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: छठ पूजा: सूर्य देवता और छठी मैया की आराधना का पर्व, अयोध्या से शुरू हुई परंपरा

Admin Thu, Nov 7, 2024

मनेन्द्रगढ़।एमसीबी । देशभर में छठ पूजा की तैयारियां पूरे जोरों पर हैं। यह पर्व खासतौर से सूर्य देवता और छठी मैया की उपासना के लिए प्रसिद्ध है। हर साल, लाखों लोग चार दिनों तक चलने वाले इस कठिन तपस्या के व्रत को संतान सुख, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए रखते हैं। छठ पर्व का दूसरा दिन आज नहाए-खाए के साथ मनाया जा रहा है, और व्रती तैयारियों में जुट गए हैं। एमसीबी जिला में भी छठ पर्व को लेकर लोगों में उत्साह का माहौल है। राम-सीता की कथा से जुड़ी छठ पूजा की परंपरा पौराणिक कथाओं के अनुसार, छठ पूजा की शुरुआत तब हुई जब भगवान श्री राम 14 वर्षों का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे। राज्याभिषेक के बाद माता सीता ने अपने परिवार और राज्य की सुख-समृद्धि के लिए सूर्य देव की उपासना की और छठ व्रत का पालन किया। कहते हैं, उनकी इस आराधना से राज्य में सुख-शांति का संचार हुआ और तभी से यह परंपरा हर वर्ष जारी है। छठ व्रत का कठोर तप, शुद्धता की विशेष परंपरा छठ व्रत को अत्यंत कठिन तपस्या माना जाता है। इसमें व्रती चार दिनों तक निराहार रहकर, सूरज की पहली और अंतिम किरण को अर्घ्य देते हुए व्रत का पालन करते हैं। संजय सिंह बताते हैं कि छठ पूजा में विशेष रूप से शुद्धता का ध्यान रखा जाता है। बाजार से लाया गया गेहूं प्रसाद के लिए बड़े पवित्रता से सूखाया और पिसाया जाता है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि गेहूं पर कोई पक्षी न बैठे, ताकि इसकी पवित्रता बनी रहे। प्रसाद में प्रयुक्त फलों और फूलों की शुद्धता का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। छठ व्रत का महत्व और सामाजिक समर्पण छठ पर्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। यह पर्व जाति-धर्म की सीमाओं से परे है और समाज में आपसी समर्पण और सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है। लोग अपने दुख-सुख को भूलकर एक साथ छठी मैया की उपासना करते हैं, जिससे समाज में एकता और प्रेम का संदेश फैलता है। आस्था का संगम: सूर्य देवता और छठी मैया की कृपा छठ व्रत में सूर्य देव और छठी मैया का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि छठी मैया संतान सुख, स्वास्थ्य और सौभाग्य की देवी हैं। जो व्रती श्रद्धा-भाव से इस पूजा का पालन करते हैं, उनके जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

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