वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे की कलम से..*(कॉलम 21 सालों से लगातार) : बेबसी का इक समंदर दूर तक फैला हुआ.... और कश्ती कागजी पतवार के साये में है....
Praveen Nishee Fri, Jul 17, 2026
मप्र में जल्द लागू होगा यूसीसी ,कमेटी ने सीएम यादव को सौंपी फाइनल रिपोर्ट, इधर छ्ग के सीएम ने भी यूसीसी लागू करने की बात कही हैं। आरएसएस, भाजपा का एक धड़ा शुरू से समान नागरिक संहिता की वकालत करता रहा है। मुद्दा भाजपा के एजेंडे में शामिल है। प्रथम दृष्टया कानून बड़ा लुभावना लगता है,इसके पीछे का तर्क है, देश के सभी नागरिकों पर सामान कानून लागू होना चाहिये,सतही तौर पर उचित भी लगता है लेकिन इसका विरोध क्यों किया जा रहा है?आपका सीधा जवाब होगा, चूंकि अल्पसंख्यक वर्ग प्रभा वित होगा इसलिये.....! लेकिन कानून से सिर्फ अल्प संख्यक ही नहीं बल्कि एक बड़ा समुदाय भी प्रभावित होने वाला है,समान नागरिक संहिता की बात करनेवालों की नजर सिर्फ अल्पसंख्यकों के अधिकारों को हड़पने भर का नहीं, संसाधनों से भरी जमीन पर अधिकार हासिल करना है। संविधान लोगों को अपनी धारणा, आस्था और परंपरा के साथ रहने, जीने की आजादी देता है यदि आप किसी धर्म को मानते हैं तो उसी अनुसार आचरण करें, परंपराओं का निर्वहन करें। लेकिन जब समान नागरिक संहिता की बात होती है तो कहा जाता है कि इससे सिर्फ मुसलमान प्रभावित होगा। 4 शादियां नहीं कर सकता, आसानी से तलाक नहीं ले सकता वगैरह-वगैरह...। कुल मिलाकर यह कानून सिर्फ मुसलमानों के लिए मुसीबत साबित होगा लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। समान नाग रिक संहिता जब लागू होगी तो देशका मूलनिवासी यानी आदिवासी भी इसके जद में आएगा। देश के कई जनजा तीय समुदायों में भी अलग- अलग परंपराएं, मान्यताएं हैं, उन्हें संविधान के तहत उनकी मान्यताओं के अनुरूप रहने, व्यवहार करने विवाह करने की स्वतंत्रता है...? उनके लिए भी उनके अधिकारों को सुरक्षित रखने अलग कानून हैं ? इसमें सबसे महत्वपूर्ण है धारा 170 ख,जिसमें आदिवासी विकास खंडों में उनकी जमीन कोई गैर आदिवासी नहीं खरीद सकता,सामान्य विकास खंडों में जमीन तो सामान्य आदमी बिना कले क्टर की अनुमति के नहीं खरीद सकता। इस नियम पर कई बार उद्योगपतियों ने उंगली उठाई है क्योंकि इससे आदिवासी इलाकों में संसा धनों का दोहन या उद्योगों की स्थापना में रोड़े आते हैं, ओडि शा,नियमगिरि में वेदांता कंपनी की आयरन माइंस इसी कारण रद्द कर दी गई थी।जब यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होगा,170 ख जैसे नियमों को हटाया जा सकेगा...उद्योग पतियों को मुक्तहस्त से आदि वासियों, उनके क्षेत्र के संसा धनों को लूटने का अवसर मिलेगा...। जब सबके लिए एक कानून होगा,आरक्षण की व्यव स्था बेमानी हो जायेगी, सबके लिए एक कानून में व्यवस्था भी फिट नहीं बैठती है।इस तरह की मांग भाजपा के अंदरखाने से उठने लगी है।इसके अलावा यदि सबके लिए एक कानून होगा तो अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम,जिससे इस तबके की सुरक्षा का बड़ा बेहतर कानून माना जाता है उसकी उपयोगिता, प्रासंगिकता क्या होगी...! संभवतः तुरंत इन सभी कानूनों पर कोई निर्णय न हो पाए लेकिन, कालांतर में ये सभी कानून असंवैधानिक हो जाएंगे और कोर्ट के जरिये या अमेंडमेंट के जरिये खत्म किया जाता रहेगा। क्या इस कानून के पारित होने के बाद सिक्ख कृपाण लेकर कहीं जा पाएंगे ?अलग अलग धर्मों में अपनी अलग परंपराएं,मान्य ताएं,धारणाएं हैं। मुस्लिम, ईसाई धर्म में विवाह एक समझौता हैऔर हिंदू धर्म के लिए यह जन्म जन्मांतर का रिश्ता..।यूनिफॉर्म सिविल कोड में विवाह को क्या माना जाएगा ? जन्म जन्मांतर का रिश्ता या समझौता ? और कोई यह कैसे तय करेगा कि हम अपने विवाह संस्कार को समझौता समझें या जन्मांतर का रिश्ता। यह तो हमें तय करना है। हिंदू विवाह अधि नियम में तलाक की प्रक्रिया काफ़ी कठिन है,मुस्लिमों में आसान...,ऐसे में यूनिफॉर्म सिविल कोड इस प्रक्रिया को आसान करेगा या सरल...? कई आदिवासी समुदायों को भी एक से अधिक विवाह करने की छूट है,उनके साथ क्या सलूक किया जाएगा ? ऐसे कई ज्वलंत सवाल हैं।अव्वल यही माना जा रहा है कि सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड आदिवासियों के हितों, परपराओं, जमीनों के अधि कार को सबसे पहले संकुचित करेगी और धीरे -धीरे उन्हें इससे वंचित होना पड़ेगा। इससे मुस्लिमों की परंपराओं, ईसाइयों की आस्था से किसी को नुकसान नहीं है लेकिन आदिवासियों के अधिकारों से उद्योगपति सबसे ज्यादा परे शान हैं और उन्हीं परंपराएं, मान्यताएं,उनके अधिकारों को कम करने या खत्म करने सरकार या यूं कहें उद्योग पतियों के पक्षकार इस कानून के साथ हैं और उससे ही उन्हें फायदा होने वाला है।
बस्तर में पढ़े अजय, बने
राजनांदगांव के आईजी.....
