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: पहली लोस के सदस्य रहे रेशमलाल जांगड़े अपने ही छ्ग में उपेक्षित क्यों ….?

Admin Mon, Apr 1, 2024

छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास में एक नाम रेशमलाल जांगड़े का भी है।जांगड़े आजाद भारत की पहली लोकसभा में सांसद थे,संविधानसभा के सदस्य, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, समाज सुधारक भी थे,इतना ही नहीं विधायक,मंत्री भी रहे हैं। इतनी उपलब्धियां होने के बावजूद भी इस महान विभूति के परिजन उनके सम्मान की लड़ाई लड़ने के लिए मजबूर हैं! रेशमलाल जांगड़े के बेटे हेमचन्द्र ने कुछ समय पहले में अपने पिता पर ही पीएच डी की है,वह चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ की अगली पीढ़ी भी उनके पिता के बारे में जाने ,क्योंकि ना तोकिसी पाठ्यपुस्तक में उनके बारे में जानकारी है और ना ही चौक-चौराहे का नाम ही रेशमलाल जांगड़े पर रखा है।रेशमलाल का विवाह कमलाजी से हुआ उनके 3 पुत्र ललित,जय दीप हेमचंद,2पुत्री दुर्गा संध्या थी।1950 से 1952 में मनोनीत सांसद थे1952-1957सांसद(कांग्रेस)1957 से 1962 सांसद (कांग्रेस)1962से 1967विधायक(कांग्रेस)1972 से1977विधायक (निर्द)1985 से 89 विधायक (भाजपा)89 से 91सांसद (भाजपा)रहे।वे 30 वर्ष तक राजनीति के शिखर पर रहे।पं.जवाहर लाल नेहरू से राजीव गांधी के कार्यकाल तक सांसद रहे।मध्यप्रदेश सरकार में उपमंत्री के रूप में अपनी सेवाऐं दी। विस में उपनेता भी रहे।लोकसभा की 60 वीं वर्ष गांठ पर 13 मई 2012 को संसद के केन्द्रीय कक्ष दिल्ली में पहली लोक सभा के जिन 4 सदस्यों का अभिनंदन किया गया था,उसमे रेशमलाल जांगडे, रिशांग किशिंग, सुब्रमणियम और कांते मोहन राव भी शामिल थे।कहा जाता है कि मनोहर दास नृसिंह के साथ गांव- गांव भ्रमण करते गुरू घासीदास के सतनाम संदेश और उपदेशों के प्रचार प्रसार में भी बड़ा योगदान दिया,मनोहर नृसिंह,रेशम लाल जांगडे ने मिलकर ही गिरौधपुरी मेला की शुरूआत की थी गिरौद पुरी समग्र सतनामी समाज के धार्मिक स्थल, सच्ची आस्था एवं श्रद्धा के केंद्रबिन्दु के रूप में स्थापितहै,गिरौदपुरी,धाम के रूप में बन चुका है।छत्तीसगढ सरकार की ओर से कुतुब मीनार से उंचा जैतखाम निर्मित किया गया है जो विश्व मानस समुदाय के लिये आकर्षक और पर्यटन का केन्द्र बन गया है। जहां प्रति वर्ष लाखों लोग पहुंच कर स्वयं को धन्य मानते हैं।जांगड़ेजी ने जीते जी अपने सपनों को साकार होते देखा है।इसी प्रकार सर्वसमाज, सत नामी समाज के सतपथ प्रदर्शक,प्रेरक रहे हैं। रेशमलाल जांगडे 90 साल की उम्र में 10-11 अगस्त 2014 को रात 2 बजे जीवन की अंतिम सांस ली।उनके संघर्ष, योगदान को चिर स्थायी बनाने कोई सार्वजानिक स्थल का नामकरण रेशम लाल जांगड़े के नाम करना उनके प्रति सच्चा सम्मान होगा।

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