12वें वेतन समझौते के लिए 10अगस्त को कोल इंडिया की इकाइयों में प्रदर्नज : ज्वाइंट बाईपार्टाइट कमिटी के तत्काल गठन की मांग, कोयला मजदूर पंचायत ने किया आंदोलन का आह्वान
मनेंद्रगढ़। एमसीबी। कोयला मजदूरों के 12वें वेतन समझौते की प्रक्रिया शुरू कराने और ज्वाइंट बाईपार्टाइट कमिटी फॉर कोल इंडस्ट्री (JBCCI) के तत्काल गठन की मांग को लेकर कोयला मजदूर पंचायत संबद्ध हिंद मजदूर सभा आगामी 10 अगस्त 2026 को साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के सभी क्षेत्रों में क्षेत्रीय महाप्रबंधक कार्यालयों के समक्ष प्रदर्शन करेगी।
इस संबंध में कोयला मजदूर पंचायत की ओर से साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक को सूचना दे दी गई है।
हिंद मजदूर सभा के माध्यम से देश के खनन उद्योग के लिए गठित हिंद खदान मजदूर फेडरेशन के राष्ट्रीय सहायक महामंत्री अख्तर जावेद उस्मानी ने बताया कि 22 जुलाई 2026 को चार राष्ट्रीय मजदूर संगठनों की ऑनलाइन बैठक में लिए गए निर्णय तथा हिंद मजदूर सभा के राष्ट्रीय महामंत्री हरभजन सिंह सिद्धू के निर्देशानुसार कोल इंडिया लिमिटेड की सभी अनुषंगी कंपनियों में क्षेत्रीय महाप्रबंधक कार्यालयों के समक्ष संयुक्त मोर्चे के प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं।
“प्रबंधन को मजदूरों की अवस्था और व्यथा की ओर ध्यान देना होगा”
उस्मानी ने कहा कि कोयला मजदूर पंचायत ने सभी कोयला श्रमिकों से 10 अगस्त को होने वाले प्रदर्शन में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन की “बेपरवाह नींद” को तोड़कर कोयला मजदूरों की समस्याओं और उनके अधिकारों की ओर ध्यान आकर्षित करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि 12वां वेतन समझौता कोयला श्रमिकों के लिए बड़ी चुनौती है। यदि समय रहते मजदूर अपनी एकजुटता और दृढ़ संकल्प का परिचय नहीं देंगे तो नए लेबर कोड के माध्यम से श्रमिकों की सुविधाओं में कटौती की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
12 सितंबर को रांची में राष्ट्रीय सम्मेलन
उन्होंने बताया कि 10 अगस्त के प्रदर्शन के बाद आगामी 12 सितंबर 2026 को रांची में कोयला मजदूरों का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन में आगे के आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।
अख्तर जावेद उस्मानी ने कहा कि चारों राष्ट्रीय मजदूर संगठनों ने फिलहाल एक प्रमुख मांग—JBCCI के तत्काल गठन को लेकर संयुक्त रूप से प्रदर्शन का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि 10 अगस्त का प्रदर्शन सफल रहा तो यह आने वाले समय में कोयला मजदूरों के बड़े आंदोलन की मजबूत बुनियाद बनेगा।
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