फुल बोर्ड के निर्णय के बावजूद पदोन्नति नहीं मिलने का आरोप : 30-40 साल सेवा के बाद भी बिना पदोन्नति सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारी, महिला श्रमिकों के साथ भेदभाव का आरोप
मनेंद्रगढ़। एमसीबी। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) में स्वीकृत मैनपावर बजट के अनुरूप पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति एवं नियमितीकरण नहीं दिए जाने का मामला सामने आया है। हिंद मजदूर सभा की ओर से कोल इंडिया लिमिटेड के त्रिपक्षीय सेफ्टी बोर्ड में प्रतिनिधित्व कर रहे अख्तर जावेद उस्मानी ने इस संबंध में एसईसीएल के निदेशक मानव संसाधन को पत्र लिखकर व्यवस्था में सुधार की मांग की है।
उस्मानी ने पत्र में कहा है कि एसईसीएल में कंपनी के फुल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स द्वारा प्रत्येक वर्ष नॉन-एग्जीक्यूटिव कैडर के श्रमिकों के लिए मैनपावर बजट को मंजूरी दी जाती है। इसी स्वीकृत मैनपावर के आधार पर पात्र कर्मचारियों की पदोन्नति एवं नियमितीकरण की प्रक्रिया होनी चाहिए। उनका आरोप है कि पिछले कई वर्षों से विभिन्न स्तरों पर फुल बोर्ड के निर्णय का अपेक्षित रूप से पालन नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मैनपावर बजट में स्वीकृत पदों के बावजूद सभी पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति नहीं मिल रही है। विशेष रूप से सरफेस एवं महिला कर्मचारी इससे प्रभावित हो रहे हैं। विभागीय पदोन्नति समिति की प्रक्रिया में शामिल होकर पदोन्नति एवं नियमितीकरण के पात्र कर्मचारियों को भी लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।
30-40 साल सेवा के बाद भी प्रमोशन नहीं
अख्तर जावेद उस्मानी के अनुसार, हर वर्ष कुछ कर्मचारी 30 से 40 वर्षों की सेवा पूरी करने के बाद बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि इनमें बड़ी संख्या महिला श्रमिकों की है। उनका आरोप है कि महिला श्रमिकों की पदोन्नति कैटेगरी-6 से ऊपर नहीं हो पा रही है, जिससे उनमें निराशा का माहौल है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि स्वीकृत मैनपावर के अनुरूप पदोन्नति नहीं की जा रही है तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती।
रिक्त पदों पर तत्काल पदोन्नति की मांग
एचएमएस प्रतिनिधि ने एसईसीएल मुख्यालय से मांग की है कि पूर्व वित्तीय वर्ष के लिए स्वीकृत मैनपावर में अभी तक रिक्त पड़े सैकड़ों पदों को भरने के लिए स्पष्ट एवं प्रभावी दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। अनुमोदित लेकिन रिक्त पदों पर सभी प्रमोशन जोन में पात्र श्रमिकों के चयन, पदोन्नति एवं नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करने की मांग की गई है।
उस्मानी ने कहा कि रुक-रुककर पदोन्नति आदेश जारी होने से कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि जनवरी और मार्च में पदोन्नति के पात्र हुए कई कर्मचारी सितंबर माह समाप्त होने तक भी पदोन्नत नहीं हो सके हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पदोन्नति एवं नियमितीकरण की व्यवस्था में शीघ्र सुधार नहीं किया गया तो श्रमिकों के हित में आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।

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