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: हिंदी में संविधान और छत्तीसगढ़ का योगदान.....

Admin Tue, Nov 26, 2024

छत्तीसगढ के घनश्यामसिंह गुप्ता को संविधान सभा ने हिंदी अनुवाद करने वाली समिति का अध्यक्ष बनाया था। आज हिंदी में संविधान सभा की उपलब्धता का श्रेय इन्हे जाता है। दुर्ग छग के रहने वाले घनश्याम गुप्ता अंग्रेजों के भारत में कब्जे के समय सीपी एंड बरार स्टेट ( मप्र, छग, महाराष्ट्र आदि इसके अधीन था) में 14 सालों तक विधानसभा अध्यक्ष भी रहे थे। इन्होंने ही देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को 24 जन वरी 1950 को संविधान सभा की हिंदी अनुवाद की प्रति सौंपी थीं। यहां यह बताना भी जरुरी हे कि संविधान कि हिंदी प्रति में 282 लोगोँ के हस्ताक्षर हैं तो अंग्रेजी प्रति में 278 लोगोँ ने अपना हस्ताक्षर किया था। छत्तीसगढ के इस बेटे को संविधान दिवस पर नमन तथा गर्व करना तो बनता है। भारत में हर साल 26 नवंबर को राष्ट्रीय संविधान दिवस मनाया जाता है। वैसे इस दिवस को 2015 से मनाया जा रहा है।1949 में पहली बार भारतीय संविधान को अपनाये जाने का प्रतीक है,जो 2 साल,11 महीना,18 दिन में बनकर तैयार हुआ था।26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ,जिससे भारत एक संप्रभु गणराज्य बन गया।डॉ.भीमराव अंबेडकर को भारतीय संविधान के जनक के रूप में जाना जाता है, जो संविधानसभा के अध्यक्ष थे। सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी। यह संविधान निर्माण की शुरुआत थी। संविधान में पहला संशोधन 1951 में हुआ और तब से संविधान में बदलाव होते रहे हैं।संविधान सभी नागरिकों को मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रता की गारंटी देने के साथ सरकार, उसके कार्यों की रूपरेखा स्थापित करता है।यह दिन संविधान के मूल्यों-न्याय,समानता, विवि धता में एकता का महत्व याद दिलाता है।यह दिन नागरिकों को लोक तांत्रिक सिद्धांतों का सम्मान करने, उन्हें बनाए रखने प्रोत्साहित करता है,संविधान से पहले भारत में सत्ता का स्वरूप कुछ और था,संविधान के बाद का देश,एक नया भारत बना,इसका सम्मान, पालन करना हर भारतीय का कर्तव्य है क्योंकि इस बारे में बाबा साहब ने चेता वनी देते हुए कहा था कि अगर संविधान को लागू करने वाले लोग ठीक नहीं रहे तो यह केवल कागजों का ही पुलिंदा बनकर रह जाएगा...!

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