आज से शुरू हुआ जैन समाज का पर्युषण राज पर्व : संयम, तप, त्याग और आत्मशुद्धि के दस दिवसीय महापर्व में गूंजेगा अहिंसा और क्षमा का संदेश
Praveen Nishee Tue, Sep 15, 2026

मनेंद्रगढ़। एमसीबी । जैन समाज के सबसे पवित्र एवं महत्वपूर्ण पर्व पर्युषण राज महापर्व का शुभारंभ आज से हो गया। दस दिवसीय इस आध्यात्मिक पर्व के दौरान जैन अनुयायी संयम, तप, त्याग, आत्मचिंतन और साधना के माध्यम से कर्मों की निर्जरा तथा आत्मशुद्धि का प्रयास करेंगे। भगवान महावीर स्वामी द्वारा बताए गए अहिंसा, सत्य, संयम और आत्मकल्याण के मार्ग को जीवन में उतारना इस पर्व का प्रमुख उद्देश्य है।
पर्युषण पर्व को जैन धर्म में आत्मनिरीक्षण और आत्मशुद्धि का अवसर माना जाता है। इन दस दिनों में जैन समाज के श्रद्धालु विभिन्न धार्मिक क्रियाओं, पूजन, विधान, स्वाध्याय, तपस्या एवं संयम का पालन करते हुए अपने जीवन में व्याप्त क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों को कम करने का संकल्प लेते हैं।
जैन अनुयायी राजेश कुमार जैन ने बताया कि पर्युषण राज महापर्व जैन समाज का सबसे बड़ा आध्यात्मिक पर्व है। यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि स्वयं को भीतर से बदलने, आत्मचिंतन करने और जीवन को धर्म एवं सदाचार की दिशा में ले जाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि दस धर्मों की साधना मनुष्य के जीवन को सार्थक बनाने के साथ आत्मकल्याण की दिशा में प्रेरित करती है।
दस धर्म देते हैं जीवन को नई दिशा
पर्युषण पर्व के दौरान जैन धर्म के दस उत्तम धर्मों का विशेष रूप से चिंतन एवं पालन किया जाता है—
उत्तम क्षमा — क्रोध का त्याग कर समता एवं क्षमा का भाव धारण करना।
उत्तम मार्दव — अहंकार, अभिमान और गर्व का त्याग कर विनम्रता अपनाना।
उत्तम आर्जव — छल-कपट और मायाचारी से दूर रहकर मन, वचन और कर्म में सरलता एवं ईमानदारी रखना।
उत्तम शौच — लोभ का त्याग कर संतोष धारण करना तथा बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक पवित्रता की ओर बढ़ना।
उत्तम सत्य — असत्य का त्याग कर सत्य का मार्ग अपनाना और संयमित वाणी का प्रयोग करना।
उत्तम संयम — इंद्रियों पर नियंत्रण रखते हुए सभी जीवों के प्रति दया, करुणा और अहिंसा का भाव रखना।
उत्तम तप — आत्मशुद्धि एवं कर्मों की निर्जरा के लिए तप, साधना और आत्मचिंतन करना।
उत्तम त्याग — दान, सेवा और सांसारिक वस्तुओं के मोह से स्वयं को मुक्त करने का प्रयास करना।
उत्तम आकिंचन्य — परिग्रह एवं तृष्णा का त्याग कर यह भाव रखना कि अत्यधिक संग्रह ही दुख का कारण बनता है।
उत्तम ब्रह्मचर्य — विकारों से स्वयं को दूर रखते हुए आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना में मन लगाना।
जिनालयों में होंगे विशेष धार्मिक आयोजन
पर्युषण राज पर्व के दौरान जैन मंदिरों एवं जिनालयों में प्रातःकाल से ही धार्मिक आयोजनों का सिलसिला शुरू होगा। श्रद्धालुओं द्वारा श्रीजी का अभिषेक, वृहद शांति धारा, अष्टद्रव्य पूजन एवं विभिन्न धार्मिक विधान संपन्न किए जाएंगे। इसके साथ ही आत्मशुद्धि एवं धर्मज्ञान के लिए प्रवचन, स्वाध्याय और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे।
दस दिनों तक चलने वाला यह पर्व जैन समाज को बाहरी आडंबरों से अधिक आत्मचिंतन, संयम और सदाचार की ओर प्रेरित करता है। पर्युषण का मूल संदेश यही है कि मनुष्य अपने भीतर झांके, अपनी भूलों का आत्मावलोकन करे और क्षमा, अहिंसा तथा त्याग के मार्ग पर आगे बढ़े।
पर्युषण पर्व का संदेश — कषायों पर विजय, कर्मों की निर्जरा और आत्मा की शुद्धि।

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