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22nd June 2026

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वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे की कलम से .. {किश्त 258} : मप्र से छ्ग अलग हुआ तो जमीन, जंगल,राशि, अफसर, कर्मचारी, टेबल कुर्सी तक मिला हिस्से में..

Praveen Nishee Sat, Apr 26, 2025

1 नवंबर 2000 को जब छत्तीसगढ़ नये का गठन हुआ तो मप्र ने छत्तीसगढ़ को अपनी 26. 63% जमा राशि, कई प्रतिशत जमीन, जंगल और बहुत सारी चीजें दी थीं।31अक्टूबर 2000 को मध्यप्रदेश का हिस्सा अलग हो गया और स्थापना हुई नये राज्य की, जिसका नाम था छत्तीसगढ़।बता दें कि इस राज्य की स्थापना के बाद मप्र की 26.62% आबादी और 30.4% भूमि चली गई।साथ ही मप्र का 41.42% वन क्षेत्र भी नए राज्य छत्तीसगढ़ में भी आ गया। विभाजन के पहले मप्र में 320 विधानसभा सीटें होती थीं,छत्तीसगढ़ के गठन के बाद 90 सीटें हिस्से में आई। विभाजन के समय मप्र के 07हजार कर्मचारी छत्तीसगढ़ ट्रांसफर किये गए, उस समय मप्र में 496 आईएएस,278 आईपीएस और 385 आईएफएस थे। इनमें 111आईएएस,73 आईपीएस, 99 आईएफएस छत्तीसगढ़ के हिस्से में आये थे। वहीं नये राज्य की सुरक्षा के लिए मप्र के 96 हजार पुलिस कर्मियों में से 26% छत्तीसगढ़ में तैनात किये गये। उस समय के ज्यादातर अधिकारी मध्यप्रदेश में ही रहना चाहते थे,इसलिए पोस्टिंग और प्रशासन के बंटवारे को लेकर को लेकर हाईकोर्ट में कई सालों तक पिटिशन भी दायर होती रहीं....!

26.63% जमाराशि छ्ग को मिली..

बंटवारे के समय मध्यप्रदेश सरकार का स्वीकृत बजट 23 हजार करोड़ ₹ था।बाद जब नया छत्तीसगढ़ राज्य बना तो मप्र के बजट में से प्रारंभिक 5 महीने के खर्च के लिए छग को 3 हजार करोड़ रुपये दिए गए।31 अक्टूबर को क्लोजिंग बैलेंस के आधार पर रिजर्व बैंक ने मप्र और छत्तीसगढ़ की धनराशि का बंटवारा किया था।उस समय मप्र की जितनी जमा राशि थी।उसका 26. 63% छग को दी गई।

एयर बी 200 विमान..

मप्र का एक हेलीकॉप्टर भी नए राज्य को देना पड़ा, दर असल उस समय मप्र के पास एक हेलीकॉप्टर, एक हवाई जहाज हुआ करता था,अब जाहिर सी बात है कि छग नया राज्य बना था तो दिल्ली का दौरा करने के लिए तब के सीएम अजीत जोगी को हेलीकॉप्टर की जरूरत पड़ रही थी,इसी के चलते मप्र ने अपना पवन पुत्र नाम का एयर बी 200 विमान छग को दिया, कुछ दिन बाद छत्तीसगढ़ ने एक नया हेलीकॉप्टर ले लिया, मप्र के तब के सीएम दिग्विजय सिंह ने गांव-गांव की यात्रा करने के लिए हेलीकॉप्टर रख लिया। नया राज्य बना तो बंटवारा सिर्फ कर्मचारियों ,पैसे, जमीन जंगल का ही नहीं हुआ। टेबल, कुर्सियों, अलमारी का भी हुआ। 36 वीआईपी टेबल,345 ऑफिस टेबल, 40 वीआईपी कुर्सियां,985 ऑफिस चेयर,12 बड़ी सेंट्रल टेबल, 466 स्टील अलमारी छत्तीसगढ़ को मिली थी।

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