यह सिर्फ़ तुलना नहीं है, यह सत्ता के चरित्र का एक्स–रे है।सन 1967 में भुवनेश्वर में पीएम इंदिरा गांधी पर भीड़ से पथराव हुआ, उनकी नाक टूट गई। एक महिला थीं, दर्द असली था। ख़तरा वास्तविक था। लेकिन उन्होंने सभास्थल नहीं छोड़ा। न डर का प्रदर्शन किया, न भीड़ को राष्ट्रद्रोही कहा, न लोकतंत्र को सुरक्षा के बहाने गिरवी रखा।आज पीएम एक किताब के पन्ने और कुछ खुलासों से घबरा कर संसद नहीं आये....।देश के लोकसभा अध्यक्ष खुले आम कहते हैँ कि पीएम इसलिए नहीं आए क्योंकि विरोधी उनकी जान ले सकते है,यह लोकतंत्र की हत्या नहीं तो क्या है?2009 में अहमदा बाद में डॉ मनमोहन सिंह पर जूता फेंका गया, वह उनके कान के पास से गया। यह एक गंभीर सुरक्षा चूक थी। तब गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी थे। लेकिन मनमोहन सिंह ने आरोप–प्रत्यारोप नहीं किए,न किसी को साज़िश कर्ता कहा, न राजनीतिक रुदन किया। क्योंकि गली- छाप राजनीति नहीं, राज नीतिक मर्यादा जानते थे।पहले के पीएम स्टेट्समेन होते थे,संजीदा,गंभीर, आत्म विश्वासी।अब तो ड्रामेबाज़, नौटंकीबाज़, डर को हथियार बनाने का चलन शुरू हो गया है ।पीएम नरेंद्र मोदी को देश को जवाब देना होगा, संसद भवन में ही पीएम सुरक्षित महसूस नहीं करते ,तो देश का आम नागरिक खुद को कैसे सुरक्षित माने...? एक महिला इंदिरा टूटी हुई नाक लेकर नहीं भागीऔर तथा कथित 56 इंची व्यक्ति है, जो डर के चलते लोस में ही नहीं आये...? कहीं एप्सटीन की फ़ाइलें और एक पूर्व लेफ्टि नेंट जनरल की किताब उसकी पोल न खोल दे..?लोकतंत्र बहादुरी से चलता है, बहानों से नहीं।नेतृत्व साहस से पहचाना जाता है, डर की पटकथाओं से नही.....!
छत्तीसगढ़ बजट .5,700 करोड़ से
1.72 लाख करोड़...
छत्तीसगढ़ में 5 वित्त मंत्री, 4 दौर और1.72 लाख करोड़ के बजट तक पहुंचने की कहानी...।हिसाब-ए-दौर बदलता रहा, पर सवाल वही रहा, खजाना कितना बढ़ा…और जेब में आया क्या...? छत्तीसगढ़ का बजट केवल आय-व्यय का बहीखाता नहीं, बल्कि 25 सालों की राजनीतिक सोच, प्रतीकों, प्राथमिकताओं की कहानी है। साल 2000 में राज्य गठन के समय बजट लगभग 5,700 करोड़ ₹ था। साल 2025 -26 में यह बजट 1 लाख 65 हजार करोड़ तक पहुंचा। आज वही बजट 25 गुना बढ़कर 1करोड़ 72 लाख करोड़ ₹ की दहलीज तक पहुंच की गया है।छ्ग का यह 26वां बजट था । पहला बजट राजकुमार कॉलेज के टेंट में पेश किया गया था। वित्तमंत्री रहे रामचंद्र सिंहदेव ने उंगलियों पर खर्च गिनाया था। वहीं रमन कार्यकाल में बगावत करने पर अमर अग्र वाल को वित्तमंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ गई थी,भूपेश कार्यकाल की बात करें तो पहली बार गोबर से बने ब्रीफ केस से बजट पेश किया गया था, जबकि ओपी चौधरी ने ढोकरा शिल्प से बने ब्रीफकेस से ज्ञान थीम पर पहली बार डिजिटल बजट पेश किया था। 2001 में वित्त मंत्री रामचंद्र सिंहदेव ने राजकुमार कॉलेज ग्राउंड में टेंट में बजट पेश किया था। सिंहदेव इतने सख्त थे कि हर खर्चे के प्रस्ताव पर आपत्ति की उंगली रख देते थे। सरकारी खजाने से पैसा निकलवाना बहुत मुश्किल था। हां यह अलग विषय था कि उनका हर फैसला राज्य के हित में होता था। वे सरकारी कोष का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं कर सकते थे। बताया जाता है, सिंहदेव के इस रवैये के चलते जोगी सरकार में भी टकराव की स्थिति आई थी। कई विवाद भी उठे थे।जोगी सर कार की विदाई के बाद डॉ रमनसिंह सीएम बने और वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी अमर अग्रवाल को सौंपी गई। साल 2006 में राजनीतिक परिस्थितियों ने करवट ली।