छत्तीसगढ़ का एक बड़ा हिस्सा आदिवासी समुदायों से भरा पूरा है। यहाँ आदिवासी संस्कृति अत्यंत प्राचीन और विविधतापूर्ण है। आदिवासी जीवन में प्रकृति के साथ एक गहरा संबंध है। वे प्रकृति के प्रति अपनी श्रद्धा, आदर- भाव को अपने नृत्य,गीत,रीति -रिवाजों के माध्यम से व्यक्त करते हैं। छग के आदिवासी समुदायों में बस्तर का विशेष महत्व है।बस्तर का आदिवासी जीवन, यहाँ लोककला, नृत्य और संगीत में गहराई से रचा -बसा हुआ है।आदिवासी की जीवनशैली, उनके पहनावे, खान-पान, रीति-रिवाजों में भी पारंपरिक जीवनशैली की झलक मिलती है। ये समुदाय प्रकृति पूजा, सामूहिक खेती, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को अपनाते हैं। आदिवासी संस्कृति विशेष रूप से प्रसिद्ध है। दशहरा उत्सव, 75 दिनों तक चलता है, उत्सव, आदि वासी परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं का अनूठा संगम है, माँ दंतेश्वरी की पूजा, रथ यात्रा प्रमुख हैं मिश्रित वन, वन्यजीव प्रकृतिक गुफाओँ, जलप्रपात की देश ही नहीं दुनिया में चर्चा है। यहां की काष्ठ कला, मेहनती लोग, नक्सली सक्रियता के चलते सालों से परेशान थे, नक्सली और सुरक्षा बलोँ के बीच पिस रहे थे, सदाबहार जंगलोँ की स्वच्छँद हवा में बारूदी सुगंध फ़ैल गई थी, नक्सली उन्मूलन के बाद चैन की सांस तो ले पाएंगे।
नक्सल समस्या करीब-
करीब समाप्त.....
देश सहित छत्तीसगढ़ में करीब 5 दशकों से सक्रिय नक्सली समस्या करीब करीब समाप्त हो ही गई है।सूत्रों की मानेँ तो "साल 1972 में थाना भोपाल पटनम क्षेत्र में नक्सल गतिविधि हुई, 7 फरवरी 1972 को ग्राम पोगल में 1 माओवादी सहयोगी को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। बाद में 18 नवंबर 1974 को थाना उसूर के ग्राम पोलमपल्ली में अज्ञात माओवादियों द्वारा एक ग्रामीण के घर में डकैती की घटना को अंजाम दिया गया। घटनाएं इस क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों की शुरुआती झलक मानी जाती हैं। अब नक्सली खात्मे की बात कर लेँ...,2014 में देश में 126 माओवादी प्रभावित जिले थे पऱ 31 मार्च 2026 के बाद 2 नक्सली प्रभावित आंशिक जिले बचे हैँ, छग के बीजापुर, सुकमा (बस्तर ) शामिल हैं।पिछले 6 साल में सरकार की कामयाबी नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई का असर साफ दिखाई दे रहा है।पिछले 6 वर्षों में बड़ी संख्या में नक्सलियों ने या तो आत्मसमर्पण किया है या उन्हें गिरफ्तार किया गया है।1 जनवरी 20 20 से 31 जनवरी 2026 तक आंकड़ों पर नजर डालें तो, 4340 नक्सलियों ने सरेंडर किया, 3644 नक्सलियों को गिरफ्तार किया, इस दौरान ही सुरक्षाबलों ने 666 नक्सलियों को मार गिराया, सरेंडर करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास पर सरकार खास ध्यान दे रही है,अबतक 2937 माओवादियों का पुनर्वास किया जा चुका है, इनमें 14 96 इनामी नक्सली और 1441 बिना इनाम वाले नक्सली शामिल हैं। इनामी नक्सलियों के पुनर्वास पर सरकार ने कुल 5 करोड़ 64 लाख ₹ खर्च किये हैँ। चलाये अभियान में फोर्स की मुस्तैदी के कारण पिछले साल कई बड़े नक्सल लीडर्स ने अपने हथियार डाले हैं। दूसरी ओर जिन लीडर्स ने विचारधारा को जिंदा रखने के लिए फोर्स के सामने चुनौती बनने की भी कोशिश की वो मिट्टी में मिल चुके हैं,साल 2026 की डेड लाइन से पहले ही नक्सलियों की मांद को फोर्स ने उखाड़ फेंका। टॉप,माओवादियों का खात्मा हुआ है प्रभाकर,दिलीप बेडजा,कोसा मंडावी, माड़वी हिडमा,माडवी देवा,पोडियम गंगी,सोढ़ी गंगी, राजू देवा उर्फ़ कट्टा रामचंद्र रेड्डी, कोसा दादा उर्फ़ कादरी सत्य नारायण रेड्डी, बालकृष्ण उर्फ़ मनोज बालन्ना, बसवा राजू और जयराम आदि प्रमुख हैं।
अमित शाह पऱ गलत
बयानी का आरोप....
