समय-सीमा बैठक में कलेक्टर ने बढ़ाई जवाबदेही : लापरवाही पर चेतावनी, परिणाम आधारित प्रशासन पर जोर
Praveen Nishee Tue, Apr 28, 2026
मनेंद्रगढ़। एमसीबी। कलेक्टर कार्यालय के सभा कक्ष में आयोजित समय-सीमा समीक्षा बैठक इस बार केवल विभागीय प्रगति की औपचारिक समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि जिले में विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति, जवाबदेही और परिणाम आधारित प्रशासनिक कार्य संस्कृति को लेकर एक निर्णायक संदेश देने वाला मंच साबित हुई। कलेक्टर डी. राहुल वेंकट की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में प्रशासनिक अमले को स्पष्ट शब्दों में यह संदेश दिया गया कि अब योजनाओं की सफलता फाइलों में नहीं, बल्कि जनता के जीवन में दिखाई देनी चाहिए।
कलेक्टर ने दो टूक कहा- “सरकारी योजनाएं कागजों में पूरी दिखना पर्याप्त नहीं है, उनका असर जमीन पर और अंतिम व्यक्ति तक दिखना चाहिए। जब तक लोगों को वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा, तब तक हमारी जिम्मेदारी अधूरी है।”
लापरवाही, देरी और बहानेबाजी पर सख्त रुख
बैठक के दौरान ट्राइबल, माइनिंग, फिशरीज, पशुपालन, रेशम, शिक्षा, उद्यानिकी, श्रम, खनिज, आबकारी, स्वास्थ्य एवं राजस्व विभागों की समीक्षा में कई योजनाओं के लंबित या अप्रारंभ होने पर कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर की। ट्राइबल मद अंतर्गत वर्ष 2025-26 के लंबित कार्यों और ले-आउट प्रकरणों पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्य प्रारंभ करने के निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि अगली समीक्षा में प्रगति नहीं मिलने पर जवाबदेही तय होगी।
“हर परियोजना लोगों की उम्मीदों से जुड़ी है”
सुन्दरपुर राजस्व ग्राम, नालंदा परिसर, वृद्धाश्रम, बंजी, झगराखांड सहित विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि प्रत्येक निर्माण कार्य जनता की सुविधा और विश्वास से जुड़ा है, इसलिए गुणवत्ता और समयसीमा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
स्वच्छता पर सख्ती, तय हुई समय सीमा
खुले में शौच मुक्त लक्ष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कलेक्टर ने सीईओ खोंगापानी को 15 दिनों तथा सीईओ भरतपुर को 20 दिनों के भीतर नवीन शौचालय निर्माण पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल योजना नहीं, बल्कि सम्मान और स्वास्थ्य का विषय है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण पर विशेष जोर
विद्यालयों में समर कैंप को प्रभावी बनाने, 4 मई के जिला स्तरीय कार्यक्रम की व्यापक तैयारी, आयुष्मान भारत योजना, कुपोषण मुक्ति, पेंशन योजनाएं, वन अधिकार पट्टा, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और जल जीवन मिशन जैसे विषयों पर विस्तृत समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि जनता को बुनियादी सुविधाओं के लिए भटकना नहीं चाहिए।
मनरेगा, किसान और युवाओं के लिए स्पष्ट विजन
मनरेगा के तहत हर पात्र परिवार को जॉब कार्ड, किसानों के लिए किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, मृदा स्वास्थ्य कार्ड तथा युवाओं के लिए कौशल विकास, मुद्रा योजना और स्वरोजगार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।
हर गांव तक विकास की मूलभूत संरचना पहुंचाने का लक्ष्य
कलेक्टर ने कहा कि विकास की वास्तविक तस्वीर गांवों में दिखनी चाहिए। हर गांव में आंगनबाड़ी, स्कूल, स्वास्थ्य सुविधा, सड़क, बिजली और इंटरनेट जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
फील्ड विजिट बढ़ाने और जनता से संवाद के निर्देश
बैठक के अंत में कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को नियमित फील्ड विजिट, जनसंवाद और मौके पर समस्याओं के समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि “जो अधिकारी अच्छा काम करेंगे, उन्हें प्रोत्साहन मिलेगा और जो लापरवाही करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।”
परिणाम आधारित प्रशासन की ओर बढ़ता एमसीबी
यह बैठक प्रशासनिक व्यवस्था को स्पष्ट संकेत देती है कि अब जिले में विकास की प्राथमिकता केवल लक्ष्यपूर्ति नहीं, बल्कि वास्तविक प्रभाव, पारदर्शिता और जनता की संतुष्टि होगी।

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