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: 142 साल पुराना थाना, पहले ओड़िसा,मप्र तथा अब छ्ग का हिस्सा .....

Admin Tue, Nov 19, 2024

छत्तीसगढ़ का एक थाना क्षेत्र कभी ओड़िसा,मध्य प्रदेश, बाद में छत्तीसगढ़ का हिस्सा बना।1882 में बनाया गया था सरायपाली थाना.. यानि आज से 142 साल पहले..। मप्र के समय ओड़िसा की सीमा पर था और अभी छ्ग की सीमा पर है।महासमुंद जिले में व्यावसायिक दृष्टिकोण से एक नगर सरायपाली के इतिहास के साथ, पुलिस थाना का इतिहास अत्यंत ही पुराना है।सरायपाली थाना में ही एक पटल पर इतिहास की जानकारी दी गई है,जो कि अत्यंत ही रोचक है।हालांकि पुराने थाना की जगह नया भवन बन चुका है।महाभारत से लेकर अंग्रेजों,ओड़िशा से इसका इतिहास जुड़ा हुआ है लेकिन दुर्भाग्य है कि इतिहास की जानकारी समाप्त हो चुकी है।थाना के पटल पर महाभारत में चन्द्रवंशी क्षत्रियों के राज्य, शिशुपाल गढ़ को प्रतीक बताया गया है, शिशुपाल का इतिहास अब शायद ही क्षेत्र के लोग जानते होंगे..!थाना सरायपाली, महासमुंद जिले की सीमा का अंतिम थाना है, उत्तर में थाना सरसींवा जिला बलौदाबाजार,थाना सारंगढ़ जिला सारंगढ़ पहले रायगढ़ ,पूर्व में ओडिशा थाना सोहेला,दक्षिण में है थाना मेल्छामुंडा पदमपुर है। पश्चिम में थाना बसना जिला महासमुंद की सीमा है। ऐतिहासिक दृष्टि से यह प्राचीनकालीन देश का ही उपप्रान्त रहा है जिस का क्षेत्रफल 1060 वर्ग मील था। पूर्व में थाना रायपुर जिले में था, 6 जुलाई 1998 को जिला महासमुंद बनने पर नये जिले में है।यह महाभारत काल में ही चन्द्रवंशी क्षत्रियों का राज्य रहा, शिशुपालगढ़ इसका प्रतीक है। जगन्नाथपुरी की तीर्थयात्रा जाने वाले श्रद्धालु सहस्त्र वर्षों से इस मार्ग पर चलते रहे हैं। यहां व्यापार बंजारा (नायक) पणियों (पनिका) द्वारा संचालित था। पहले राज्यसत्ता गोंड़ सामंतोँ के अधिकार में रही, सम्पूर्ण क्षेत्र गढ़फुलझर के नाम विख्यात है, जिसमे 752 ग्राम थे, यहाँ के राजा बस्तीपाली में रहते थे,विधवा रानी ने गोंड़ जमीदार के पूर्वज को गोद लिया,1861 से संबलपुर,रायपुर, बिलासपुर जिले बनाये गए,अत्याचारी अंग्रेज सेना के मृत सैनिकों को फुलझर जमींदार ने अपने क्षेत्र में गाड़ने से रोका तो सारंगढ़ के गोंड़ सामंत ने इनको अपने क्षेत्र में दफन कराया।1865 के बाद से विधिवत शासन स्थापित हो सका,उसी समय 1882 में सरायपाली थाना भी बनाया गया तब सम्बलपुर ओड़िशा में था,बसना पुलिस चौकी भी इसके अधीन थी।1895 में पुलिस व्यवस्था का पुनर्गठन किया गया,अक्टूबर 1903 से सरायपाली क्षेत्र में 260 ग्राम थे,अक्टूबर 1903 में सरायपाली व बसना क्षेत्र रायपुर जिले में मिला दिया गया था। उसी वर्ष थाना का भवन बनकर तैयार हुआ। 6 जुलाई 1998 को जिला पुर्नगठन के तहत महासमुंद को अलग जिले का दर्जा दिया गया और इसी दिन महासमुंद जिला अस्तित्व में आया,1 नवंबर 2000 को राज्य पुर्नगठन के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य मध्यप्रदेश से अलग होकर अस्तित्व में आया और नए राज्य का शुभारंभ हुआ। (पुराने थाने की फोटो और थाने के इतिहास से सम्बंधित पटल)

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