहा निकालने की तकनीक से वाकिफ थे। लोहा निकालने के उस समय के औजार विधि,लोहा निर्मित कलाकृतियों से अभी भोपाल के मानव संग्रहालय में साक्षात्कार किया जा सकता है। 19 वीं सदी में ख्याति प्राप्त भूगर्भ शास्त्री ने बैलाडिला में लौह खनिज की खोज करने पहुंचे थे,1933- 34 में जियो लाजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के क्रुक शॉक ने सर्वेक्षण कर भूगर्भीय मानचित्र बनाया था, 14 पहाड़ी क्षेत्रों (भंडारों- डिपाजिट) को चिन्हित किया था। भारत में लौह अयस्क पर अध्ययनरत टोक्यो (जापान) विश्व विद्यालय के प्रो.एउमे उरा ने बैलाडिला में उच्चकोटी लौहअयस्क की उपलब्धता से अवगत कराया था। 1960 में भारत सर कार और जापानी इस्पात मिलों के संग ठन के मध्य अनुबंध के तहत बैला डिला से 40 लाख टन औऱ किरिवूरू (उड़ीसा) से 20 लाख टन कच्चे लोहे का निर्यात जापान में किया जाना तय हुआ।दरअसल बैलाडिला में मिलने वाला लौह अयस्क 'फ्लोर ओर' कहलाता है जो सतह पर ही मिलता है, बैलाडिला से समीपस्थ बंदरगाह विशाखापट्नम जोडने के लिये 448 किलोमीटर लंबे रेलमार्ग का निर्माण किया गया। 87 बड़े- बड़े पुल, 8 डिग्री की मोड़ लिये कुल 150 फीट ऊंचे खंबे बने, 1236 छोटे पुलिये, 14 किमी लंबी सुरंगेँ , 1962 में बननी शुरू हुई,1964 में 55करोड़ की लागत से बन गई।आज बनती तो 5500 करोड़ खर्च होना तय था।विशाखा पट्टनम में जापान के जहाज लंगर डाल कर खड़े होते थे। किरंदुल से रेलगाड़ी पहुंचती थी,जहाज की गोदी में ही लौह अयस्क उलट दिये जाते थे। बाद में एस्सार वाले बैलाडिला लौह अयस्क को चूर्ण रूप में (पानी के साथ) पाईप लाईन माध्यम से विशाखापट्टनम पहुंचाने में सफल रहे पर कभी कभी नक्सलवाद के समर्थक इस पाईप लाईन को अवरूद्ध कर देते थे,एकजापानी प्रतिनिधि मंडल 1964 के आसपास बैलाडिला आया था वहां के लौह अयस्क के उच्च स्तर को देख कहा था... इन पहाडिय़ों में यदि एक भी पहाड़ी हमारे जापान में होती तो हम दूसरा विश्वयुद्ध नहीं हारते..इसका मतलब तो यही है बस्तर में विश्वयुद्ध जीतने के संसाधन मौजूद हैं...।

बिजली मॅहगी,अपना

पावर हॉउस क्यों नहीं!साय सरकार द्वारा बिजली की दर पाँचवी बार बढ़ाने, भूपेश सरकार द्वारा 400 यूनिट की खपत 50% की छूट समाप्त करने तथा नया स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर कॉंग्रेस हमलावर है, छ्ग में कोयला, पानी हमारा है फिर बिजली मॅहगी क्यों...? छ्ग विधुत मंडल में आईएएस अध्यक्ष बनना ही सरकार विकल्प मानती है, मण्डल के रिटायर इंजिनियर को क्यों मौका नहीं दिया जाता, पहले सीएम तथा आईएएस अजीत जोगी ने रिटायर इंजिनियर गोपाल तिवारी को अध्यक्ष बनाया था औऱ वे ज़ब हटे तो 1200 करोड़ की एफडी छोड़ गये गये थे 2002-3 में,इसके कुछ सालों तक लगातार विधुत मण्डल घाटे में बताकर बिजली महंगी की जाती रही है। आज छ्ग ntpc से 1₹ महँगी बिजली खरीदती है, निजी बिजली भी मॅहगी ही पड़ती है, पर छ्ग सरकार खुद का पॉवर हॉउस क्यों नहीं लगाती है...? छ्ग में कोयला है, पानी है,बिजली उत्पादन की पूरी क्षमता है। छ्ग सरकार कहती है कि पैसा नहीं है, चुनाव जीतने महतारी वंदन योजना के लिये पैसा है.. ? इधर लाईन लास भी 15 -16% जबकि गुज रात में यह 3% है....सरकार को अपना पावर हॉउस स्थापित करना ही होगा।

रायपुर और नवा रायपुर

अब जुड़ेंगे...नया-पुराना रायपुर अब दोनों आपस मेंमिलकर एक विशाल महानगर (मेट्रोपोलिस) के रूप में विकसित हो रहे हैं। सरकार की 'कनेक्टिंग टाउन' योजना, नए मास्टर प्लान के तहत दोनों के बीच के खाली क्षेत्रों को तेजी से विकसित कर बसाया जा रहा। ₹735 करोड़ की परियोजना का मुख्य उद्देश्य रायपुर - नवा रायपुर के बीच की लगभग 25 किलोमीटर की दूरी और खाली स्थानों को खत्म करना है। इसके तहत एक्सप्रेस वे और आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर का जाल बिछाया जा रहा है।रायपुर का नया मास्टर प्लान 30 से 35 लाख की आबादी औरअगले 25-30 सालों की जरूरतों को ध्यान में रख कर बनाया गया है। दोनों शहरों के बीच के क्षेत्रों कोरेजिडेंशियल, लॉजिस्टिक,एजुकेशनल हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। दोनों शहरों के बीच यातायात को आसान बनाने एक्सप्रेस वे के साथ- साथ मेमू ट्रेनें भी चलाई जा रही हैं और नए रेलवे स्टेशनों का निर्माण भी किया जा रहा है, मंत्रियों के बंगले, विधान सभा, प्रशासनिक कार्यालय नवा रायपुर में शिफ्ट हो चुके हैं,जिससे दोनों शहरों के बीच की बसाहट बहुत तेजी से बढ़ रही है।

औऱ अब बस....

0 सीएम की अचानक बुलाई गई बैठक में गृहमंत्री विजय शर्मा को झारखण्ड दौरा रद्द कर आने को क्यों कहा गया?

0छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान में राहुल गाँँधी के 21 जून को आने की चर्चा है।रायपुर में जिला, शहर कांग्रेस अध्यक्षों का मेगा ट्रेनिंग कैंप 21 जून से अभनपुर में शुरू होगा।

0भीषण गर्मी में एक महीने के भीतर छ्ग में 200 से अधिक ट्रांसफार्मर बदलने पड़े हैं, जिनमें से 100 अकेले रायपुर के है।

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