छ्ग के पूर्व सीएम भूपेश बघेल का कहना है,गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में झूठ बोला,कांग्रेस की सरकार ने मदद नहीं की। चुनौती है कि अमित शाह, मंच, स्थान और समय तय कर लेँ,बहस के लिये तैयार हूं।लेकिन प्रदेश को और देश को गुमराह नहीं करना चाहिये। झूठ पऱ झूठ बोलते जा रहे है। नक्सलवाद के मामले में कांग्रेस का स्टैण्ड स्पष्ट रहा है। हमारी सरकार ने कांग्रेस नीति के अनुरूप काम किया, राजनैतिक,सामाजिक आर्थिक रूप से आदिवासियों को सम्पन्न बनाया। वन अधिकार पट्टे दिये, स्कूल खोले, इलाज की व्यवस्था की, पीडीएस दुकानेँ खोली ,राशनकार्ड दिये ,भाजपा सरकार ने इसे महरूम रखा था, वंचित रखा था। पूर्व सीएम ने कहा कि हमारी सरकार ने काम किये, नक्सल मोर्चे पर दो तरह की रणनीति अपनाई,बस्तर आदिवासियों का विश्वास अर्जित करना, जैसे-जैसे नक्सलवादी पीछे हटते गये वहां विकास कार्य किये। लोगोँ का विश्वास बढ़ा और मुख्यधारा में लोग लौटे। नक्सलवाद पीछे हटा, 600 गांव हमने खाली कर वाया।भूपेश बघेल ने कहा कि अमित शाह से पूछना चाहता हूं कि शाह ने घोषणा की थी कि जो गांव नक्सलवाद मुक्त होगा उस गांव को 1 करोड़ ₹ देगें। नक्सलवाद समाप्त हो गया हैं...? तो अमित शाह बताये बस्तर के प्रत्येक गांव में 1 करोड़ ₹ कब देंगे....? शाह लगातार झूठ बोल रहे है,बस्तर में डीआरजी जवान शहीद हुये उन्हें छग सरकार ने ही नियुक्त किया था, उन्हीं के बदोलत,ताकत, शहादत से ही नक्सलवाद आखिरी सांसे ले रहा है। शाह उनके ही बलिदान को नकार रही। 5 साल से जो जवान शहीद हुये उनका अपमान कर रहे है। आंकड़े निकाल कर देख लें, कितने जवान शहीद हुये, कितने मोर्चे में हमने लड़ाई लड़ी, कितने जगह हमने नये कैंप खोले, कितने पीडीएस की दुकाने, स्कूल,आंगनबाड़ी खोले और सड़केँ बनाई.....
अमित जोगी को
बड़ा झटका.....
छग के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्या कांड में हाईकोर्ट ने पूर्व सीएम अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को दोषी करार दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने 3 सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है, सीबीआई के साक्ष्य को स्वीकार कर फैसला सुनाया है। फैसले पर अमित जोगी ने कहा कि हाईकोर्ट ने बिना सुनवाई का मौका दिए उन्हें दोषी ठहरा दिया,अप्रत्याशित है। कहा, उनके साथ अन्याय हुआ है। सुनवाई के दौरान ही सतीश जग्गी ने कोर्ट को बताया कि पिता की हत्या राजनीतिक साजिश के तहत कराई गई थी। सीबीआई ने 11 हजार पन्नों की चार्जशीट पेश की थी, जिसमें हत्या से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य शामिल हैं।
भाजपा के चंदे में
171% की वृद्धि ...
