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जिला स्तरीय गोधाम समिति की बैठक सम्पन्न : निराश्रित गौवंश संरक्षण हेतु सरकार लाई व्यापक कार्ययोजना

Praveen Nishee Sat, Nov 22, 2025

मनेंद्रगढ़।एमसीबी। जिला स्तरीय गोधाम समिति की बैठक आज अध्यक्ष देवेन्द्र सिंह (कोरिया कॉलरी) की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में जिले में गौवंश संरक्षण, प्रबंधन तथा सरकार द्वारा प्रस्तावित नई गोधाम कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में अशासकीय सदस्य राकेश भानु (मोहन कॉलोनी, हल्दीबाड़ी), राजेन्द्र यादव (लामडाही), मुकेश चंद भानु (मोहन कॉलोनी) और चिकास विश्वकर्मा (खोगापानी) विशेष रूप से उपस्थित रहे।

पदेन सदस्यों में कलेक्टर डी. राहुल वेंकट, पुलिस अधीक्षक रत्ना सिंह, तथा बैठक का संचालन एवं प्रतिवेदन उपसंचालक, पशु चिकित्सा सेवाएँ द्वारा सदस्य सचिव के रूप में किया गया।

बैठक में जिले में संचालित विभिन्न योजनाओं, प्रगति एवं भविष्य की कार्य योजनाओं की समीक्षा की गई। सदस्यों और अधिकारियों ने बताया कि निराश्रित एवं घुमंतू गौवंश की समस्या ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में बढ़ रही है, जिसके समाधान के लिए नई संरचनागत व्यवस्था आवश्यक है।

राज्य सरकार की नई व्यापक योजना पर चर्चा

बैठक में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्यभर में बड़े पैमाने पर ‘गौधाम’ स्थापित करने के निर्णय पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया। राज्य की भौगोलिक स्थिति-सात राज्यों की सीमाओं से घिरा होना तथा 11 राष्ट्रीय राजमार्गों का गुजरना-पशु तस्करी पर प्रभावी कार्रवाई के कारण बड़ी संख्या में गौवंश जप्त होने की स्थिति निर्मित करता है। पंजीकृत गौशालाओं की क्षमता लगभग पूर्ण होने के कारण अब गौधामों की स्थापना अत्यंत आवश्यक मानी जा रही है।

सरकार द्वारा प्रस्तावित गोधाम पंजीकृत गौशालाओं से अलग होंगे तथा इनमें केवल स्थानीय निकायों द्वारा चिन्हांकित निराश्रित पशु एवं गृह विभाग द्वारा जप्त किए गए गौवंश को रखा जाएगा। प्रथम चरण में इन्हें प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों के निकट ग्रामीण क्षेत्रों में विकसित किया जाएगा।

प्रत्येक गोधाम की क्षमता अधिकतम 200 पशु निर्धारित की गई है और भूमि चयन में सुरक्षित बाड़ा, शेड, पानी एवं बिजली जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

संचालन मॉडल और जिम्मेदारियाँ

गौधामों का संचालन पंजीकृत गौशाला समितियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, ट्रस्ट, एनजीओ, किसान उत्पादक कंपनियों और सहकारी समितियों को सौंपा जाएगा। यदि कोई निकटस्थ समिति तैयार नहीं होती तो ‘रुचि की अभिव्यक्ति’ (EoI) आमंत्रित की जाएगी।

चयनित संस्था को पशुओं के दाना-पानी, टीकाकरण, उपचार, कृत्रिम गर्भाधान, नस्ल सुधार, चारागाह विकास, लेखा-संधारण सहित समग्र देखभाल की जिम्मेदारी निभानी होगी।

गौधामों में गोबर व गोमूत्र आधारित जैविक खाद, कीट नियंत्रक, गौकाष्ठ, दंतमंजन, दीया- अगरबत्ती जैसे उत्पादों के निर्माण की व्यवस्था भी की जाएगी, जिससे ग्रामीण रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

अनुदान एवं वित्तीय प्रावधान

राज्य शासन ने चरणबद्ध अनुदान व्यवस्था निर्धारित की है-

प्रथम वर्ष : 10 रुपये/पशु/दिन

द्वितीय वर्ष : 20 रुपये

तृतीय वर्ष : 30 रुपये

चतुर्थ वर्ष : 35 रुपये

200 पशुओं की क्षमता वाले एक गोधाम के संचालन हेतु

प्रथम वर्ष लगभग 19.54 लाख रुपये,

द्वितीय वर्ष 21.34 लाख,

तृतीय वर्ष 28.64 लाख,

चतुर्थ वर्ष 32.29 लाख रुपये की आवश्यकता अनुमानित है।

अधोसंरचना विकास के लिए 5 लाख रुपये तथा चारा विकास के लिए प्रथम वर्ष 2.85 लाख रुपये की अतिरिक्त व्यवस्था भी की गई है।

पंजीयन प्रक्रिया

कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव भेजे जाने के बाद भौतिक सत्यापन एवं निकटस्थ गौशाला समिति की सहमति ली जाएगी। सहमति न होने की स्थिति में EoI प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सभी औपचारिकताओं के पूर्ण होने पर पंजीयन प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा।

बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने कहा कि यह पहल न केवल निराश्रित पशुओं के वैज्ञानिक संरक्षण, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक उत्पादन, रोजगार सृजन एवं किसानों को फसल क्षति तथा दुर्घटनाओं से राहत दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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