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उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व की व्यवस्था पर गंभीर सवाल : अघन’ की मौत के बाद भी नहीं चेता विभाग! अब ओडिशा से आई बीमार हथिनी की भी इलाज के दौरान मौत

Praveen Nishee Sat, Jan 17, 2026

गरियाबंद ।( रोशनलाल अवस्थी) उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व (USTR) में हाथियों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। नवंबर 2024 में ‘अघन’ नामक हाथी शावक की मौत को लेकर उठे सवाल अभी शांत भी नहीं हुए थे कि अब ओडिशा से आई 10–12 वर्ष की बीमार हथिनी की इलाज के दौरान मौत ने एक बार फिर वन विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

लगातार हो रही घटनाएं यह संकेत देती हैं कि न तो पिछली घटनाओं से कोई ठोस सबक लिया गया और न ही हाथियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य निगरानी और अंतरराज्यीय समन्वय को लेकर प्रभावी व्यवस्था विकसित की जा सकी।

‘अघन’ की मौत: एक गंभीर चेतावनी

उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व क्षेत्र के कूकरार जंगल (गरियाबंद जिला) में नवंबर 2024 (7 से 11 नवंबर के बीच) ‘अघन’ नामक हाथी शावक की मौत हुई थी।

यह शावक ओडिशा से आए सिकासेर हाथी दल का हिस्सा था।

जांच और उपलब्ध तथ्यों के अनुसार—

शावक पोटाश बम के विस्फोट की चपेट में आ गया था

विस्फोट से उसके जबड़े और पैर में गंभीर चोटें आईं

घायल होने के कारण वह अपनी मां और दल से बिछड़ गया

लंबे समय तक घायल रहने से उसकी हालत बिगड़ती चली गई और वह कुपोषण का शिकार हो गया

हालांकि वन विभाग द्वारा इलाज किए जाने के दावे किए गए, लेकिन 11 नवंबर 2024 के आसपास शावक ने दम तोड़ दिया। इस घटना ने न सिर्फ अवैध पोटाश बमों की मौजूदगी बल्कि निगरानी और त्वरित चिकित्सा व्यवस्था की कमजोरियों को भी उजागर किया था।

इतिहास की पुनरावृत्ति: हथिनी की मौत

‘अघन’ की मौत के करीब एक साल बाद, एक बार फिर ऐसी ही लापरवाही के संकेत सामने आए हैं।

ओडिशा से गरियाबंद और धमतरी होते हुए USTR पहुंची एक बीमार हथिनी को 22 दिसंबर को ट्रैक किया गया था। उस समय वह मल त्याग नहीं कर पा रही थी और भोजन भी नहीं कर रही थी।

पिछले 7 दिनों से उसका इलाज चल रहा था।

बीच में उसकी हालत में कुछ सुधार भी देखा गया—

मल त्याग शुरू हुआ

आंशिक रूप से भोजन लेने लगी

इससे अमला आश्वस्त हो चला था कि हथिनी खतरे से बाहर है। लेकिन 15 जनवरी को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और 16 जनवरी की सुबह उसकी मौत हो गई।

इलाज के दौरान जंगल सफारी एवं कानन पेंडारी ज़ू के चिकित्सकों की मदद ली गई। USTR का हाथी मित्र दल लगातार निगरानी और दवा पिलाने में जुटा रहा, इसके बावजूद हथिनी की जान नहीं बचाई जा सकी।

लगातार बढ़ रही सिंगल हाथियों की आवाजाही

स्थिति को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि पिछले दो हफ्तों में दो सिंगल हाथी भी USTR क्षेत्र में प्रवेश कर चुके हैं। विशेषज्ञ इसे ओडिशा–छत्तीसगढ़ हाथी कॉरिडोर में असंतुलन, भोजन संकट और बीमारी के संकेत के रूप में देख रहे हैं।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार, पर जवाबदेही जरूरी

वन विभाग का कहना है कि हथिनी की मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही होगा।

हालांकि सवाल यह है कि—

क्या हर मौत के बाद सिर्फ जांच रिपोर्ट ही पर्याप्त होगी?

क्या ‘अघन’ की तरह यह मामला भी फाइलों तक सीमित रह जाएगा?

‘अघन’ की मौत एक चेतावनी थी,

हथिनी की मौत एक गंभीर परिणाम —

अब भी यदि व्यवस्था नहीं सुधरी,

तो उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व में हाथियों का भविष्य और अधिक संकट में पड़ सकता है।

यह मामला अब केवल वन्यजीव संरक्षण का नहीं, बल्कि जवाबदेही, निगरानी और ठोस प्रशासनिक कार्रवाई की मांग करता है।

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