एसोसिएशन फॉर डेमो क्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने राजनीतिक दलों के चंदे पर नई रिपोर्ट जारी की है। 20 24-25 में राष्ट्रीय दलों को मिलने वाले चंदे में जबरदस्त उछाल आया है। पिछले साल के मुकाबले इसमें 161% की बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। इस चंदे का बड़ा हिस्सा सत्तारूढ़ भाजपा के खाते में गया है। भाजपा को मिला चंदा अन्य सभी राष्ट्रीय दलों के चंदे से 10 गुना अधिक है…? जारी रिपोर्ट ने राजनीतिक फंडिंग की पूरी तस्वीर साफ कर दी है। कुल 11,343दानदाताओं ने राष्ट्रीय दलों को 20 हजार ₹ से अधिक का दान दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा को 6,074.01 करोड़ चंदा मिला। यह राशि 5,522 दान दाताओं से प्राप्त हुई,पिछले वित्तवर्ष की तुलना में भाजपा के चंदे में 171% की वृद्धि हुई। 2023-24 में तो भाजपा को 2,243.94 करोड़ मिले थे। आंकड़ा बढ़कर 6 हजार करोड़ के पार पहुँच गया है। भाजपा का यह चंदा कांग्रेस, आप, माकपा के कुल चंदे से भी कई गुना ज्यादा है।आंकड़े भाजपा की मजबूत वित्तीय स्थिति दर्शाते हैं,कांग्रेस के चंदे में भी इस साल बढ़ोतरी देखी गई है। कांग्रेस को वित्त वर्ष 2025 में 517.39करोड़ ₹ का चंदा प्राप्त हुआ। पिछले साल के 281.48 करोड़ ₹ से 84 % अधिक है।आमआदमी पार्टी को 27.04 करोड़ चंदा मिला है। चंदे में 244% की बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है।वहीं नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपी पी) को 1.94 करोड़ का चंदा मिला। एनपीईपी को चंदे में 1,313% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है।
छत्तीसगढ़ भाजपा को
कारपोरेट जगत से 76 करोड़ चंदा.....?
छग जैसे प्रकृतिक संसाधनों से भरपूर छोटे राज्य में मप्र से अधिक,राजस्थान के आस- पास चंदा मिला। छ्ग के जल, जंगल, जमीन को सौँपने की चर्चा तेज हैं।एडीआर रिपोर्ट के मुताबिक छ्ग को पिछले वित्तीय वर्ष में 76 करोड़ 29 लाख चंदा भाजपा को मिला था, कांग्रेस को मात्र 27 लाख ही मिल सका था।राजस्थान भाजपा को 87 करोड़ 51 लाख, कांग्रेस को 25 करोड़, मप्र भाजपा को 54 करोड़ 53 लाख तो भाजपा को 1 करोड़ 34 लाख चंदे के रूप में मिला था,कांग्रेस आरोप लगाती रही हैं छत्तीसगढ़ की खदान, वन, जंगल, जमीन सरकार कारपोरेट जगत के हवाले कर चुकी हैं और आगे भी उसकी यहीं मंशा हैं
और अब बस.....
0विष्णु सरकार में सीपीआर का दिल्ली कनेक्शन चर्चा में हैं, सीपीआर से हटने के बाद आईपीएस मयंक श्रीवास्तव डिप्टी डायरेक्ट जनरल स्पोर्ट एथारिटी दिल्ली बने तो आई ए एस डॉ रवि मित्तल, डिप्टी सेक्रेटरी पीऍमओ बने हैँ।
0 मंत्रालय में प्रमुख सचिवों, सचिवों के विभाग बदलने की चर्चा तेज है।
0छत्तीसगढ़ में मतांतरण को लेकर जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की बेंच ने आदेश में कहा है कि किसी व्यक्ति को अपने निजी आवास में शांति पूर्ण प्रार्थना सभा आयोजित करने का अधिकार है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया, प्रार्थना सभा के लिए पहले से अनुमति लेना जरूरी नहीं है।