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"कविता चौराहे पर साहित्य मंच मुंगेली"  : मुंगेली साहित्य मंच सम्मान समारोह मे बीरेन्द्र श्रीवास्तव सम्मानित

Praveen Nishee Tue, Jan 6, 2026

मनेन्द्रगढ़। एमसीबी। "कविता चौराहे पर साहित्य मंच मुंगेली"  का  21 वां स्थापना दिवस एवं सम्मान समारोह मनेन्द्रगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार बीरेन्द्र श्रीवास्तव के मुख्य आतिथ्य एवं बिलासपुर के साहित्यकार विजय  कुमार तिवारी जी की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। छत्तीसगढ़  के बिलासपुर, रायगढ़, रायपुर  दुर्ग से आए साहित्यकारों एवं स्थानीय नागरिकों के बीच  प्रथम सत्र कार्यक्रम में  "वीर बलिदान सम्मान" नक्सल उन्मूलन  में शहीद स्वर्गीय राजकमल कश्यप के माता-पिता को एवं आजीवन साहित्य सेवा सम्मान साहित्यकार बुधराम यादव को प्रदान किया गया।  इसी प्रकार द्वितीय सत्र में बीरेन्द्र श्रीवास्तव एवं विजय तिवारी को शाल श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर संस्था संयोजक राकेश गुप्त द्वारा सम्मानित किया गया।  इस अवसर पर रायगढ़ से आए प्रोफेसर डॉक्टर चंद्रशेखर सिंह एवं प्रमोद पाठक के कर कमलों से छत्तीसगढ़ के वीर सेनानी की शहादत को सम्मानित करते हुए  एक सम्मान पत्र और स्मृति चिन्ह उनके माता-पिता को सम्मान सहित सौपा गया।  इसी तरह  साहित्यकार बुधराम यादव को शाल श्रीफल एवं सम्मान पत्र प्रदान कर  "आजीवन साहित्य सेवी सम्मान" से सम्मानित किया गया। द्वितीय सत्र के कवि सम्मेलन में स्थानीय साहित्यकारों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के अलग-अलग क्षेत्र के साहित्यकारों ने अपने गीत एवं कविताओं  की प्रस्तुति से मंच को बांध दिया।  छत्तीसगढ़ मनेंद्रगढ़ से साहित्यकार कवि गौरव अग्रवाल ने अपनी कविताओं से भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक धरोहर प्रस्तुत कर मंच पर समा बांध दिया। मुख्य अतिथि बीरेन्द्र श्रीवास्तव ने अपने मुक्तक एवं नई कविता प्रस्तुति के तेवर से मंच को ऊंचाइयां दी, उन्होंने मंच पर मनेन्द्रगढ़ की "संबोधन साहित्य एवं कला परिषद"  संस्था की जानकारी देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ की पुरानी साहित्यिक संस्थाओं में से संबोधन संस्था एक है  "कविता चौराहे पर साहित्य मंच"  के संयोजक राकेश गुप्त निर्मल छत्तीसगढ़ की 48 वर्षों की साहित्यिक संस्था संबोधन के सदस्य रह चुके हैं । इस संस्था द्वारा मनेन्द्रगढ़ में 1990 से प्रदर्शित किए जाने वाले "कविता चौराहे पर"  को एक उद्देश्य बनाकर उसके लगातार प्रदर्शन से आज बीस वर्षों में मुंगेली में एक कीर्तिमान बना दिया है जिसमें आज देश भर के साहित्यकार जुड़े हुए हैं। उनकी सफलता पर बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि आज मुझे गर्व हो रहा है की संबोधन का एक छोटा सा सितारा आज मुंगेली की धरती पर एक समृद्ध मंच का नेतृत्व कर रहा है। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री विजय तिवारी ने गौरव अग्रवाल की कविताओं का उल्लेख करते हुए कहा की गौरव अग्रवाल की प्रभावी कविताएं इनकी असीम संभावनाओं को व्यक्त करती है। इन कविताओं की रांची आर्मी स्कूल में मंचीय प्रस्तुति की जानकारी मिलने पर उन्होंने गौरव अग्रवाल को साहित्य के शिखर तक पहुंचने की बधाइयां दी।

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