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वनाग्नि के खिलाफ बिगुल : इंदागांव बफर में जन-जागरूकता का महाअभियान, उप-निदेशक के नेतृत्व में ग्रामीणों ने लिया वनों की रक्षा का संकल्प

Praveen Nishee Wed, Feb 18, 2026

मैनपुर। इंदागांव।( रोशनलाल अवस्थी की कलम से) वन परिक्षेत्र इंदागांव (धुरवागुड़ी) बफर अंतर्गत आज अग्नि सुरक्षा संबंधी व्यापक जन-जागरूकता अभियान का प्रभावी आयोजन किया गया। ग्राम पीपलखुटा, कांडसर एवं बनवापारा में आयोजित इस अभियान ने ग्रामीणों में वन संरक्षण के प्रति नई चेतना का संचार किया।

कार्यक्रम के दौरान लोकगीतों, पारंपरिक नृत्यों एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से वनाग्नि से होने वाले दुष्परिणामों को सरल और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया। ग्रामीणों को बताया गया कि थोड़ी सी लापरवाही हजारों हेक्टेयर हरित संपदा, वन्यजीवों के आश्रय और पर्यावरणीय संतुलन को भारी क्षति पहुंचा सकती है।

“वन सुरक्षा का संकल्प, जन-जन की भागीदारी“

अभियान में वन प्रबंधन समिति के सभी सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। ग्रामीणों ने वनाग्नि की घटनाओं की त्वरित सूचना देने, आग से बचाव हेतु फायर लाइन बनाने में सहयोग करने तथा संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखने का संकल्प लिया।

वन विभाग की टीम ने विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए अवैध वृक्ष कटाई, अवैध शिकार एवं अवैध उत्खनन जैसी गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाने की आवश्यकता पर बल दिया। बताया गया कि इन कृत्यों से न केवल वन संपदा का क्षरण होता है, बल्कि जैव विविधता और वन्यजीवों का अस्तित्व भी संकट में पड़ जाता है।

”मानव-वन्यप्राणी संघर्ष पर विशेष मार्गदर्शन”

अभियान के दौरान मानव-हाथी संघर्ष एवं अन्य वन्यप्राणी-मानव द्वंद्व की घटनाओं की रोकथाम हेतु आवश्यक सावधानियां और विभागीय दिशा-निर्देश साझा किए गए। ग्रामीणों को रात्रि में सतर्कता, समूह में आवाजाही, वन क्षेत्रों में अनावश्यक प्रवेश से बचाव तथा वन्यजीवों की सूचना तत्काल विभाग को देने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए।

इस व्यापक एवं प्रभावशाली अभियान की सफलता का श्रेय जिला वन अधिकारी (डीएफओ) वरुण जैन के दूरदर्शी नेतृत्व और सक्रिय निगरानी को दिया जा रहा है। उनके मार्गदर्शन में वन विभाग की टीम ने जिस प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ ग्रामीणों को जोड़ा है, वह सराहनीय है।

वन क्षेत्र में बढ़ती तापमान और संभावित अग्नि जोखिम को देखते हुए समय रहते किया गया यह जन-जागरूकता अभियान न केवल वनों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह प्रशासन और जनता के बीच समन्वय का सशक्त उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।

ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा — “वन हमारी धरोहर हैं, उनकी रक्षा हमारा कर्तव्य है।”

वन विभाग की यह पहल निश्चित ही वन संरक्षण के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत आधारशिला सिद्ध होगी।

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