: प्रकृति की गोद में केवई नदी पर बना घाघी जलप्रपात
Tue, Apr 11, 2023
एनसीबी जिला मैं पर्यटन की अनेक संभावनाये है । प्रकृति ने इस जिले को अनेक जलप्रपात दिए हैं, परंतु यह आज पर्यटन प्रेमियों के जानकारी के अभाव में अनेक स्थान लोगों के संपर्क में नहीं आ पा रहा है इसको लेकर हमारा कारवां चल निकला है उसे हम सभी को जानकारी दें दे रहे हैं नए-नए जगहों से सभी को परिचित करवाने का हमारा प्रयास है इसी कड़ी में वरिष्ठ साहित्यकार कवि विरेंद्र श्रीवास्तव की कलम से............
(बीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की कलम से)
प्रकृति की गोद में हमें मानसिक चिंताओं से दूर करने और सूकून के लिए किसी पेड़ की छांव में सुस्ताने और आपको मानसिक शांति देने के लिए अकूत खजानाभरा हुआ है. ऐसी ही एक जगह प्रकृति की गोद में बिखरी मुग्ध कर देने वाली प्राकृतिक सौंदर्य की विरासत मनेंद्रगढ़ से लगभग 35 किलोमीटर दूर ग्राम तारा बहरा से आगे करिया बहरा गांव से होकर आगे चलने वाली केवई नदी पर कल कल ध्वनि के साथ प्राकृतिक रूप से गिरता हुआ जलप्रपात का झरना है. जिसे स्थानीय ग्रामवासी घाघी जलप्रपात के नाम से जानते हैं.
स्टेट हाईवे क्रमांक मनेन्द्रगढ़ कठौतिया होकर जनकपुर जाने वाले मार्ग के मुख्य मार्ग ने बसे ग्राम तारा बहरा से लगभग 3 किलोमीटर अंदर जंगल के बीच केवई नदी का यह जलप्रपात मिलता है. किंवदंतियों में यह क्षेत्र वनवासी भगवान श्री राम के दंडकारण्य मैं प्रवेश के साथ आगे की यात्रा इन्हीं जंगलों से होकर गुजरी थी.
वनों में काफी कटाव हो जाने के बावजूद भी महुआ, साल, एवं सागौन के मिश्रित वनो की दूर तक फैली श्रंखला आपको आश्चर्य एवं जिग्यासा के साथ "वाह बहुत सुंदर" कहने को मजबूर कर देगी. वनों की सुंदरता से भरे इस अंचल मैं आपको रास्ते में काले और लाल मुंह के लंगूर तथा हनुमान बंदरों की श्रृंखला भी बच्चों का मनोरंजन करती दिखाई देंगी. तीन जल धाराओं की लगभग 30 फुट नीचे गिरती पत्थरों से फिसल कर नीचे चट्टानों में गिरती जल धाराएं बूंदों में परिवर्तित हो जाती है. वही इस गर्मी में भी किनारे की छोटी चट्टानों पर बिखरती पानी की धाराएं उछलती कुदती और गिरकर चट्टानों की छाती पर पसर जाती है .ऐसा लगता है कि जल धार के बच्चे घिसलपट्टी पर फिसलकर आनंद ले रहे हैं .यह सब दृश्य देखने के बाद लगता है प्रकृति के पास अकूत खजाना भरा हुआ है. आपको खुश रखने और मानसिक शांति देने के लिए. बस आपको उनके पास पहुंचना होगा. उन्हें उनके ही रूप में देखने के लिए और प्राकृतिक सौंदर्य को बचाए रखने के वादे के साथ. आइए प्रकृति कोसुरक्षा का विश्वास दिलाए और उसके सौंदर्य मे समा जाएं ।