भाजपा के 12 विधायकों ने रमन सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला। वे लोग दिल्ली जाकर केंद्रीय नेतृत्व के सामने अपनी शिकायत भी कर आए थे। इनमें ननकीराम कंवर और अमर अग्रवाल शामिल थे। विवाद शांत हुआ, लेकिन बागी विधायकों पर कार्रवाई हो गई।अमर अग्रवाल से वित्त विभाग वापस ले लिया गया। इसके बाद सीएम डॉ. रमन सिंह ने 12 बार बजट प्रस्तुत किया, जो एक रिकॉर्ड है। इसी अवधि में प्रति व्यक्ति आय में 4 बार 20% से अधिक वृद्धि दर्ज की गई। बजट का आकार बढ़ा,आम लोगों की आय में भी सुधार दिखाई दिया।हालांकि रमन सिंह के कार्यकाल के बाद प्रति व्यक्ति आय की वृद्धि दर घटकर लगभग 10-11% रह गई। बजट लगातार बढ़ता रहा, लेकिन आय वृद्धि की गति कुछ धीमी पड़ गई,15 साल बाद 2018 में सत्ता पर कांग्रेस लौटी थी। इस दौरान छत्तीसगढ़िया वाद को खूब भुनाया। भूपेश बघेल ने प्रदेश में गोबर खरीदी शुरू की। इसी तर्ज पर साल 2022 में सीएम भूपेश बघेल ने गोबर से बने ब्रीफकेस में बजट पेश कर सबका ध्यान आकर्षित किया।यह प्रस्तुति छ्ग की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बनी। गोकुल धाम गौठान में निर्मित यह ब्रीफ केस संदेश देता था,अपनी परंपरा को आर्थिक नीति से जोड़ रहा है।भूपेश के बाद विष्णुदेव की सरकार बनी,17 सालों बाद राज्य को स्वतंत्र वित्त मंत्री के रूप में ओपी चौधरी मिले। ओपी चौधरी ने पहली बार जो ब्रीफकेस लेकर सदन में पहुंचे थे,ब्लैक कलर के ब्रीफकेस के फ्रंट पर आदिम जनजाति कला की प्रसिद्ध पहचान 'ढोकरा शिल्प' की झलक थी।पहली बार उन्होंने सदन में डिजिटल बजट पेश किया।पहला बजट ‘ज्ञान’-गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी पर केंद्रित रहा। दूसरा बजट ‘गति’ की रण नीति पर आधारित था। अब तीसरा बजट सुशासन, अधोसंरचना, तकनीक और इन्फ्रास्ट्रचर डेवलपमेंट पर केंद्रित है।
25 सालों में 25
गुना विस्तार
राज्य का बजट 5,700 करोड़ ₹ से बढ़कर 1.72 लाख करोड़ से ज्यादा हो चुका है। 25 सालों में 25 गुना बढ़ गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश की प्रति व्यक्ति वार्षिक आय 1 लाख 62 हजार 870 रुपए है, जो प्रतिदिन लगभग 446 रुपए के बराबर है।छत्तीसगढ़ के बजट की 25 वर्षों की यात्रा में हर सरकार ने अपनी अलग प्राथमिकताएं तय कीं, वित्तीय अनुशासन, सांस्कृ तिक अस्मिता, तकनीकी नवाचार। अब जब राज्य करीब 2 लाख करोड़ रुपए की दहलीज पर है, तो असली कसौटी यही है कि क्या यह बढ़ती राशि आम नागरिक के जीवन में उतना ही प्रभावी बदलाव ला पाएगी, जितनी तेजी से बजट आकार बढ़ा है...?
पति छ्ग के सीएस, पत्नी
नीति आयोग की सीईओ......
छत्तीसगढ़ की सीनियर आईएएस अधिकारी निधि छिब्बर एक बार फिर सुर्खियों में हैं,उन्हें नीति आयोग के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह जिम्मेदारी उन्हें छग काडर के आईएएस बी वीआर सुब्रह्मण्यम के तीन वर्षीय कार्यकाल पूरा होने के बाद अंतरिम रूप से दी गई है।डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (डीओपी टी) के आधिकारिक आदेश के अनुसार, नियमित नियुक्ति होने तक या अगले आदेश तक इस पद की जिम्मेदारी संभालेंगी। यहां यह बताना भी जरुरी है निधि छिब्बर के पति आईएएस विकासशील छग के मुख्य सचिव है।
और अब बस.......
0 पूर्व आईएएस गणेश शंकर मिश्र को छत्तीसगढ़ नीति आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया है।इसके पहले इस पद पऱ सीएस सुनील कुमार, अभिताभ जैन रह चुके हैं।
0 जेल से जमानत पऱ छूटे क़वासी लखमा की भाजपा से निकटता को लेकर तरह की चर्चा हो रही है?
0 बस्तर को कारपोरेट सेक्टर को सौंपने के कांग्रेसी आरोप को सीएम विष्णुदेव ने नकार दिया है।
0 महतारी वंदन योजना, छ्ग सरकार के स्थापना व्यय, किसानों से धान खरीदी के बाद छ्ग में विकास के लिये क्या बचेगा...?