: बालगंगाधर तिलक की नातिन,छ्ग का राजकुमार कॉलेज,पड़ोसी रहे रिज़वी परिवार से निकटता..
Admin Sat, Dec 21, 2024
बाल गंगाधर तिलक जिन्हें लोकमान्य तिलक के नाम से भी जाना जाता है, एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे।बाल गंगाधर तिलक 'लाल बाल पाल' त्रिमूर्ति में से एक थे। ब्रिटिश अधिकारियों ने उन्हें 'भारतीय अशांति का जनक' कहा तो महात्मा गांधी ने उन्हें 'आधुनिक भारत का निर्माता' कहा।बाल गंगाधर तिलक (1856 -1920) को लोकमान्य कहा जाता था जिसका अर्थ है लोगों द्वारा स्वीकृत व्यक्ति....। उन्होंने स्वराज यानी स्व शासन की पुरजोर वकालत की।"स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा" उनका प्रसिद्ध कथन था।नेताओं को स्वतंत्रता संग्राम की नींव रखने में मदद की। तिलक का जन्म 23 जुलाई 1856 में हुआ,निधन 1अगस्त1920 में हुआ। प्रभावशाली भारतीय राष्ट्रवादी नेता, समाज सुधारक थे ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।तिलक की विचारधारा राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने, स्वशासन की वकालत करने,भारतीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण के इर्द-गिर्द घूमती थी। तिलक के नेतृत्व और दृढ़ निश्चय ने उन्हें भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में एक प्रमुख व्यक्ति बना दिया।
ऐतिहासिक राज कुमार कॉलेज में विष्णु वेंकटेश सोवानी,सैयद अहमद रिज़वी दोनों कार्यरत तो थे वहीँ दोनों पड़ोसी भी थे।सोवानी की पत्नी बाल गंगाधर तिलक की नातिन यानि बेटी की बेटी थी। दोनों परिवार की दोस्ती की मिशाल लोग अभी देते हैँ , सोवानी की पत्नी निर्मला,रिज़वी की पत्नी स्वालेहा में भी गहरी दोस्ती थी।सोवानी परिवार अब पूना में रहता है तो रिज़वी परिवार के दो बेटे डॉ. सैयद जावेद रिज़वी और सैयदआफ़ताब रिज़वी भिलाई में रहते हैं।छ्ग के राजकुमार कॉलेज रायपुर में कान्तिकारी बाल गंगाधर तिलक की छोटी बेटी रमा बाई साणे की बेटी निर्मला सोवानी,अपने पति शिक्षा विद विष्णु वेंकटेश सोवानी 4 बेटियाँ आशा,ललिता, चित्रा,अरुणा के साथ रहती थीं,सोवानी भाऊ 1964 से 1969 तक राजकुमार कॉलेज के प्राचार्य भी रहे वहीँ कॉलेज कैम्पस में ही उनके पड़ोसी सैयद अहमद साईंद रिज़वी भी रहते थे, वरिष्ठ पदों पर रहे, भिलाई इस्पात संयंत्र में 1972 में सीनियर सेकेण्डरी स्कूल सेक्टर-10 की स्थापना में विशेष योगदान दिया और भिलाई में ही रहने लगे,दोनों बेटे डॉ सैयद आफ़ताब (मेडिसिन) डॉ सैयद जावेद (सर्जरी), किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं।दोनों बड़े, छोटे रिज़वी के नाम से पहचाने जाते हैं।डॉ एस.जावेद रिज़वी की मानेँ तो दोनों परिवारों सोवानी-रिज़वी में काफ़ी घरोबा था, हम लोग सोवानी दम्पति को आई- बाबा कहते थे और श्रीमती सोवानी के पिता को आजोबा(नाना )कहा करते थे। दो घर थे पर एक परिवार की तरह रहते थे,साथ रहना, खाना,पिकनिक जाना भी होता था।विवेकानंद आश्रम में हमारे पिता इस्लाम पर सोवानी सनातन परम्परा पर भी अपने उदगार प्रकट करने जाया करते थे ,बाद में हम लोग भिलाई चले गये,ये लोग पूना चले गये परन्तु पारिवारिक रिश्ते पहले की तरह ही क़ायम रहे। (यहां बताना जरुरी है कि 2005 में मेरा एक बड़ा कठिन आपरेशन डॉ जावेद रिजवी ने सेक्टर 9 भिलाई अस्पताल में किया था, तब से उनसे मेरी निकटता बढ़ी है)
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