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14th August 2026

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पूर्व कोरिया रियासत में स्वतंत्रता आंदोलन (पूर्व कोरिया रियासत जिसमें वर्तमान एमसीबी व कोरिया जिले का ऐतिहासिक विवरण)

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स्वतंत्रता दिवस पर विशेष लेख,इतिहासकार डॉ विनोद कुमार पांडेय की कलम से : पूर्व कोरिया रियासत में स्वतंत्रता आंदोलन (पूर्व कोरिया रियासत जिसमें वर्तमान एमसीबी व कोरिया जिले का ऐतिहासिक विवरण)

Praveen Nishee Fri, Aug 14, 2026

इतिहासकार डॉ विनोद कुमार पांडेय कोरिया रियासत के स्वतंत्रता आंदोलन के बारे में बताया कि रियासत का सीधा स्वतंत्रता आंदोलन से संपर्क नहीं रहा। यह एक छोटी सी रियासत थी। राजतंत्र होने के कारण ब्रिटिश सरकार के नियमों का ही पालन किया जाता था । हालांकि मनेद्रगढ़- चिरमिरी- भरतपुर जिले में स्वतंत्रता आंदोलन का सूत्रपात 15 फरवरी 1932 को घुटरा ग्राम के गोंड़ विद्रोह से शंखनाद हुआ था जिसमें कई लोग मारे गए थे ।

वर्ष 1946 में कोरिया रियासत के दो प्रमुख जन नेता, जो विभिन्न कालरी संगठनों से जुड़े हुए थे ।रतनलाल मालवीय और पंडित रामकुमार दुबे। इन्होंने रियासत में स्वतंत्रता आंदोलन का सूत्रपात किया। नीलगिरी स्टेट की घटनाओं के बाद हर जगह आंदोलन ने जोर पकड़ा, मालवीय जी ने सरगुजा स्टेट में प्रवेश कर आंदोलन की तैयारी प्रारंभ कर दी । 2 दिसंबर 1947 को पटना(कोरिया) मीटिंग में सरगुजा में आंदोलन की घोषणा की गई । सन् 1947 में इस क्षेत्र में आवागमन की कमी थी ट्रक वगैरह जो सीमित साधन थे। सरगुजा जाने पर रोक लगा दिया गया अतः तारीख 3 दिसंबर 1947 को ज्वाला प्रसाद उपाध्याय का कार्यकर्ताओं ने पैदल जाना का निश्चय किया देश में गांधी जी के आंदोलन के चलते यहां पर भी काफी भीड़ इकट्ठा हो गई थी इन्हीं लोगों ने आगे चलकर विलय के पक्ष में समर्थन जुटाया ।

रियासत के विलय की प्रक्रिया इतनी जटिल थी वह विवादास्पद थी ।फिर भी सरदार पटेल अपने बुद्धिमानी से इसे बहुत आसान कर दिया तथा तत्कालीन भारत को लोकतंत्र के कतार में लाकर खड़ा कर दिया, जिसकी उस समय कल्पना भी नहीं की जा सकती थी ।भारत की स्वाधीनता के साथ छोटी-छोटी रियासते, अपनी स्वतंत्रता की सोच रहे थे। हालांकि इससे पहले 5 जुलाई 1947 को अलग रियासत विभाग बनाकर इसका कार्यभार सरदार वल्लभभाई पटेल को सौंप दिया गया था लेकिन बड़ी रियासतों के जटिल समस्या में उलझे होने के कारण इन छोटी रियासतों पर विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा था। फलस्वरुप छत्तीसगढ़ तथा उड़ीसा की रियासतों ने 1946 मैं पूर्वी राज्य संघ का निर्माण कर लिया था ।

छत्तीसगढ़ की देशी रियासतों को भारतीय संघ में विलय हेतु सरदार वल्लभभाई पटेल तथा रियासत विभाग के सचिव बीपी मेनन विशेष विमान से मैसूर, कटक से 15 दिसंबर 1947 को नागपुर पहुंचे तथा मध्य प्रांत के मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल द्वारका प्रसाद मिश्रा व अन्य लोगों ने इनका स्वागत किया वह बैठक में भाग लेने सरकारी हाउस सीधे पहुंचे इस ऐतिहासिक बैठक में छत्तीसगढ़ के 14 रियासतों में 12 रियासतों में शासको ने भाग लिया तथा अस्वस्थता के कारण दो राज्यों के दीवान बैठक सम्मिलित हुए 15 दिसंबर 1947 को विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर दिया तत्कालीन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल ने भारतीय संविधान परिषद का सदस्य मनोनीत कर रतनलाल मालवीय जी (मनेंद्रगढ़)को राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्षेत्र विकसित करने का मौका दिया संविधान परिषद की सदस्यता के बाद 1954 से 1966 तक मालवीय जी राज्यसभा के सदस्य रहें तथा 1962 से 1964 तक तथा 1964 से 1966 तक पंडित जवाहरलाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री जी के मंत्रिमंडल में भारत के केंद्रीय उप श्रम मंत्री रहे सेंट्रल हॉस्पिटल( सन् 1965) के निर्माण मे उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा, वह इस क्षेत्र की प्रमुख जन नेता रहे ।

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