: त्रुटि सुधार - बंदोबस्त प्रपत्र या खर्चा - पानी व्यवस्था
Admin Mon, Jun 24, 2024
राजस्व विभाग या भू अभिलेख शाखा के कागजी कार्यवाही में से एक कार्यवाही जिसका नाम त्रुटि सुधार- शंकर प्रसाद
प्रदेश कल्याण सचिव अंतराष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन ने सुधार कार्य तो होता हैं लेकिन गलती करने वाले विभागीय कर्मचारियों पर कभी न कोई अधिकारी कार्यवाही करते हैं और न ही वह नागरिक इस पर कोई ध्यान देता है इस पर तत्काल ध्यान देकर उचित कार्यवाही की प्रावधान की मांग उठाई गई है ।
राजस्व विभाग या भू अभिलेख शाखा के कागजी कार्यवाही में से एक कार्यवाही जिसका नाम त्रुटि सुधार । यह त्रुटि होता कैसे और करता कौन है ? इसका जिम्मेदार कौन सा टेलब होता है? इससे किसी का कोई सरोकार नही , लेकिन जिसके अभिलेख में यह त्रुटि होती हैं वो भारतीय नागरिक , किसान सुधरवाने के लिये न जाने कितने नए और पुराने दस्तावेज की व्यवस्था करता हैं । उस नागरिक का शासकीय कार्यो में कही कोई हस्तक्षेप नही होता सारा प्रपंच अधिकारी - कर्मचारी का हो लेकिन त्रुटि सुधारने के लिये प्रपत्र और भाग दौड़ किसान के माथे मढ़ा होता है । सामान्य बोल चाल की भाषा मे इसे क्लर्किंग मिस्टेक कहा जा सकता है । सुधार कार्य तो होता हैं लेकिन गलती करने वाले विभागीय कर्मचारियों पर कभी न कोई अधिकारी कार्यवाही करते हैं और न ही वह नागरिक इस पर कोई ध्यान देता है ।।
क्योकि त्रुटि सुधार प्रपत्र में ऐसा कोई विकल्प ही नही होता । होना तो यह चाहिये कि त्रुटि सुधार कार्य उपरांत त्रुटि करने वाले के खिलाफ आला अधिकारी कार्यवाही करें जिससे कि यह व्यवस्था समाप्त हो सकें । इस त्रुटि सुधार व्यवस्था को भरस्टाचार का एक अंश कहना शायद गलत नही होगा । आम नागरिक को परेशान करना या इस बहाने अपनी जेब भरना इस व्यवस्था से बड़े ही सरल तरीके से सम्भव है । तहसील कार्यालय हो या अनुविभागीय कार्यालय में ऐसे आवेदनों की भरमार है । जब भूमि नपाई में किसान का नही पटवारी और आर आई कि कलम चलती है । नामांतरण और सुनवाई में राजस्व विभाग के उच्च अधिकारियों की सील मोहर होती है अलावा सम्बन्धीत दस्तावेज के छायाप्रति संलग्न होते है । इन सब के बावजूद महीनों का समय प्रक्रिया में लग जाते है । फिर भी न जाने अंतिम समय मे कोई न कोई त्रुटि हो ही जाती हैं जिसके सुधार के लिये प्रक्रिया और भी मंहगी एवं जटिल हो जाती है । इस प्रथा के प्रति प्रशासन को विचार करने चाहिये । इस संदर्भ में वर्तमान प्रसासन नई व्यवस्था आरम्भ कर रही फिलहाल यह कार्य छत्तीसगढ़ के 9 जिलों से स्थापित कर चुकी है जिसका नाम जियो रिफेरेसिंग है । भूमि संबंधी विवादो का सही-सही निराकरण
परियोजना के माध्यम से भू-सर्वे का कार्य त्रुटि रहित होने के साथ-साथ बंदोबस्त त्रुटि सुधार प्रकरणों का तेजी से निराकण किया जा सकेगा. सीमांकन कार्य में भूमि संबंधी विवादों का सही-सही निराकरण किया जा सकेगा. जियो-रिफेरेसिंग कार्य से वर्तमान में उपलब्ध पटवारी नक्शा तथा स्थल पर भी भू-सर्वे सत्यापन की प्रक्रिया के लिए राजस्व विभाग द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किया जा रहा है, कलेक्टर को सर्वेक्षण अधिकारी के रूप में अधिकृत किया गया है. सर्वेक्षण अधिकारी के मार्ग-दर्शन में उप-सर्वेक्षण अधिकारी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, सहायक सर्वेक्षण अधिकारी तहसीलदार कार्य करेंगे. राजस्व निरीक्षक एवं पटवारी कलेक्टर के परिवेक्षण में तथा एसडीएम, तहसीलदार के निर्देश में जारी प्रपत्र अनुसार सत्यापन कर नक्शे एवं स्थल के मध्य की भिन्नता को दूर करेंगे ।
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