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विद्यार्थियों ने सीड बॉल तकनीक से शुरू की प्रकृति संवारने की अनूठी पहल : शासकीय हाई स्कूल पिपरिया में डॉ. विनोद कुमार पांडेय की पहल से वर्षों से तैयार हो रहे सीड बॉल,

Praveen Nishee Sun, Aug 9, 2026

मनेंद्रगढ़। एमसीबी। पर्यावरण संरक्षण आज केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित विषय नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की जिम्मेदारी बन चुका है। इसी सोच को व्यवहारिक रूप देने की दिशा में शासकीय हाई स्कूल पिपरिया के विद्यार्थियों द्वारा वर्षों से एक अभिनव पहल की जा रही है। विद्यालय की व्याख्याता डॉ. विनोद कुमार पांडेय के मार्गदर्शन में छात्र-छात्राएं लगातार सीड बॉल (Seed Ball) तैयार करना सीख रहे हैं और इनके माध्यम से प्रकृति में हरियाली बढ़ाने का संदेश दे रहे हैं। सीड बॉल तकनीक में बीजों को मिट्टी जैसे प्राकृतिक माध्यम से सुरक्षित आवरण देकर ऐसे स्थानों पर पहुंचाया जाता है, जहां पारंपरिक तरीके से पौधरोपण करना कठिन होता है। यही वजह है कि बंजर, परती और अनुपयोगी भूमि में हरियाली विकसित करने के लिए यह तकनीक उपयोगी मानी जाती है।

कक्षा से निकला पर्यावरण संरक्षण का संदेश

डॉ. विनोद कुमार पांडेय द्वारा विद्यार्थियों को कई वर्षों से सीड बॉल तैयार करने की प्रक्रिया सिखाई जा रही है। इसका उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को एक नई तकनीक से परिचित कराना नहीं, बल्कि उनमें पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना है। विद्यार्थियों ने इस पहल में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए बड़े पैमाने पर सीडबॉल तैयार किए हैं। इस दौरान उन्हें यह भी समझाया जाता है कि बीजों को किस प्रकार सुरक्षित रखा जाए और उचित स्थान पर पहुंचाकर प्राकृतिक रूप से पौधों के विकास की संभावना बढ़ाई जाए।

बंजर जमीन में हरियाली की उम्मीद

सीडबॉल तकनीक का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इसके माध्यम से ऐसे क्षेत्रों में भी हरियाली बढ़ाने का प्रयास किया जा सकता है, जहां नियमित पौधरोपण करना आसान नहीं होता। बंजर, परती और अनुपयोगी भूमि पर सीडबॉल का उपयोग कर वहां प्राकृतिक रूप से पौधों के उगने की संभावना तैयार की जाती है। विद्यार्थियों के लिए यह गतिविधि किताबों से बाहर निकलकर करके सीखने का अवसर भी बन रही है। वे बीज, मिट्टी, प्रकृति और पौधों के जीवन-चक्र को व्यावहारिक रूप से समझ रहे हैं। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण को अपने दैनिक जीवन से जोड़ने की सीख भी प्राप्त कर रहे हैं।

विद्यार्थियों ने संभाली हरियाली की जिम्मेदारी

सीडबॉल अभियान की खासियत यह है कि इसमें विद्यालय के छात्र-छात्राएं स्वयं सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। बड़े पैमाने पर सीडबॉल तैयार कर विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए उम्र नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति और जिम्मेदारी की भावना जरूरी है। डॉ. पांडेय की यह पहल विद्यार्थियों को केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें यह समझने का अवसर देती है कि प्रकृति को बचाने और हरियाली बढ़ाने के लिए स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे नवाचार भी प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।

‘एक बीज, अनेक संभावनाएं’

पिपरिया के विद्यार्थियों की यह पहल आने वाली पीढ़ी में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी विकसित करने की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण है। सीडबॉल के माध्यम से तैयार किया गया प्रत्येक बीज भविष्य में एक पौधे का रूप ले सकता है और यही पौधे मिलकर किसी बंजर या अनुपयोगी भूमि को हरियाली में बदलने की संभावना पैदा करते हैं। शासकीय हाई स्कूल पिपरिया की यह पहल बताती है कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत बड़े संसाधनों से नहीं, बल्कि एक छोटे से बीज और उसे बचाने की जिम्मेदारी से भी की जा सकती है। डॉ. पांडेय के मार्गदर्शन में विद्यार्थी आज सीड बॉल बना रहे हैं, ताकि आने वाले कल की धरती अधिक हरी, सुरक्षित और जीवनदायी बन सके।

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