बस्तर के नक्सल प्रभावित के सुदूरअंचल में सरकारी स्कूलों में हिन्दी से पढ़ाई कर जगदल पुर के सरकारी कालेज से स्नातक,बाद में स्नातकोत्तर एसएससी तक पढ़ाई करने वाले 2004 बैच केआईपीएस अजय यादव को राजनांदगांव आईजी बनाया गया है।राज धानी रायपुर के एसएसपी भी रह चुके हैं। काँकेर,जांजगीर, दुर्ग,बिलासपुर, रायपुर में भी एसपी बनाना बड़ी उपलब्धि है। बस्तर में स्कूली शिक्षा, रविशंकर विवि शिक्षणविभाग से एसएसपी परीक्षा उत्तीर्ण की। पिता कृषि विभाग में कार्यरत थे। उनकी प्रेरणा से ही अजय ने यूपी एससी की परीक्षा एक नहीं तीन बार पास की। पहले ही प्रयास में भारतीय लेखा सेवा में चय नित हुए ,फिर भी आईपीएस बनने की तमन्ना थी दूसरी, तीसरी बार वे आईपीएस में चयनित हो गये। वैसे अजय के बारे में कहा जाता है कि वे टीम भावना से काम करते हैं साथ ही अपने स्टॉफ को पूरा संरक्षण देते हैं। उनका मानना है 'आई लव टु टेक लाईफएज इट कम... मतलब जिंदगी जैसे आ रही है वैसे ही जीना है,उसी में अपना सौ परसेंट जीना है।
पति-पत्नी दोनों एसपी,
छ्ग में बना रिकार्ड.....
छत्तीसगढ़ में पति कलेक्टर, पत्नी एसपी तो पदस्थ हो ही चुके हैँ पर पहली बार दो जिलों में पति -पत्नी एसपी पदस्थ किये गये हैँ। जांजगीर के एसपी विजय पांडे हैँ, जो नक्सली क्षेत्र में अपनी नौकरी के कुल 24 सालों में 12 साल अपनी सेवाएं दी, इसीलिये आईपीएस होने पर जांजगीर का एसपी बनाया गया है।वहीं उनकी पत्नी भावना पांडे को धमतरी जिला एसपी बनाया गया है।उनका विशेष शाखा (एसबी) में लम्बे समय तक 15 साल पदस्थ रहने का भी रिकार्ड है। ये नक्सली क्षेत्र में भी पदस्थ रह चुकी हैँ।आई पीएस अवार्ड के बाद उन्हें पहली बार धमतरी, एसपी बनाया गया है। रायपुर में ही पढ़ाई करने वाली भावना के पिता डीसी पांडे भी छ्ग में लम्बे समय तक रायपुर, धम तरी,सारंगढ़,रायगढ़,धमतरी, बलौदा बाजार आदि ने एस डीऍम, एडीऍम, एडीशनल कलेक्टर रह चुके हैं।अब बेटी और दामाद दोनों एसपी बन चुके हैं।
तारकेश्वर, दीपमाला,
अर्चना बने उपायुक्त..
छत्तीसगढ़ सरकार ने रायपुर पुलिस कमिश्नरेट प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 3 डीसीपी की पोस्टिंग में फेरबदल किया है। जारी आदेश के अनुसार, तारकेश्वर पटेल को अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (जोन मध्य) से उपायुक्त(जोन मध्य)बनाया गया। दीपमाला कश्यप को बिलासपुर में विशेष शाखा में पुलिस अधीक्षक पद से उपा युक्त(जोन उत्तर), रायपुर पद स्थ किया गया। अर्चना झा को अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय, प्रशिक्षण, डीएस बी,अजाक,सीडब्ल्यूसी) से उपायुक्त (यातायात, प्रोटो कॉल), रायपुर की जिम्मेदारी दी गई। सभी पुलिस आयुक्त संजीव शुक्ला के साथ पहले भी काम कर चुके हैँ।
और अब बस....
070 सालों का हिसाब माँगने वाले एक मंदिर के'चढ़ावे' का हिसाब नहीं दे पा रहे हैं-भूपेश बघेल
0छ्ग सरकार खुद औसत ₹6 प्रति यूनिट बेच रही है बिजली, लेकिन सोलर उपभोक्ताओं से सिर्फ ₹1.94 में खरीदने का फैसला...पहले ₹2.50 प्रति यूनिट की दर से होती थी खरीदी....।
0जगदलपुर एसपी ऑफिस के बहुचर्चित वेतन घोटाले में जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। शुरुआती अनुमान 2 करोड़ रुपये का था, लेकिन अब वित्तीय गड़बड़ी बढ़कर 3.40 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
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