कलेक्टर के मार्गदर्शन में पर्यावरण और विकास का अनूठा संगम : एमसीबी जिले में प्लास्टिक अपशिष्ट से बनी पहली सड़क, पर्यावरण संरक्षण की ऐतिहासिक पहल
Praveen Nishee Wed, Dec 31, 2025
मनेंद्रगढ़। एमसीबी। जिले में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक नई मिसाल कायम हुई है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत जिले की पहली सड़क का निर्माण प्लास्टिक अपशिष्ट के उपयोग से किया गया है। यह सड़क PWD रोड से मेंड्राडोल होते हुए भररीडांड तक लगभग 2.00 किलोमीटर लंबी है, जो ग्राम पंचायत परसगढ़ी क्षेत्र में स्थित है। इस अभिनव पहल ने न केवल सड़क निर्माण की गुणवत्ता को नई ऊंचाई दी है, बल्कि प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन का भी एक प्रभावी समाधान प्रस्तुत किया है।
कलेक्टर के मार्गदर्शन में पर्यावरण और विकास का अनूठा संगम
कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के दिशा-निर्देशन एवं जिला पंचायत सीईओ श्रीमती अंकिता सोम के मार्गदर्शन में जिले में प्लास्टिक अपशिष्ट के वैज्ञानिक और उपयोगी प्रबंधन की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण अंतर्गत ग्राम पंचायत चनवारीडांड में स्थापित प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई से प्राप्त प्लास्टिक अपशिष्ट को डामर के साथ मिश्रित कर सड़क निर्माण में उपयोग किया गया। इस नवाचार से यह सिद्ध हुआ है कि अपशिष्ट भी संसाधन बन सकता है, यदि उसका सही ढंग से उपयोग किया जाए।
बेहतर गुणवत्ता, अधिक टिकाऊपन और कम लागत
प्लास्टिक मिश्रण से निर्मित इस सड़क की गुणवत्ता सामान्य डामर सड़कों की तुलना में अधिक टिकाऊ मानी जा रही है। जहां आमतौर पर डामर से बनी सड़कें चार से पांच वर्ष तक चलती हैं, वहीं प्लास्टिक अपशिष्ट मिश्रण से बनी यह सड़क छह से सात वर्ष तक टिकाऊ रहने की क्षमता रखती है। इसके साथ ही डामर की खपत कम होने से प्रति किलोमीटर लगभग तीस हजार रुपये की बचत भी हो रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यपालन अभियंता श्री मोतीराम सिंह ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में जिले की लगभग 5.49 किलोमीटर लंबी तीन सड़कों में प्लास्टिक मिश्रण के सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं, जिसके आधार पर भविष्य में जिले की अन्य सड़कों में भी इसका उपयोग किया जाएगा।
प्लास्टिक अपशिष्ट बना आजीविका और स्वच्छता का आधार
जहां कभी प्लास्टिक केवल गंदगी और प्रदूषण का प्रतीक माना जाता था, वहीं आज वही प्लास्टिक एक मजबूत और चमचमाती सड़क का आधार बन गया है। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से सिंगल यूज प्लास्टिक एकत्र कर उसे पृथक्करण, सफाई और श्रेडिंग के बाद सड़क निर्माण में उपयोग किया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में स्वच्छाग्राहियों की महत्वपूर्ण भूमिका है, जिन्हें इससे अतिरिक्त आय और रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। खासकर महिलाओं की प्लास्टिक संग्रहण में रुचि बढ़ी है, जिससे स्वच्छता के साथ-साथ आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिल रहा है। यह पहल न केवल वायु, जल और मृदा प्रदूषण को कम करने में सहायक है, बल्कि वैश्विक समस्या बन चुके प्लास्टिक अपशिष्ट का एक व्यावहारिक और स्थायी समाधान भी प्रस्तुत करती है। जिले में प्लास्टिक अपशिष्ट से सड़क निर्माण का यह प्रयोग आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण, रोजगार सृजन और टिकाऊ विकास का मजबूत आधार बनेगा।

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