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: छ्ग के दो रेल्वे स्टेशन “साल्हेकसा,"दर्रेकसा" के नामकरण की रोचक दास्तां...

Admin Wed, Jul 10, 2024

अभी इतिहास में बहुत कुछ लिखा जाना शेष रह गया है, हालांकि जिन पन्नों पर यह लिखा जाना है वे कोरे के कोरे ही आरक्षित है।आरक्षित,इसलिए हैंक्योंकि जो लिखा जाना है वह दस्तावेजों के रूप में फिलहाल आलमारियों में कैद है। या यूं कहें कि उपेक्षित पड़े हुए हैं। पन्नों की गर्द झाड़ते ही, उसकी लकीरों में इतिहास का कोई नया तथ्य,कोई नया किस्सा दमकने लगता है। ऐसा ही एक इतिहास छत्तीसगढ़ में रेलवे का भी है। रेलवे के दिलचस्प इतिहास के किस्से यहां-वहां दफ्तरों की अलमारियों में पड़े- पड़ेऊंघ रहे हैं। सौभाग्य से कुछ पन्ने हाथ लगे तो मैंने धूल झाड़ कर कुछ लकीरों में झांक लिया। भारत में पहली रेल 1853 में मुंबई से थाने के बीच भी चली थी....! व्यवसायिक उद्देश्यों को पूर्ण करने तथा भारत के संसाधनों का दोहन करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने 1887 में बंगाल- नागपुर रेलवे का गठन किया गया था। इसका उद्देश्य हावड़ा से मुंबई जाने के लिए छोटा रूट तैयार करना था। यह रेल लाइन छत्तीसगढ़ से होकर गुजरी। ब्रिटिश शासित क्षेत्र के अलावा तत्कालीन 2 देशी रियासतें, रायगढ़,राजनांदगाँव भी इसी मार्ग में थे।बंगाल-नागपुर रेलमार्ग के रेलवे स्टेशनों के संबंध में सारंगढ़ राजघराने के सदस्य, इतिहास कार डॉ. परिवेश मिश्रा के रोचक लेख पढ़ने को मिलते हैं। उनमें से एक राजनांदगांव जिले की सीमा पर स्थित “साल्हे कसा“और “दर्रेकसा” रेलवे स्टेशनों के किस्सों का जिक्र करता आलेख भी है। इसमें डॉ. परिवेश मिश्रा ने लिखा है कि रेलवे लाइन के काम के दौरान बाधा के रूप में एक बड़ा पहाड़ आ गया, सीनियर अंग्रेज अधिकारी ने अपने जूनियर अधिकारी से कहा कि बाधा को यदि तोड़ना है तो यह सोचो कि पहाड़ के उस तरफ तुम्हारी प्रेमिका है। प्रेरित जूनियर अंग्रेज अफसर ने बार-बार दोहराना आरंभ कर दिया “Shall I kiss her“। साथ काम करने वाले स्थानीय मजदूरों ने जब यह सुना तब वे अपनी स्थानीय बोली में दोहराने लगे,“साल्हेकसा -साल्हेकसा”।पहाड़ टूट गया दूसरी तरफ पहुंचे।अंग्रेज अफसर ने दोहराना आरंभ किया “There I kiss her”। स्थानीय साथियों ने जब यह नया जुमला सुना तो अपनी बोली में दोहराने लगे “दर्रेकसा- दर्रेकसा”। इस तरह उस पहाड़ के दो छोरों पर दो स्टेशनों के नाम पड़ गए....सल्हेकसा और दर्रेकसा। देश के स्वतंत्र होने के बाद रेलवे की सुरक्षा में जनभागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए1950 में तब की सरकार द्वारा रेलवे 'प्रोटेक्शन विलेज रिस्पांसि बिलिटी स्कीम' लाई गई थी सुलभ संदर्भ हेतु उसी योजना का एक प्रतीक यहां पोस्ट कर रहा हूं, राजस्व विभाग में काम करने के दौरान, एक बार राजस्व एवं रेलवे के अभिलेखों में आपसी सामंजस्य नहीं बैठ पा रहा था, तब मैंने रेलवे के अधिकारियों को राजस्व के सबसे पुराने अभिलेख 1929 के मिसल बंदोबस्त का उदाहरण दिया लेकिन मैं उस समय आश्चर्यचकित रह गया जब रेलवे के अधिकारी गार्डनरींच कोलकाता से 1894 और 1912 के बहुत अच्छे तरीक़े से सहेजे अभिलेख ले आये। (आईएएस तारण प्रकाश सिन्हा की वॉल से )

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