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साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड : 04 श्रमिक कानूनों को वापस लेने की मांग, कोयला मजदूर सभा ने सौंपा ज्ञापन

Praveen Nishee Wed, Apr 1, 2026

मनेंद्रगढ़ (एमसीबी)।कोयला मजदूर सभा, हसदेव क्षेत्र (हिन्द मजदूर सभा से सम्बद्ध) के क्षेत्रीय महासचिव सुनील पाण्डेय के नेतृत्व में श्रमिकों की ओर से प्रधानमंत्री, भारत सरकार के नाम क्षेत्रीय महाप्रबंधक, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) हसदेव क्षेत्र को ज्ञापन सौंपा गया।

ज्ञापन में केन्द्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार नए श्रम कानूनों (Labour Codes) को पुनर्विचार हेतु वापस लेने और उनके क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग की गई है।

मुख्य मांगें और आपत्तियां

कोयला मजदूर सभा ने ज्ञापन में निम्न प्रमुख बिंदु उठाए:

औद्योगिक प्रतिष्ठान की सीमा बढ़ाई गई

नए कानून के अनुसार अब 300 श्रमिकों वाली इकाई ही औद्योगिक प्रतिष्ठान मानी जाएगी, जबकि पहले यह सीमा 100 थी।

स्थायी आदेश लागू होने की सीमा में वृद्धि

अभिप्रमाणित स्थायी आदेश अब केवल 300 या उससे अधिक श्रमिकों पर लागू होंगे।

छोटी इकाइयों की सीमा बढ़ाई गई

बिना बिजली वाले प्रतिष्ठानों में सीमा 10 से बढ़ाकर 20

बिजली आधारित इकाइयों में 20 से बढ़ाकर 40 श्रमिक कर दी गई

80% औद्योगिक इकाइयों पर प्रभाव

सभा का दावा है कि इन बदलावों से देश की लगभग 80% इकाइयां श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगी।

श्रमिकों में असुरक्षा की स्थिति

सावधि सेवा नियम लागू होने से स्थायी रोजगार की सुरक्षा खत्म होगी और अनिश्चितता बढ़ेगी।

भारतीय श्रम परिषद की बैठक नहीं

2015 से श्रम परिषद की बैठक नहीं होने पर भी आपत्ति जताई गई, जिससे त्रिपक्षीय संवाद (सरकार, मजदूर, मालिक) प्रभावित हुआ है।

कानूनों पर पर्याप्त चर्चा नहीं

आरोप लगाया गया कि कोरोना काल में बिना पर्याप्त संसदीय चर्चा और समिति परीक्षण के इन कानूनों को पारित किया गया।

श्रमिक अधिकारों पर असर

सभा के अनुसार ये कानून पूंजीपतियों के पक्ष में हैं और श्रमिकों के बुनियादी अधिकारों को कमजोर करते हैं।

सम्मानजनक जीवन का अधिकार

मजदूरों ने कहा कि देश के विकास में उनका योगदान रहा है, इसलिए उन्हें भी सम्मानजनक जीवन का अधिकार मिलना चाहिए।

सभा की प्रमुख मांग

कोयला मजदूर सभा ने मांग की है कि:

चारों श्रम कानूनों को वापस लिया जाए

राष्ट्रीय श्रम परिषद की पुनर्स्थापना की जाए

श्रम कानूनों में किसी भी बदलाव से पहले व्यापक चर्चा और सहमति बनाई जाए

निष्कर्ष

सभा का कहना है कि वर्तमान स्वरूप में इन कानूनों को लागू करने से देश के लगभग 60% नागरिकों और 80% श्रमिक वर्ग के अधिकारों का हनन होगा।

यह ज्ञापन SECL हसदेव क्षेत्र के श्रमिकों की ओर से पुनर्विचार हेतु प्रस्तुत किया गया है।

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